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यूपी: फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, बीमा पर बिना ब्याज लोन दिलाने के नाम पर ठगने वाले 30 गिरफ्तार

Sun, 25 Jul 2021 11:11 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 25 Jul 2021 11:11 PM IST
सार

सीओ साइबर अपराध अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि मॉडल टाउन में रहने वाले सागर से पॉलिसी केनाम पर 56 हजार रुपये की ठगी हुई थी। साइबर सेल इसकी जांच कर रही थी। शुक्रवार को भोपुरा निवासी एक जालसाज चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर पुलिस ने पूछताछ की तो उसने गैंग का राजफास किया। 

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Fake call center busted, 30 arrested for cheating in name of getting loan without interest on insurance
फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बड़ी बीमा कंपनियों की पॉलिसी पर बिना ब्याज के लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले 30 लोगों को गाजियाबाद साइबर सेल की टीम ने शनिवार रात गिरफ्तार किया। यह गिरोह नोएडा सेक्टर-16 के औद्योगिक भवन में फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। वहीं से सभी आरोपी पकड़े गए हैं। 
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आरोपी कॉल सेंटर के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे। मास्टरमाइंड और गिरोह का एक महिला कंपनियों से डाटा जुटाते थे। नगर कोतवाली में 56 हजार रुपये की ठगी का एक मामला आने पर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपी फरार हैं। जिन्हें दबोचने के लिए पुलिस दबिश दे रही है। मुंबई से भी इस गिरोह का कनेक्शन सामने आया है।
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सीओ साइबर अपराध अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि मॉडल टाउन में रहने वाले सागर से पॉलिसी केनाम पर 56 हजार रुपये की ठगी हुई थी। साइबर सेल इसकी जांच कर रही थी। शुक्रवार को भोपुरा निवासी एक जालसाज चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर पुलिस ने पूछताछ की तो उसने गैंग का राजफास किया। 
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चंद्रशेखर से मिली सूचना पर पुलिस टीम नोएडा सेक्टर-16 औद्योगिक भवन स्थित कॉल सेंटर पहुंची। वहां से 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह जनवरी 2021 से लोगों को चूना लगा रहा है। इससे पहले यहां काम करने वाले कुछ लोगों को निकाला जा चुका है। गिरोह और कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड दीपक समेत पांच आरोपी भाग गए हुए हैं।

गिरोह में 16 पुरुष और 14 महिलाएं

सीओ ने बताया कि पुलिस टीम ने आरोपी 16 पुरुष और 14 महिलाओं को पकड़ा है। उन्होंने अपने नाम चंद्रशेखर, भुवन सिंह, रंजन कुमार, राहुल कुमार, मनोज निवासी गाजियाबाद, दीपक कुमार निवासी फरीदाबाद, पारस तोमर, हेमंत सिरोही निवासी बुलंदशहर, विकास कुमार, अविनाश, अनूप कुमार निवासी दिल्ली, राकेश निवासी नोएडा, चंदन कुमार झा, विवेक चौधरी निवासी बिहार, जगवीर सिंह सोनीपत, मोहम्मद उवेश खान निवासी बरेली के अलावा 14 युवतियां और महिलाएं हैं। आरोपियों से 19 मोबाइल, 14 टेलीफोन, 1160 डाटा पेपर, एक पासबुक, 22 चेक डाटा समेत और एक कार बरामद की है।

दूसरे कॉल सेंटर की तलाश
गिरोह के मास्टरमाइंड का दूसरा कॉल सेंटर भी है। पुलिस ने बताया कि वह कॉल सेंटर गाजियाबाद या आसपास के शहर में चल रहा है। पकड़े गए आरोपियों को उसकी जानकारी नहीं है। दीपक किसी महिला केसहयोग से यह कॉल सेंटर चलाता है। कई साल से लोगों केसाथ ठगी की जा रही है। पुलिस अब दूसरे कॉल सेंटर के बारे में जानकारी कर रही है।

46 हजार पॉलिसीधारकों का डाटाह गिरोह के पास
चंद्रशेखर ने बताया कि कॉल सेंटर का अधिकतर काम वही देखता था। दीपक तो कभी-कभी आता था। उसके बताया कि कॉल सेंटर को दीपक और एक महिला ने 46 हजार 400 लोगों का डाटा उपलब्ध कराया है। जिस पर कॉल सेंटर में तैनात कर्मचारी कॉल करके ठगी करते थे।

इस तरह से देते थे घटना को अंजाम
पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को बताया कि फरार साथियों के साथ मिलकर फर्जी आईडी पर सिम व बैंक अकाउंट खुलवाकर पॉलिसी धारकों को अपना नाम बदलकर कॉल करते थे। अपने फर्जी अकाउंट में पॉलिसी मैच्योर व पॉलिसी पर लोन कराने के नाम पर फर्जी बैंक खातों में पैसा डलवाकर ठगी करते थे।

उसके बाद ठगी के पैसे को आपस में बांट लेते थे। साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि अब तक कितने लोगों को ठगा, कितने करोड़ रुपये की ठगी की है, उसका पता मुख्य आरोपी दीपक के पकड़े जाने पर पता चलेगा। एनसीआर समेत कई जिलों के लोगों के साथ ठगी कर चुके हैं।

मुंबई से बताया जा रहा कनेक्शन
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का मुंबई से भी कनेक्शन है। पकड़े गए एक आरोपी राहुल कुमार की तलाश में मुंबई पुलिस भी गाजियाबाद आई हुई है। उससे पहले गाजियाबाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद मुंबई पुलिस आरोपी से पूछताछ करके लौट गई। पुलिस का कहना है कि राहुल बीमा कंपनियों से डाटा चोरी करता था।

10वीं से बीएससी तक पढ़े हैं सभी आरोपी
पुलिस ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपियों की उम्र 19 से 36 वर्ष के बीच है। जबकि 10वीं से लेकर बीए, बीएससी और बीबीए की पढ़ाई किए हुए हैं। गिरोह में शामिल सभी आरोपियों को अलग-अलग काम था।
 
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