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नहीं हो सका अब्दुल करीम टुंडा की आंखों का ऑपरेशन

Fri, 07 Apr 2017 11:58 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Fri, 07 Apr 2017 11:58 PM IST
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Abdul Karim Tunda's eye operation could not be done
अब्दुल करीम टुंडा - फोटो : अमर उजाला

बम बनाने में एक्सपर्ट लश्कर-ए-तैयबा का कुख्यात आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा शुक्रवार को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने बीपी हाई होने के कारण उसका ऑपरेशन टाल दिया। हाई सिक्योरिटी में लाए गए टुंडा की स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी।

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जेल अधीक्षक एसपी यादव ने बताया कि डासना जेल में बंद कुख्यात आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा को पिछले कई माह से सफेद मोतियाबिंद की बीमारी है, जिसका अस्पताल जेल में इलाज चल रहा था।
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जब उसे ज्यादा परेशानियां होने लगीं तो जेल डॉक्टरों सुनील त्यागी ने उसके ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल एमएमजी में शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे भेजा था। डॉक्टर त्यागी ने बताया कि जब अब्दुल करीम टुंडा अस्पताल में पहुंचा तो वह घबराने लगा। एमएमजी के आई सर्जन मदन लाल ने ऑपरेशन की तैयारियां की।
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डॉक्टरों ने उसका बीपी चेक किया तो उसका बीपी 200 से ऊपर था, जोकि हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आता है। इसी के चलते डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। फिलहाल उसे एक सप्ताह की बीपी की दवाइयां देकर वापस जेल भेज दिया है। वहीं, जेल डॉक्टर का कहना है कि एक सप्ताह बाद टुंडा का ऑपरेशन कराया जाएगा।

पिलखुवा के अशोक नगर का रहने वाला अब्दुल करीम टुंडा 1980 में कभी अपनी एक होम्योपैथिक दवाइयों की दुकान चलाता था। उसका परिवार कपड़ों पर रंगाई का काम करता था। टुंडा दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद का करीबी माना जाता है।

वह भारत में 1996 से 1998 के बीच अलग-अलग जगहों पर हुए बम धमाकों का मास्टरमाइंड भी है। कई वर्षों तक वह फरार रहा था। पाकिस्तान से जिन बीस आतंकियों के प्रत्यर्पण की मांग भारत ने की थी, उसमें टुंडा का भी नाम शामिल था।

इस लिस्ट में लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद, जैश ए मोहम्मद का मौलाना अजहर मसूद अल्वी भी शामिल हैं। कई बार उसके विदेशों में होने की सूचना मिलती रही थी। एक बार उसके मरने तक की अफवाह फैल चुकी थी। कुछ वर्ष पूर्व ही उसे नेपाल बार्डर से गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया। दिल्ली के मुकदमों से बरी होने के बाद टुंडा को गाजियाबाद की डासना जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। तभी से वह डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद है।

फ्रंटियर मेल बम धमाके का एक मामला उसका गाजियाबाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश कमलेश कुमार की कोर्ट में विचाराधीन है। बम बनाते समय धमाके में गंवा चुका है हाथअब्दुल करीम टुंडा 1997 के दौरान वह कराची, केन्या और पश्चिम एशिया के देशों में जाता रहा है।


बीते कुछ दशक में वह बांग्लादेश और पाकिस्तान में अपनी भूमिका दर्ज कराता रहा था। इस दौरान ही एक बार बम बनाने के दौरान हुए धमाके में वह अपना हाथ गंवा चुका है।

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