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Ghaziabad News: फ्लैट पर करोड़ों खर्च किए और सुरक्षा राम भरोसे
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साहिबाबाद। करोड़ों के फ्लैट में आग से सुरक्षा के इंतजाम राम भरोसे है, यह एक बार फिर से साबित हो गया। सात दिन के अंतराल में यह दूसरा मामला है जब आग की लपटों ने आवासीय आलीशान फ्लैटों को अपनी चपेट में लिया है। बीते सप्ताह बुधवार को जहां ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में आग लगी तो मंगलवार को एक बिल्डर फ्लोर में आग ने सुरक्षा के इंतजामों की पोल खोल दी। दोनों ही जगह में कमोवेश स्थिति एक जैसी ही रही ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में भले फायर फाइटिंग सिस्टम थे लेकिन कई उपकरण चल नहीं पाए और ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। वहीं, बिल्डर फ्लोर में तो आग से सुरक्षा का कोई इंतजाम ही नहीं था। वहां आग के दौरान निकास तक नहीं था।
नीतीखंड दो के लेन नंबर-15 में करीब 35 से 38 प्लॉट हैं। यहां करीब 100 परिवार रह रहे हैं। बिल्डरों ने फ्लैट बनाए और बेचकर चले गए। यहां फ्लैट खरीदारों ने खूबसूरती तो देखी लेकिन सुरक्षा इंतजामों की खैर खबर नहीं ली। मंगलवार को प्लॉट नंबर 495 के भूतल पर सिलिंडर फटने से आग फैली, गनीमत रही कि आग लगने के 10 मिनट बाद ही दमकल टीम मौके पर पहुंच गई। गौर ग्रीन एवेन्यू की तरह यदि देर हो गई होती तो भारी तबाही हो सकती है।
दरअसल, जिस प्लॉट में आग लगी उसमें फंसे लोगों को बाहर निकलने के लिए कोई इमरजेंसी गेट तक नहीं था। आग बुझाने का भी कोई इंतजाम नहीं पाया। तीसरी मंजिल पर नौ लोग फंसे थे, बालकनी ईंट की दीवार और जाल से कवर कर रखी थी। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले पड़ोसियों ने लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन दीवार तोड़ने के लिए हथौड़ा तक नहीं मिला। गनीमत रही कि बिना समय गंवाए दमकल टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू किया। जिला मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल का कहना है कि बिल्डर फ्लोर में फायर एनओसी का कोई नियम नहीं है, ऐसे में इन इमारतों का कोई सर्वे नहीं कराया जाता।
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आरडब्ल्यूए बैठकों में उठता था आग से सुरक्षा इंतजाम का मुद्दा
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष मनीष आहुजा ने बताया कि बिल्डर की ओर से तो किसी भी इमारत में आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। पहले कई बार आरडब्ल्यूए की बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया लेकिन फाइनेंस मामले पर बात अटक गई और बात आगे नहीं बढ़ सकी। मंगलवार के हादसे के बाद रात करीब दस बजे आरडब्ल्यूए ने आपातकालीन बैठक बुलाई और इस मुद्दे पर चर्चा की गई। जल्द ही पूरी लेन में आग से बचाव के इंतजाम किए जाने पर सबने सहमति जताई।
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दो वर्ष पहले ही बनी थी इमारत ढाई से तीन करोड़ में बिके थे फ्लोर
लेन नंबर-15 के जिस इमारत में आग लगी, उसमें करीब दो वर्ष पूर्व से ही तीनों परिवार रह रहे हैं। तीनों परिवार ने ढाई से तीन करोड़ की कीमत में यह फ्लैट खरीदे। फ्लैट मालिकों का कहना है कि घर खरीदते समय उन्होंने बेहतर लोकेशन, सोसायटी, फ्लैट की बनावट, जगह और खूबसूरती को ध्यान में रखा। कभी इस तरह का ख्याल नहीं आया कि आग से बचाव के काेई इंतजाम है भी या नहीं। अब हादसा होने के बाद एक बड़ा सबक मिला है, सब इस बात से राहत में हैं कि हादसे में सब सही सलामत हैं।
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नीतीखंड दो के लेन नंबर-15 में करीब 35 से 38 प्लॉट हैं। यहां करीब 100 परिवार रह रहे हैं। बिल्डरों ने फ्लैट बनाए और बेचकर चले गए। यहां फ्लैट खरीदारों ने खूबसूरती तो देखी लेकिन सुरक्षा इंतजामों की खैर खबर नहीं ली। मंगलवार को प्लॉट नंबर 495 के भूतल पर सिलिंडर फटने से आग फैली, गनीमत रही कि आग लगने के 10 मिनट बाद ही दमकल टीम मौके पर पहुंच गई। गौर ग्रीन एवेन्यू की तरह यदि देर हो गई होती तो भारी तबाही हो सकती है।
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दरअसल, जिस प्लॉट में आग लगी उसमें फंसे लोगों को बाहर निकलने के लिए कोई इमरजेंसी गेट तक नहीं था। आग बुझाने का भी कोई इंतजाम नहीं पाया। तीसरी मंजिल पर नौ लोग फंसे थे, बालकनी ईंट की दीवार और जाल से कवर कर रखी थी। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले पड़ोसियों ने लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन दीवार तोड़ने के लिए हथौड़ा तक नहीं मिला। गनीमत रही कि बिना समय गंवाए दमकल टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू किया। जिला मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल का कहना है कि बिल्डर फ्लोर में फायर एनओसी का कोई नियम नहीं है, ऐसे में इन इमारतों का कोई सर्वे नहीं कराया जाता।
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आरडब्ल्यूए बैठकों में उठता था आग से सुरक्षा इंतजाम का मुद्दा
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष मनीष आहुजा ने बताया कि बिल्डर की ओर से तो किसी भी इमारत में आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। पहले कई बार आरडब्ल्यूए की बैठक में इस मुद्दे पर विचार किया गया लेकिन फाइनेंस मामले पर बात अटक गई और बात आगे नहीं बढ़ सकी। मंगलवार के हादसे के बाद रात करीब दस बजे आरडब्ल्यूए ने आपातकालीन बैठक बुलाई और इस मुद्दे पर चर्चा की गई। जल्द ही पूरी लेन में आग से बचाव के इंतजाम किए जाने पर सबने सहमति जताई।
दो वर्ष पहले ही बनी थी इमारत ढाई से तीन करोड़ में बिके थे फ्लोर
लेन नंबर-15 के जिस इमारत में आग लगी, उसमें करीब दो वर्ष पूर्व से ही तीनों परिवार रह रहे हैं। तीनों परिवार ने ढाई से तीन करोड़ की कीमत में यह फ्लैट खरीदे। फ्लैट मालिकों का कहना है कि घर खरीदते समय उन्होंने बेहतर लोकेशन, सोसायटी, फ्लैट की बनावट, जगह और खूबसूरती को ध्यान में रखा। कभी इस तरह का ख्याल नहीं आया कि आग से बचाव के काेई इंतजाम है भी या नहीं। अब हादसा होने के बाद एक बड़ा सबक मिला है, सब इस बात से राहत में हैं कि हादसे में सब सही सलामत हैं।