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निगम की 1500 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जा

Thu, 17 Nov 2016 10:54 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Thu, 17 Nov 2016 10:54 PM IST
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Corporation occupied land of Rs 1,500 crore
जमीन पर कब्जा हो रहा है

राजनगर एक्सटेंशन के बीच आ चुकी नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर बिल्डरों और कालोनाइजरों की निगाहें लग गई हैं। करीब 60 एकड़ से ज्यादा जमीन निगम के रिकार्ड में तो है, लेकिन मौके पर उसका कोई अता-पता नहीं है। इस जमीन की कीमत 1500 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।

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नगर आयुक्त ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर राजस्व विभाग से जमीन की ज्वाइंट पैमाइश कराने की मांग की है।निगम के संपत्ति विभाग ने मंडलायुक्त को उन खसरा नंबरों की भी लिस्ट भेजी है, जो सरकारी रिकार्ड में नगर निगम के नाम हैं। यह जमीन मिलजुमला खसरा नंबरों में है।
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घूकना, सिहानी, नूरनगर, सद्दीक नगर और बोंझा गांव की यह एलएमसी जमीन निगम के अंडर में है। एक दशक पहले जहां इन गांवों में जमीनों के दाम हजारों में थे, अब एक बीघा जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच गई है। राजनगर एक्सटेंशन के रूप में एक अलग ही शहर बन चुका है। ऐसे में अब सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से प्लाटिंग की जा रही है।
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कई बिल्डरों के प्रोजेक्ट में भी सरकारी जमीन खप चुकी है। निगम की यह जमीन अब कहां और किस हाल में हैं, यह निगम अफसरों को भी नहीं पता। ऐसे में अब नगर आयुक्त ने इस जमीन को चिह्नित कराकर कब्जा लेने की कवायद शुरू की है। निगम अधिकारी इस जमीन को चिह्नित कराकर इस पर तार फेंसिंग कराएंगे।
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मंडलायुक्त के निर्देशों पर डीएम ने बनाई कमेटी
नगर आयुक्त अब्दुल समद ने मंडलायुक्त से इन जमीनों को चिह्नित कराने की मांग की थी। उनके पत्र पर कार्रवाई कर मंडलायुक्त ने डीएम को निर्देश दिए। उनके निर्देशों पर डीएम ने एसडीएम की अध्यक्षता में राजस्व विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की टीम बना दी है। ऐसे में जल्द ही पैमाइश का काम शुरू किया जाएगा।

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अधिकारी बोले
राजस्व रिकार्ड में जमीन का ब्योरा तो है, लेकिन गांवों की सूरत बदल गई है। जमीन पैमाइश कराने में दिक्कत आ रही है। राजस्व विभाग की टीम मिलने से पैमाइश कराने में आसानी होगी। जल्द ही पैमाइश कर जमीनों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। - एमपी सिंह, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम

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