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बढ़ा टैक्स दायरा: गाजियाबाद समेत तीन जिलों में 42 हजार नए आईटीआर फाइलर जुड़े
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गाजियाबाद। गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक वर्ष में करीब 42 हजार नए करदाता आईटीआर फाइलिंग प्रक्रिया से जुड़े हैं। इसके साथ ही गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में आईटीआर दाखिल करने वालों की कुल संख्या बढ़कर 22.17 लाख हो गई है। इनमें अकेले गाजियाबाद में ही 19 लाख से अधिक लोग नियमित रूप से आईटीआर दाखिल कर रहे हैं।
आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन फाइलिंग की आसान प्रक्रिया और बैंकिंग सेवाओं में आईटीआर की बढ़ती अनिवार्यता के कारण लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
आयकर मामलों के जानकार सीए डीके गोयल का कहना है कि पहले लोग केवल टैक्स कटने की स्थिति में ही रिटर्न दाखिल करते थे। अब नौकरीपेशा, छोटे कारोबारी, स्टार्टअप संचालक और फ्रीलांसर भी नियमित रूप से आईटीआर भर रहे हैं। सरकारी योजनाओं, लोन और वित्तीय लेनदेन में आय का प्रमाण देने के लिए आईटीआर अहम दस्तावेज बन चुका है।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट विपिन शर्मा ने बताया कि युवाओं में वित्तीय जागरूकता बढ़ी है। ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप के जरिये घर बैठे रिटर्न दाखिल होने से प्रक्रिया आसान हुई है। आयकर विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
कारोबारियों और नौकरीपेशा वर्ग में बढ़ा रुझान
जिले में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के बीच देखने को मिली है। जीएसटी, डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ट्रांजेक्शन बढ़ने से आय का रिकॉर्ड स्वतः तैयार हो रहा है। ऐसे में लोग भविष्य की वित्तीय जरूरतों को देखते हुए नियमित आईटीआर भरना सुरक्षित मान रहे हैं।
बैंकिंग और निवेश में जरूरी हुआ आईटीआर
सीए मनीष अग्रवाल का कहना है कि होम लोन, वाहन लोन और बिजनेस लोन लेने में पिछले दो से तीन वर्षों का आईटीआर मांगा जाता है। इसके अलावा बड़ी संपत्ति खरीद, विदेश यात्रा और टेंडर प्रक्रिया में भी आईटीआर अहम दस्तावेज बन चुका है।
आईटीआर दाखिल करने के बड़े फायदे
- बैंक आय का प्रमाण मानकर जल्दी लोन स्वीकृत करते हैं।
- कई देशों के वीजा आवेदन में आईटीआर जरूरी दस्तावेज माना जाता है।
-नौकरी, कारोबार और निवेश की आय का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होता है।
- अतिरिक्त टैक्स कटने पर रिफंड आसानी से मिल जाता है।
- संपत्ति खरीद और बड़े निवेश में आईटीआर भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता है।
- क्रेडिट स्कोर और बैंकिंग प्रोफाइल मजबूत होती है।
2024-25 में 21.75 लाख थी संख्या
वरिष्ठ आयकर अधिकारी सुषमा सिंघल ने बताया कि वर्ष 2024-25 में गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में आईटीआर दाखिल करने वालों की संख्या 21.75 लाख थी, जो 2025-26 में बढ़कर 22.17 लाख पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते चलन से हर आय का रिकॉर्ड सिस्टम में आने लगा है। ऐसे में नियमित आईटीआर दाखिल करना अब केवल टैक्स प्रक्रिया नहीं, बल्कि वित्तीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
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आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन फाइलिंग की आसान प्रक्रिया और बैंकिंग सेवाओं में आईटीआर की बढ़ती अनिवार्यता के कारण लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
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आयकर मामलों के जानकार सीए डीके गोयल का कहना है कि पहले लोग केवल टैक्स कटने की स्थिति में ही रिटर्न दाखिल करते थे। अब नौकरीपेशा, छोटे कारोबारी, स्टार्टअप संचालक और फ्रीलांसर भी नियमित रूप से आईटीआर भर रहे हैं। सरकारी योजनाओं, लोन और वित्तीय लेनदेन में आय का प्रमाण देने के लिए आईटीआर अहम दस्तावेज बन चुका है।
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चार्टर्ड अकाउंटेंट विपिन शर्मा ने बताया कि युवाओं में वित्तीय जागरूकता बढ़ी है। ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप के जरिये घर बैठे रिटर्न दाखिल होने से प्रक्रिया आसान हुई है। आयकर विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
कारोबारियों और नौकरीपेशा वर्ग में बढ़ा रुझान
जिले में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी नौकरीपेशा और छोटे कारोबारियों के बीच देखने को मिली है। जीएसटी, डिजिटल पेमेंट और बैंकिंग ट्रांजेक्शन बढ़ने से आय का रिकॉर्ड स्वतः तैयार हो रहा है। ऐसे में लोग भविष्य की वित्तीय जरूरतों को देखते हुए नियमित आईटीआर भरना सुरक्षित मान रहे हैं।
बैंकिंग और निवेश में जरूरी हुआ आईटीआर
सीए मनीष अग्रवाल का कहना है कि होम लोन, वाहन लोन और बिजनेस लोन लेने में पिछले दो से तीन वर्षों का आईटीआर मांगा जाता है। इसके अलावा बड़ी संपत्ति खरीद, विदेश यात्रा और टेंडर प्रक्रिया में भी आईटीआर अहम दस्तावेज बन चुका है।
आईटीआर दाखिल करने के बड़े फायदे
- बैंक आय का प्रमाण मानकर जल्दी लोन स्वीकृत करते हैं।
- कई देशों के वीजा आवेदन में आईटीआर जरूरी दस्तावेज माना जाता है।
-नौकरी, कारोबार और निवेश की आय का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होता है।
- अतिरिक्त टैक्स कटने पर रिफंड आसानी से मिल जाता है।
- संपत्ति खरीद और बड़े निवेश में आईटीआर भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता है।
- क्रेडिट स्कोर और बैंकिंग प्रोफाइल मजबूत होती है।
2024-25 में 21.75 लाख थी संख्या
वरिष्ठ आयकर अधिकारी सुषमा सिंघल ने बताया कि वर्ष 2024-25 में गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में आईटीआर दाखिल करने वालों की संख्या 21.75 लाख थी, जो 2025-26 में बढ़कर 22.17 लाख पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते चलन से हर आय का रिकॉर्ड सिस्टम में आने लगा है। ऐसे में नियमित आईटीआर दाखिल करना अब केवल टैक्स प्रक्रिया नहीं, बल्कि वित्तीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।