{"_id":"58e5072c4f1c1b82575b46fb","slug":"dustbin-of-scandal-disappeared","type":"story","status":"publish","title_hn":"गायब हो गए ‘घोटाले’ के डस्टबिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गायब हो गए ‘घोटाले’ के डस्टबिन
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 05 Apr 2017 10:35 PM IST
विज्ञापन
कूड़ेदान
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजियाबाद। कीमत को लेकर विवादों में रहे नगर निगम के डस्टबिन अब शहर की सड़कों पर नहीं दिखते। वर्ष 2016 में नगर निगम ने शहर भर में करीब 2200 से ज्यादा डस्टबिन लगाने का दावा किया था। अब 50 फीसदी से ज्यादा डस्टबिन उखड़ चुके हैं।
विज्ञापन
प्लास्टिक के यह डस्टबिन कहीं कूड़े के साथ लोगों ने जला दिए हैं तो कहीं चोरी हो गए हैं। पहले ज्यादा कीमत पर डस्टबिन खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया और अब डस्टबिन चोरी होने से यह पैसा बर्बाद हो गया।
विज्ञापन
जस्सीपुरा मोड़, कैला भट्टा समेत कई जगहों पर डस्टबिन फिक्स करने की बजाय सड़कों पर ऊपर ही खड़े कर दिए गए थे। जबकि डस्टबिन को सीमेंट का बेस बनाकर फिक्स किया जाना था। नगर निगम ने डस्टबिन का सत्यापन पार्षदों से भी नहीं कराया।
विज्ञापन
संभव है कि खरीदे गए सभी डस्टबिन शहर में लगाए ही न गए हो। अब नेहरू नगर, जस्सीपुरा, कैला भट्ठा, मालीवाड़ा, राकेश मार्ग, लोहिया नगर समेत अधिकांश क्षेत्रों से यह डस्टबिन गायब हो चुके हैं।
घोटाला माना, कार्रवाई किसी पर नहीं हुई
नगर निगम ने प्लास्टिक के एक डस्टबिन की कीमत करीब 9 हजार रुपये तय की थी। जबकि मार्केट में इसकी कीमत 3200 से 3500 रुपये थी। घोटाले का मामला उजागर हुआ तो निगम अधिकारियों ने यह माना कि कीमत ज्यादा थी और बाद में कीमत घटाई भी गई।
निगम अफसरों के मुताबिक बाद में प्रति डस्टबिन करीब 4800 रुपये का भुगतान किया गया। डस्टबिन खरीद में घोटाला स्वीकार करने के बावजूद एक साल बाद भी किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई कि उन्होंने 9 हजार रुपये में डस्टबिन खरीद के लिए वर्कआर्डर जारी क्यों किया।
पार्षद बोले
मेरे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने कितने डस्टबिन लगाए थे, इसका सत्यापन भी नहीं कराया गया और भुगतान कर दिया गया। पांच-छह डस्टबिन मैंने सड़कों पर लगे देखे थे, लेकिन अब वह गायब हैं। कूड़ा सड़कों पर पड़ा रहता है। - जाकिर सैफी, पार्षद
निगम में सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। डस्टबिन लगाने के बाद उनकी निगरानी की जिम्मेदारी भी निगम के स्वास्थ्य विभाग के अफसरों या कर्मचारियों की थी। अगर डस्टबिन गायब हो रहे हैं तो उनकी जवाबदेही होनी चाहिए। यह जनता का पैसा है, अफसरों का नहीं जो बर्बाद किया जा रहा है। - राजेंद्र त्यागी, भाजपा पार्षद
डस्टबिन चोरी होने की शिकायत मिली है। थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। मानीटरिंग भी बढ़ा दी गई है। - डा. आरके यादव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
डस्टबिन गायब होने की शिकायत मिल रही है। बृहस्पतिवार को निगम अधिकारियों से वार्ता कर जवाब मांगा जाएगा। जनता के पैसों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। - अशु वर्मा, महापौर