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डोरिस फ्रांसिस...एक अच्छी मां, सच्ची सिपाही
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:11 PM IST
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डोरिस फ्रांसिस
- फोटो : अमर उजाला
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ये डोरिस फ्रांसिस हैं। हाथ में छोटा सा डंडा, होठों में सीटी और सिर पर कैप पहने किसी कुशल ट्रैफिक पुलिसकर्मी की भांति यातायात संचालित करतीं रोजाना खोड़ा पुश्ता पर नजर आती हैं। एनएच-24 के रास्ते दिल्ली नोएडा जाने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए यह एक जाना माना चेहरा हैं।
ट्रैफिक संभालते-संभालते वह कब कैंसर की शिकार हो गईं, इन्हें पता ही नहीं चला। आजकल ये अस्पताल के बिस्तर पर हैं। जानलेवा बीमारी से जूझ रहीं डोरिस के होठों पर आज भी आशा भरी मुस्कान है।डोरिस की जिंदगी में सब कुछ बिलकुल सामान्य था। डोरिस अपने पति विक्टर और दो बेटियों व एक बेटे के साथ अपनी छोटी सी गृहस्थी में खुश थीं।
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फिर आया वर्ष 2008 में 9 नवंबर का वह दिन, जिसने डोरिस की जिंदगी को कभी न भरने वाला जख्म दिया। खोड़ा पुश्ता पर पति विक्टर और बेटी निक्की के साथ ऑटो से घर लौटते वक्त एक कार ने टक्कर मार दी। डोरिस और विक्टर की जान तो बच गई लेकिन बेटी निक्की की मौत हो गई।
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तभी डोरिस ने ठान लिया कि वह किसी और निक्की की खोड़ा पुश्ता पर सड़क हादसे में मौत नहीं होने देंगी। सिर पर कैप लगा कर और हाथ में डंडा लेकर खोड़ा पुश्ता पर डट गईं। सुबह सात से 11 बजे तक पीक ऑवर्स में बेतरतीब यातायात को सुव्यवस्थित करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाया।
पहले पहल तो वाहन चालकों का विरोध झेला लेकिन वक्त के साथ लोग उनके डंडे के इशारे पर चलने और थमने लगे। बाद में यातायात पुलिस ने भी उनके जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें सहयोग दिया। उनकी मेहनत कितनी सफल रही यह बताने कि लिए यही काफी है कि पिछले आठ साल में खोड़ा पुश्ता पर कोई सड़क हादसा नहीं हुआ।
किसी ने अपने जिगर के टुकड़े को नहीं खोया।करीब तीन महीने पहले डोरिस को यूट्रस कैंसर होने का पता चला। उनके पति विक्टर फ्रांसिस ने बताया कि इस वर्ष दिवाली के बाद से डोरिस की तबीयत खराब रहने लगी थी लेकिन वे यातायात संभालने रोज खोड़ा पुश्ता पर जा रहीं थीं लेकिन 20 नवंबर को तबीयत अचानक बिगड़ गई,
जिस पर उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया, जहां उनका ऑपरेशन हुआ लेकिन इलाज में आ रहा खर्च परिवार की तंगहाली पर रोज-दर-रोज चोट करने लगा। बेटे और बेटी को अपनी बाइक तक बेचनी पड़ी लेकिन जब डोरिस को कैंसर होने और तंगहाली के चलते इलाज नहीं करा पाने की बात फैली तो मदद के लिए हाथ उठने लगे।
स्थानीय लोगों के साथ ही प्रधानमंत्री और दिल्ली पुलिस की ओर से आर्थिक सहायता दी गई। गाजियाबाद की फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर एसोसिएशन ने उन्हें एम्स से रेफर करा कर वैशाली सेक्टर-1 स्थित मैक्स सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी होगी, जिसमें करीब 10 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
अस्पताल की ओर से डोरिस का इलाज निशुल्क किया जा रहा है।डोरिस के मददगारों की संख्या बढ़ रही है। सब यही चाहते हैं कि डोरिस फ्रांसिस जल्द स्वस्थ होकर हाथ में डंडा लिए खोड़ा पुश्ता पर सीटी बजाती यातायात को संभालती नजर आएंगी।