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Ghaziabad News: आग से सुरक्षा...सुलगते सवाल, बुझे इंतजाम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:55 AM IST
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Fire safety... burning questions, extinguished arrangements
गाजियाबाद। दिल्ली के पालम में आग से नौ लोगों की मौत ने जिस तरह फायर सेफ्टी सिस्टम की पोल खोली, कुछ वैसी ही स्थिति गाजियाबाद में भी है। यहां भी आग से सुरक्षा के इंतजाम सवालों के घेरे में हैं। शहर में एक ओर आबादी और ऊंची इमारतें तेजी से बढ़ रही हैं। अग्निशमन व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। अधिकांश फायर हाइड्रेंट गायब हो चुके हैं। संकरी गलियों और अतिक्रमण के चलते दमकल की गाड़ियां कई इलाकों तक नहीं पहुंच पातीं। संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझता विभाग हादसों से निपटने में असहाय नजर आ रहा है। इसका उदाहरण हाल में जिले के खोड़ा क्षेत्र में देखा जा चुका है, जहां आग लगने से चार लोगों की जान चली गई।
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70 से 80 मीटर ऊंची इमारतें, 42 मीटर तक पहुंच

ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभाग के पास केवल एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म है, जो महज 42 मीटर तक ही पहुंच पाता है। इसके उलट शहर में 70 से 80 मीटर तक ऊंची इमारतें हैं, जहां आग बुझाने के लिए खुद के संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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स्टाफ और संसाधनों की भारी कमी
जानकारी के अनुसार, विभाग के पास तीन एफएसओ, चार एफएसएसओ, सात लीडिंग फायरमैन और 21 फायरमैन की कमी है। इसके अलावा कई जरूरी उपकरणों और वाहनों की भी कमी बनी हुई है। जिले में पांच फायर स्टेशन कोतवाली, साहिबाबाद, वैशाली, मोदीनगर और लोनी हैं। इसके अलावा दो सब स्टेशन हैं। स्टाफ में सीमित संख्या में अधिकारी और केवल 91 फायरमैन ही उपलब्ध हैं। वाहनों की बात करें तो विभाग के पास एक 42 मीटर हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म, 10 बड़े फायर इंजन, 3 छोटे इंजन, 3 वाटर मिस्ट और एक डिजास्टर वैन जैसी सीमित सुविधाएं ही हैं।
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संकरी गलियों में बड़ी चुनौती
संकरी गलियों और अतिक्रमण के कारण दमकल की गाड़ियां कई जगह नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में छोटे फायर टेंडर और बाइक का सहारा लेना पड़ता है, जो बड़ी आग में कारगर नहीं होते। कई बार वाहन दूर खड़ा कर होज पाइप खींचकर ले जाना पड़ता है, जिससे आग पर काबू पाने में देरी होती है।


पहले भी सामने आ चुकी है लाचारी
2024 में लोनी क्षेत्र में रास्ता बाधित होने के कारण दमकल को लंबा रास्ता लेना पड़ा था। इससे देरी हुई और पांच लोगों की जान चली गई। ऐसे हालात अक्सर सामने आ रहे हैं। संकरे रास्ते के लिए दमकल के पास बाइक फायर टेंडर हैं, लेकिन बड़ी आग में यह कारगर नहीं है। ऐसे हालात में कई बार दमकल को वाहन दूर खड़ाकर होजरील खींचकर ले जाना पड़ता है। इससे समय लगता है।
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