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एसटीएफ ने दबोचा शूटर, ली थी दो कत्ल की सुपारी
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sat, 14 Jan 2017 11:37 PM IST
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एसटीएफ
- फोटो : file photo
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डॉ.एके बंसल हत्याकांड की जांच और कातिलों की तलाश में जुटी स्पेशल टॉस्क फोर्स ने शुक्रवार रात नैनी जेल में गैंगस्टर उधम सिंह से मिलने आए गाजियाबाद के शूटर प्रवीण कुमार पाल को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से पिस्टल, कारतूस और एक बाइक जब्त की गई है।
एसटीएफ का दावा है कि जेल में बंद गैंगेस्टर उधम ने शूटर को गाजियाबाद के दो कारोबारियों के कत्ल की सुपारी देने के साथ ही मेरठ के तीन कारोबारियों से रंगदारी उगाही का भी काम सौंपा था।
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एसटीएफ इलाहाबाद यूनिट के इंस्पेक्टर अजय सिंह को डॉ.बंसल हत्याकांड में शामिल बदमाशों की तलाश के दौरान शुक्रवार शाम खबर मिली कि नैनी सेंट्रल जेल में बंद मेरठ जनपद के कुख्यात अपराधियों उधम सिंह और विकास सिंह से मिलने के बाद एक शूटर सीएमपी कॉलेज की तरफ से रेलवे स्टेशन जाने वाला है।
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एसटीएफ टीम ने सीएमपी डॉट पुल के पास घेराबंदी कर ली और करीब पौने आठ बजे सोहबतियाबाग की तरफ से बाइक पर आए संदिग्ध बदमाश को दबोच लिया। बाइक कब्जे में लेकर बदमाश की तलाशी ली गई तो प्वाइंट 32 बोर का एक पिस्टल और तीन कारतूस भी बरामद हुए। उसके पास डीएल और मोबाइल फोन भी था।
बदमाश को जार्जटाउन थाने ले जाकर पूछताछ की गई।उसने अपना नाम प्रवीण कुमार पाल और हाल पता संजय नगर, सेक्टर 23 गाजियाबाद बताया है। वह मूल रूप से मेरठ के पिलौना गांव का रहने वाला है। प्रवीण नैनी जेल में बंद अपराधी उधम सिंह के लिए काम करता है। वह जेल में कई बार उधम सिंह से मिलने आ चुका है।
उसके इशारे पर वह मेरठ, गाजियाबाद समेत कई जिलों में व्यापारियों से रंगदारी उगाही करता है। वह शुक्रवार को अरविंद चौधरी समेत दो लोगों के साथ जेल में उधम और विकास से मिला।
उधम ने एक पर्ची में लिखकर दिया कि उसे मेरठ में कंकड़खेड़ा में प्रापर्टी डीलर श्रवण राणा से 20 लाख रुपये, मार्बल कारोबारी भूप यादव से भी 20 लाख रुपये रंगदारी लेनी है। मेरठ के ही निहल्लना मोहल्ले के बाबूराम मास्टर से 10 लाख रुपये और कारोबारी गिरजा मित्तल से भी रंगदारी लेनी है।
इसके अलावा गाजियाबाद जेल में बंद अपराधी प्रदीप नेगी ने इस शूटर को बस अड्डा गाजियाबाद के पास रहने वाले एक व्यक्ति के कत्ल की सुपारी दी थी, जिसकी रेकी भी कर ली गई थी। गाजियाबाद के ही एक और कारोबारी के कत्ल का ठेका प्रवीण ने लिया है।
इस बारे में गाजियाबाद पुलिस को भी अवगत कराया गया है। प्रवीण ने बताया कि जेल में बंद विकास सिंह के आदमी हनी ने उसे जौनपुर से आकर बाइक दी थी।
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रंगदारी के लिए भी बनाया है कोडवर्ड
-एसटीएफ को प्रवीण से पूछताछ में पता चला कि रंगदारी उगाही और इनकार पर गोली मारने के बारे में फोन पर बातचीत के लिए कोडवर्ड इस्तेमाल किया जाता है। मेरठ के तीन लोगों से रंगदारी मांगने में एडवोकेट, वकील और मास्टर नाम लेना था। धमकी देने का कोडवर्ड था- पार्टी से कान्फ्रेंस हो गई है अब बस फाइल देनी है ओके। रंगदारी मिलने पर कोडवर्ड होता है- हाईकोर्ट में रिट लगी है, फला पार्टी की। पैसा नहीं देने पर हमले का कोडवर्ड होता- फाइल दे दो।
जेलकर्मियों के खेल का फिर हुआ खुलासा
-जेल के भीतर होने वाली आपराधिक गतिविधियों में जेल कर्मचारियों की मिलीभगत का एक बार फिर खुलासा हुआ है। एसटीएफ के मुताबिक, शूटर प्रवीण को सिर्फ हाथ पर मुहर लगाकर दो लोगों के साथ भीतर जाने दिया गया। उसका नाम-पता रजिस्टर में नहीं दर्ज किया गया था। एसटीएफ का दावा है कि जेल के भीतर दर्जनों मोबाइल फोन के जरिए कैदी बाहर अपने गुर्गों और करीबियों से लगातार बात करते रहते हैं।