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जोनल प्रभारी के साइन कर बाबू ने जारी किए नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो गाजियाबाद
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:40 PM IST
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बाबू ने जारी किए नोटिस
- फोटो : demo pic
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नगर निगम में अधिकारियों के हस्ताक्षर का फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा। अब नगर निगम कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष व कविनगर जोन के लिपिक ने जोनल अधिकारी के हस्ताक्षर कर टैक्स निर्धारण के लिए नोटिस जारी कर दिए। इन नोटिसों पर पत्रांक संख्या भी नहीं डाला गया है। मामला तब खुला जब नोटिस लेकर प्रभावित पक्ष निगम पहुंच गया।
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फर्जीवाड़ा सामने आने पर अब अधिकारी भी मुंह छिपाते फिर रहे हैं। नगर निगम (संपत्तिकर द्वितीय संशोधन) नियमावली-2013 के तहत करांकन संबंध में उत्तर प्रदेश अधिनियम-1959 की धारा-222 (1) का यह नोटिस 27 मई को जारी किया गया है। इसमें भवन मालिक से उसकी संपत्ति की पैमाइश आदि की सूचना मांगी गई है।
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नियमों के मुताबिक इस तरह के नोटिस जोनल प्रभारी, कर निर्धारण अधिकारी या कर अधीक्षक जारी करते हैं। इस नोटिस में इस वरीयता क्रम को दरकिनार कर कविनगर जोन में लिपिक हरेंद्र नागर ने जारी कर दिया है। खास बात यह है कि नोटिस में रबर स्टांप जोनल प्रभारी के पदनाम का लगाया गया है और प्रिटिंग में कर निर्धारण अधिकारी का पदनाम लिखा गया है लेकिन हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
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यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले पुस्तकालय विभाग के एक लिपिक ने भी संयुक्त नगर आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर करके कर्मचारी का कार्यक्षेत्र बदल दिया । इस मामले में निगम की खासी किरकिरी हुई थी, ऐसे में बृहस्पतिवार को जब यह मामला सामने आया तो हंगामा शुरू हो गया है। आरोप लग रहे हैं कि यह नोटिस अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जारी किया गया है।
इसके पीछे टैक्स निर्धारण में ‘खेल’ किया जा रहा है।
मैंने जोनल प्रभारी के निर्देश पर ही यह नोटिस जारी किए थे। इसमें टैक्स का निर्धारण नहीं किया गया है, सिर्फ भवन मालिक से संपत्ति की पैमाइश संबंधी डिटेल मांगी गई है। नोटिस जारी करने के पीछे गलत मंशा नहीं है।
- हरेंद्र नागर, लिपिक, कविनगर जोन
धारा 222 (1) के नोटिस कुछ नोटिस जारी करने के लिए बाबुओं को कहा गया था। अब उन्होंने मेरी ओर से नोटिस जारी किए हैं या अपनी ओर से यह देखना पड़ेगा। शुक्रवार को ऑफिस जाकर मामले की जांच की जाएगी।
- नरेंद्र यादव, कर निर्धारण अधिकारी, कविनगर जोन
कई स्थानों से नोटिस जारी कर टैक्स निर्धारण में घपलेबाजी की सूचनाएं पहले भी मिल चुकी हैं। अगर लिपिक ने बिना अधिकार के जोनल प्रभारी के नाम से नोटिस जारी किए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। अगर मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा पाया गया तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी। - अशु वर्मा, महापौर