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फीस नहीं मिलने और सही से काम नहीं करने का आरोप लगाकर स्कूल ने स्टाफ को निकाला
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फीस नहीं मिलने और सही से काम नहीं करने का आरोप लगाकर स्कूल ने स्टाफ को निकाला - डीपीएस इंदिरापुरम की तरफ से तीस से अधिक स्टाफ को स्कूल प्रबंधन ने स्कूल से निकालने का नोटिस जारी किया - जुलाई के पहले सप्ताह में काम छोड़ने की बात स्कूल प्रबंधन की तरफ से की गई
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माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लग रही है। लॉकडाउन में स्कूलों द्वारा जहां लगातार अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं स्कूलों ने अपने स्टाफ को निकालना शुरू कर दिया है। इंदिरापुरम के डीपीएस स्कूल ने भी तीस से अधिक कर्मचारियों को काम से निकालने की तैयारी कर ली है। स्कूल प्रबंधन की तरफ से स्टाफ को निकाले जाने का नोटिस जारी कर दिया है। जिसके बाद से स्कूल स्टाफ में हड़कंप का महौल है। स्टाफ को समझ नहीं आ रहा कि वह करें तो क्या करें। स्कूल से निकाले जा रहे एक शिक्षक ने बताया कि स्कूल प्रबंधन की तरफ से उनके साथ कई टीचरों को नोटिस मिला है। मेल के जरिए यह नोटिस दिया गया है। जिसमें जुलाई के पहले सप्ताह में काम छोड़ने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि करीब तीस से अधिक टीचर व अन्य स्टाफ को यह नोटिस दिया गया है। यह सभी कर्मचारी को स्कूल में काम करते हुए आठ से दस साल हो चुके हैं। इस परिस्थिति में स्कूल से निकलने पर उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं रहा है। वह अपना घर कैसे चलाएंगे। उनका कहना है कि लॉकडाउन में जहां सरकार लोगों की मदद कर रही है वहीं स्कूल मैनेजमेंट गलत आरोप लगाकर टीचर को निकाल रहे हैं।
वहीं इस पर डीपीएस स्कूल के मीडिया प्रभारी अनिकेत ने बताया कि अभिभावकों द्वारा समय से फीस ना मिलना और कुछ टीचरों द्वारा बच्चों को सही ऑनलाइन क्लास ना देना प्रमुख कारण रहा है। कुछ अभिभावकों की शिकायत के बाद उन टीचर्स को समझाया गया कि वो प्रतिदिन क्लास अवश्य लें लेकिन वो उन्होंने सही तरीके से कार्य नही किया। ऐसे में स्कूल को उन टीचरों की आवश्यकता नही थी। स्कूल प्रबंधन को मजबूरी में उन्हें निष्काशित करना पड़ा। स्कूल के मीडिया प्रभारी ने बताया कि समय पर फीस ना आने से हमारे पास केवल उन टीचरों को रखने के अलावा कोई विकल्प नही है जो अपने काम के प्रति समर्पित हैं। जिन लोगों को छोडऩे के लिए कहा गया उन्हें 3 महीने का अग्रिम वेतन दिया गया है। इसके अलावा उन्हें सभी वैधानिक देय जैसे ग्रेच्युटी आदि भी दिया जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर शेयर की अपनी व्यथा
बता दें जैसे ही टीचर्स को निकाले जाने की खबर अभिभावकों और विद्यार्थियों तक पहुंची तो तरह तरह के मैसेज सोशल साइट पर उमडऩे लगे। इसमें बच्चों ने टीचर्स के नामों के साथ भी पोस्ट किया। इसके साथ ही कुछ टीचरों ने सोशल मीडिया के जरिए मदद की गुहार लगाई है। अंकुश बिश्नोई ---------------------------------------------
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