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Ghaziabad News: सरकारी चिकित्सकों के प्राइवेट इलाज करने पर होगी विभागीय कार्रवाई
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के प्राइवेट इलाज पर रोक लगाने के लिए सीएमओ ने पत्र जारी कर सख्त निर्देश दिया है। उन्होंने पत्र में जिले के सभी जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत चिकित्सकों से हलफनामा मांगा है, जिसमें कहा है कि अगर कोई भी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस यानी किसी भी निजी अस्पताल में इलाज करते हुए पाए गए तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि अभी तक किसी भी डॉक्टर के प्राइवेट प्रैक्टिस की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सभी को चेतावनी जारी की गई है। सीएमओ ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सेवाएं देने वाला कोई भी डॉक्टर किसी भी निजी अस्पताल में मरीज की जांच, इलाज और ऑपरेशन नहीं करेंगे। इसके बारे में सभी चिकित्सकों को पत्र जारी कर बताया जा चुका है। शासन का निर्देश आने पर सीएमओ ने रविवार देर रात पत्र जारी कर सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को निर्देश दिया।
मरीजों को ही प्राइवेट में रेफर करा देते हैं कर्मचारी
सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारी मरीजों को ही निजी अस्पतालों में रेफर करा देते हैं। हाल ही में जिला महिला अस्पताल में पैदा हुए बच्चे को अस्पताल की महिला कर्मचारी ने एसएनसीयू में भर्ती कराने के नाम पर निजी अस्पताल में रेफर करा दिया था। इलाज के दौरान शिशु की मौत हो गई थी। इस मामले की सीएमओ कार्यालय में जांच भी चल रही है जबकि महिला अस्पताल में दस बेड पर शिशुओं को भर्ती करने की सुविधा है।
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सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि अभी तक किसी भी डॉक्टर के प्राइवेट प्रैक्टिस की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सभी को चेतावनी जारी की गई है। सीएमओ ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सेवाएं देने वाला कोई भी डॉक्टर किसी भी निजी अस्पताल में मरीज की जांच, इलाज और ऑपरेशन नहीं करेंगे। इसके बारे में सभी चिकित्सकों को पत्र जारी कर बताया जा चुका है। शासन का निर्देश आने पर सीएमओ ने रविवार देर रात पत्र जारी कर सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को निर्देश दिया।
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मरीजों को ही प्राइवेट में रेफर करा देते हैं कर्मचारी
सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारी मरीजों को ही निजी अस्पतालों में रेफर करा देते हैं। हाल ही में जिला महिला अस्पताल में पैदा हुए बच्चे को अस्पताल की महिला कर्मचारी ने एसएनसीयू में भर्ती कराने के नाम पर निजी अस्पताल में रेफर करा दिया था। इलाज के दौरान शिशु की मौत हो गई थी। इस मामले की सीएमओ कार्यालय में जांच भी चल रही है जबकि महिला अस्पताल में दस बेड पर शिशुओं को भर्ती करने की सुविधा है।
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