फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   fair in ghaziabad

राम में आस्था रखते हैं रावण के पुतले बनाने वाले मुस्लिम भाई

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 30 Sep 2019 01:12 AM IST
विज्ञापन
fair in ghaziabad
अब्दुल, सरताज के हुनर से सजती है रामलीला
विज्ञापन

साहिबाबाद। तीन पीढ़ियों से हर बार रामलीला में बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने वाले मुस्लिम परिवार का भगवान राम में बेहद आस्था है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि राम में आस्था की वजह से ही वह लोग हर बार पुतला बनाने के लिए जब भी शहर आते हैं, परिवार के छोटे बच्चों को भी लेकर आते हैं ताकि वह अच्छे और बुरे के अंतर को समझ सकें।
शहर की रामलीला में हिंदी और मुस्लिम परिवारों का यह संगम बेहद सकारात्मक संदेश देता है। कमेटी संचालकों का कहना है कि रामलीला बिना मुस्लिम भाइयों के अधूरा है। रामलीला में पुतला बनाने से लेकर आतिशबाजी करने हर साल मुस्लिम परिवार ही आते हैं। यह सिलसिला दशकों से चलता आ रहा है। दिन में कारीगर पुतले बनाते हैं तो रात में परिवार समेत बैठकर रामलीला देखते हैं। खास बात यह है कि इन मुस्लिम परिवार का प्रत्येक राम की अच्छाई और रावण की बुराई से वाकिफ हैं। पुतला बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि अच्छा और बुरे के बीच का अंतर समझाने के लिए वह लोग परिवार के बच्चों को लेकर रामलीला जरूर आते हैं। गाजियाबाद ही नहीं दिल्ली व पानीपत आदि शहरों में यह लोग पुतले बनाते आ रहे हैं। आम दिनों में खेती करने वाले यह मुस्लिम परिवार रामलीला के दौरान पुतले का निर्माण ही करता है।
विज्ञापन

मैं पिछले 20 साल से फर्रुखनगर से परिवार के पुतले बनाता आ रहा हूं। मेरे परिवार में पहले बाबा और फिर ताऊ पुतला बनाते थे। मैं अपने ताऊ के साथ रामलीला जाया करता था। वहीं मैंने पुतला बनाने का काम भी सीखा और रामलीला भी देखी। राम जी और रामलीला से इतना लगाव हुआ कि मैंने भी पुतला बनाना शुरू कर दिया। अन्य दिनों में मैं खेती करता हूं और इस दौरान पुतला बनाता हूं। - सरताज आतिश वाला
विज्ञापन
विज्ञापन

रामलीला में पुतला बनाना और आतिशबाजी करने के पीछे कमाई कम और रामलीला में परंपरागत आस्था बड़ा उद्देश्य है। इस काम के जरिए ही हम लोग भगवान राम से जुड़ाव महसूस करते हैं। हर साल अपने बच्चों को यहां लेकर आते हैं ताकि वह यहां आकर सीखें और खुद को समाज से अलग न समझे। - अब्दुल कलाम
हमारी टीम में हिंदू-मुस्लिम सभी हैं। हम सब मिलकर काम करते हैं कभी एक दूसरे से खुद को अलग नहीं समझा। यह बात अलग है कि हिंदू भाई मूर्ति की पूजा करते हैं आर हम नहीं करते। कोई भी धर्म और कहानी केवल अच्छाई और बुराई के बीच के फर्क को ही समझाती है। यह हमारी आस्था ही है कि दिन भर काम करने के बावजूद हर रात हम लोग मंचन देखते हैं। -शाकिर
ामलीला सभी लोगों के आपसी सहयोग से ही सफल होता है। हिंदू भाई अगर इसे आयोजित करते हैं तो मुस्लिम भाई अपनी कारीगरी के जरिए इसे सफल और रोमांचक बनाने में अपना योगदान करते हैं। रामलीला में मंचन के बाद पुतला दहन और आतिशबाजी ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और यह सब मुस्लिम भाइयों के सहयोग के बिना अधूरा है। -मोनी

महंगा हुआ पुतला बनाना
पुतला बनाने वाले सरताज का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में रामलीला समितियां जहां लगातार पुतले की लंबाई बढ़ा रही हैं, वहीं पुतला बनाना भी उतना ही महंगा होता जा रहा है। पेपर और बांस की महंगाई ने पुतलों की कीमत लाखों में कर दी है। सरताज का कहना है कि अमूमन यदि 70 फिट रावण बनाना है तो इसकी लागत भी करीब 70 हजार के करीब ही होती है। इस बार रामलीला में रावण की लंबाई 70 फिट, कुंभकर्ण की लंबाई 65 और मेघनाथ की लंबाई 60 फिट रखी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed