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फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर डाक्टर से पांच लाख ठगने वाला गिरोह पकड़ा
Updated Sat, 29 Sep 2018 01:54 AM IST
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रामपार्क निवासी एक डाक्टर के क्लीनिक पर फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर छापा मारकर करीब पांच लाख रुपये ठगने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना दिल्ली पुलिस का एक इंस्पेक्टर साथी समेत फरार है। पकड़े गए आरोपियों के पास से पुलिस ने 2.60 लाख रुपये, चार मोबाइल और डाक्टर की डिग्री बरामद की है।
दिल्ली पुलिस के आरोपी इंस्पेक्टर ने ही 13 सितंबर को साथियों के साथ फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर डॉक्टर से ठगी की थी। इसकी मुखबिरी डॉक्टर के पड़ोसी एवं दोस्त ने की थी।
साहिबाबाद के रामपार्क में डा. महानंद सिंह परिवार के साथ रहते हैं। घर के नीचे ही उनका क्लीनिक है। आरोपी रविंद्र और प्रीतम महानंद सिंह के जानकार हैं। रविंद्र और महानंद पुराने दोस्त रहे हैं। रविंद्र को महानंद की डिग्री और असलियत के बारे में पूरी जानकारी थी।
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महानंद ने कुछ दिनों पहले ही 20 लाख रुपये का एक प्लॉट बेचा था। इसकी जानकारी भी रविंद्र को थी। इलेक्ट्रीशियन रविंद्र का धंधा इन दिनों कुछ खास नहीं चल रहा था। इसलिए रविंद्र ने अपने साथ काम करने वाले प्रीतम के साथ मिलकर महानंद से रुपये ऐंठने की योजना बनाई। प्रीतम ने दिल्ली निवासी अपने दोस्तों कपिल और कमल से संपर्क साधा। 13 सितंबर को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर राजकुमार डा. महानंद सिंह के क्लीनिक पर पहुंचा और खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताकर पूरी घटना को अंजाम दिया।
साहिबाबाद सीओ डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने शाहदरा दिल्ली निवासी कपिल, कमल उर्फ भूरे और साहिबाबाद निवासी रविंद्र उर्फ टिंकू व प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की किंग्सवे प्लाटून में तैनात इंस्पेक्टर राजकुमार और उसका एक साथी संजीव उर्फ संजू अभी फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इंस्पेक्टर राजकुमार कपिल का पुराना दोस्त है।
20 लाख रुपये मांगने पर डॉक्टर को हुआ शक
पुलिस के मुताबिक, आरोपी इंस्पेक्टर ने छापेमारी के दौरान पीड़ित की डिग्री के बारे में सवाल-जवाब किए। क्लीनिक पर रखी दवाइयों को भी प्रतिबंधित बताकर धमकाना शुरू कर दिया। मामला रफादफा करने के लिए इंस्पेक्टर ने 20 लाख रुपये मांगे, लेकिन वह 20 लाख की मांग सुनकर वह दंग रह गए और उसने 4.80 लाख रुपये देकर मामले को रफादफा कराया। छापेमारी के दौरान रविंद्र भी मौजूद था। आरोपियों के जाने के बाद पीड़ित को इंस्पेक्टर का 20 लाख रुपये मांगना खटका, क्योकि रविंद्र को ही 20 लाख और डिग्री के बारे में जानकारी थी। उसने पुलिस से शिकायत की।
सीसीटीवी कैमरे और कैब नंबर से खुली वारदात
एसएचओ दिनेश सिंह ने बताया कि घटना के दौरान आरोपी इंस्पेक्टर राजकुमार और उसकी ओला कैब कुछ दूरी पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। ओला कैब का नंबर मिलने पर पुलिस ने सर्विलांस की मदद से जांच की तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। एसएचओ ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर राजकुमार से कॉल पर घटना के संबंध में पूछताछ की और उन्हें थाने आने को कहा। आरोपी साहिबाबाद एसएचओ पर ही रौब गांठने लगा। एसएचओ का कहना है कि इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस को एक रिपोर्ट और एफआईआर की कॉपी भेजी जा रही है। जल्द ही इंस्पेक्टर राजकुमार की गिरफ्तारी की जाएगी।
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दिल्ली पुलिस के आरोपी इंस्पेक्टर ने ही 13 सितंबर को साथियों के साथ फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बनकर डॉक्टर से ठगी की थी। इसकी मुखबिरी डॉक्टर के पड़ोसी एवं दोस्त ने की थी।
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साहिबाबाद के रामपार्क में डा. महानंद सिंह परिवार के साथ रहते हैं। घर के नीचे ही उनका क्लीनिक है। आरोपी रविंद्र और प्रीतम महानंद सिंह के जानकार हैं। रविंद्र और महानंद पुराने दोस्त रहे हैं। रविंद्र को महानंद की डिग्री और असलियत के बारे में पूरी जानकारी थी।
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महानंद ने कुछ दिनों पहले ही 20 लाख रुपये का एक प्लॉट बेचा था। इसकी जानकारी भी रविंद्र को थी। इलेक्ट्रीशियन रविंद्र का धंधा इन दिनों कुछ खास नहीं चल रहा था। इसलिए रविंद्र ने अपने साथ काम करने वाले प्रीतम के साथ मिलकर महानंद से रुपये ऐंठने की योजना बनाई। प्रीतम ने दिल्ली निवासी अपने दोस्तों कपिल और कमल से संपर्क साधा। 13 सितंबर को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर राजकुमार डा. महानंद सिंह के क्लीनिक पर पहुंचा और खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताकर पूरी घटना को अंजाम दिया।
साहिबाबाद सीओ डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने शाहदरा दिल्ली निवासी कपिल, कमल उर्फ भूरे और साहिबाबाद निवासी रविंद्र उर्फ टिंकू व प्रीतम सिंह को गिरफ्तार किया है। दिल्ली की किंग्सवे प्लाटून में तैनात इंस्पेक्टर राजकुमार और उसका एक साथी संजीव उर्फ संजू अभी फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इंस्पेक्टर राजकुमार कपिल का पुराना दोस्त है।
20 लाख रुपये मांगने पर डॉक्टर को हुआ शक
पुलिस के मुताबिक, आरोपी इंस्पेक्टर ने छापेमारी के दौरान पीड़ित की डिग्री के बारे में सवाल-जवाब किए। क्लीनिक पर रखी दवाइयों को भी प्रतिबंधित बताकर धमकाना शुरू कर दिया। मामला रफादफा करने के लिए इंस्पेक्टर ने 20 लाख रुपये मांगे, लेकिन वह 20 लाख की मांग सुनकर वह दंग रह गए और उसने 4.80 लाख रुपये देकर मामले को रफादफा कराया। छापेमारी के दौरान रविंद्र भी मौजूद था। आरोपियों के जाने के बाद पीड़ित को इंस्पेक्टर का 20 लाख रुपये मांगना खटका, क्योकि रविंद्र को ही 20 लाख और डिग्री के बारे में जानकारी थी। उसने पुलिस से शिकायत की।
सीसीटीवी कैमरे और कैब नंबर से खुली वारदात
एसएचओ दिनेश सिंह ने बताया कि घटना के दौरान आरोपी इंस्पेक्टर राजकुमार और उसकी ओला कैब कुछ दूरी पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। ओला कैब का नंबर मिलने पर पुलिस ने सर्विलांस की मदद से जांच की तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। एसएचओ ने दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर राजकुमार से कॉल पर घटना के संबंध में पूछताछ की और उन्हें थाने आने को कहा। आरोपी साहिबाबाद एसएचओ पर ही रौब गांठने लगा। एसएचओ का कहना है कि इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस को एक रिपोर्ट और एफआईआर की कॉपी भेजी जा रही है। जल्द ही इंस्पेक्टर राजकुमार की गिरफ्तारी की जाएगी।