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Ghaziabad News: ई-पंजीकरण के विरोध में जिलेभर में हड़ताल और धरना, अधिवक्ता-बैनामा लेखक लामबंद
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गाजियाबाद/मोदीनगर/लोनी। बैनामों की ई-पंजीकरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में जिलेभर में अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन तेज हो गया है। गाजियाबाद, मोदीनगर और लोनी में बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन धरना और हड़ताल शुरू कर दी गई। आंदोलनकारियों ने सरकार से नई व्यवस्था वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के चलते पंजीकरण कार्य प्रभावित रहा।
तहसील बार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि चार जून को जारी शासनादेश के तहत ई-पंजीकरण का कार्य निजी संस्था से कराने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इससे पंजीकरण प्रक्रिया जटिल होगी और अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं समेत हजारों लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
हालांकि, एसआईजी स्टांप एसबी चंद्रा ने स्पष्ट किया कि शासन का आदेश केवल प्राधिकरण, आवास विकास और यूपीसीडा की संपत्तियों के प्रथम बैनामों से संबंधित है। अन्य संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है।
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मोदीनगर में दस्तावेज लेखक संघ की स्थानीय इकाई ने उप निबंधक कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने पर पंजीकरण संबंधी कार्य निजी कंपनी के नियंत्रण में चला जाएगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में पक्षकारों की उपस्थिति संबंधित संस्था के कार्यालय में अनिवार्य होगी और पूरी प्रक्रिया निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित होगी।
उधर, लोनी तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने भी रामपार्क कॉलोनी में धरना शुरू कर दिया। एसोसिएशन के सचिव विजय आनंद ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं के हितों के अनुकूल नहीं है। इससे आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक और प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किए जाने की स्थिति में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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तहसील बार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि चार जून को जारी शासनादेश के तहत ई-पंजीकरण का कार्य निजी संस्था से कराने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इससे पंजीकरण प्रक्रिया जटिल होगी और अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं समेत हजारों लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
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हालांकि, एसआईजी स्टांप एसबी चंद्रा ने स्पष्ट किया कि शासन का आदेश केवल प्राधिकरण, आवास विकास और यूपीसीडा की संपत्तियों के प्रथम बैनामों से संबंधित है। अन्य संपत्तियों की पंजीकरण प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर किया जा रहा है।
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मोदीनगर में दस्तावेज लेखक संघ की स्थानीय इकाई ने उप निबंधक कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने पर पंजीकरण संबंधी कार्य निजी कंपनी के नियंत्रण में चला जाएगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में पक्षकारों की उपस्थिति संबंधित संस्था के कार्यालय में अनिवार्य होगी और पूरी प्रक्रिया निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित होगी।
उधर, लोनी तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने भी रामपार्क कॉलोनी में धरना शुरू कर दिया। एसोसिएशन के सचिव विजय आनंद ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं के हितों के अनुकूल नहीं है। इससे आम लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक और प्रक्रियागत कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किए जाने की स्थिति में आंदोलन और तेज किया जाएगा।