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आग सुखाएगी हलक

Thu, 14 Apr 2016 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 14 Apr 2016 12:53 AM IST
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Fire Sukhaagi circles
fire - फोटो : अमर उजाला

पानी अनमोल है। पानी की महत्ता बताते हुए न जाने कितने मुहावरे और कहावतें गढ़ी गईं। पर क्या आप जानते हैं आपकी थोड़ी सी लापरवाही से हर साल कितना पानी बरबाद होता है। आंकड़े बताते हैं कि आग को बुझाने में अग्निशमन विभाग हर साल करोड़ों लीटर पानी खर्च करता है।

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पिछले साल को ही लीजिए, आग बुझाने में दमकल विभाग को करीब डेढ़ करोड़ लीटर पानी बहाना पड़ा। यही नहीं अग्निशमन विभाग के पास आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं।
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फोम टेंडर न होने के कारण यहां केमिकल की आग बुझाने में भी पानी का ही इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें से तकरीबन 95 प्रतिशत पानी शुद्ध और पीने योग्य होता है। पानी की वैकल्पिक व्यवस्था अग्निशमन विभाग के पास नहीं है, जिस कारण भूजल का इस्तेमाल किया जाता है।
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एफएसओ आरके यादव ने बताया कि आग लगने का मुख्य कारण शार्ट सर्किट है। शार्ट सर्किट के ज्यादातर मामले लोगों की लापरवाही की वजह से होते हैं। ये जरा सी लापरवाही न सिर्फ करोड़ों रुपये की क्षति का सबब बनती है, बल्कि करोड़ों लीटर पानी भी आग को बुझाने में लगता है।


बीते साल बर्बाद हुए डेढ़ करोड़ लीटर पानी से ये हो सकता था...
- रोजाना एक व्यक्ति अमूमन तीन लीटर पानी पीने के लिए प्रयोग में लाता है, लिहाजा इतने पानी से 50 लाख लोग एक दिन की प्यास बुझा सकते थे।
- औसतन एक व्यक्ति 40 लीटर पानी रोजाना खर्च करता है, लिहाजा तीन लाख 75 हजार लोग एक दिन का पानी प्रयोग कर सकते थे।
- एक कार को धोने में तकरीबन 300 लीटर पानी खर्च होता है, लिहाजा 50 हजार कारों की एक बार धुलाई की जा सकती थी।
-एक दोपहिया को धोने में करीब 90 लीटर पानी खर्च होता है, लिहाजा 16, 6666 दोपहिया वाहनों को धोया जा सकता था।

ऐसे लगाया जाता अनुमान
आग बुझाने में सालभर में कितना पानी खर्च हुआ, ये अनुमान अग्निशमन के पास मौजूद वाटर टेंडर और बाउजर की क्षमता और हादसों में कितने वाहन इस्तेमाल हुए, इस आधार पर लगाया जाता है। जिले में अग्निशमन के पास दो वाटर बाउजर हैं, जिनकी क्षमता 8 हजार से 12 हजार लीटर पानी की है। 14 वाटर टेंडर/मोटर फायर इंजन हैं, जिनकी क्षमता 2500 लीटर से लेकर 5000 हजार लीटर पानी की है।

67 हाइडेंट में सिर्फ चार सही
अग्निशमन विभाग को पानी के मुहैया कराने केलिए 67 हाइडेंट थे, जिनमें से सिर्फ चार चालू हालत में हैं, बाकी खराब पड़े हैं। एफएसओ का कहना है कि इस संबंध में नगर निगम को भी पत्र लिखे जा चुके हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं होती। फायर ब्रिगेड फिलहाल पानी के लिए निजी संस्थानों और फैक्ट्रियों पर निर्भर है।

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नगर आयुक्त बोले
अग्निशमन विभाग का पत्र अभी नहीं मिला है। सुझाव पर जहां जरूरत होगी हाईडेंट ठीक कराए जाएंगे। कई नलकूपों पर आपात स्थिति में पानी लेने की सुविधा दी गई है। - अब्दुल समद, नगर आयुक्त

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