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अवैध निर्माण पर प्रवर्तन अधिकारी की जवाबदेही तय
Updated Sun, 12 Aug 2018 01:44 AM IST
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अवैध निर्माण पर प्रवर्तन अधिकारी की जवाबदेही होगी तय
गाजियाबाद। अवैध निर्माण के मामले में अब प्राधिकरण से जुड़े संबंधित क्षेत्र के नोडल व प्रवर्तन प्रभारी का बच पाना मुश्किल होगा। शासन ने खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग के प्रस्ताव को मानते हुए गूगल मैपिंग करने का फैसला लिया है। प्रमुख सचिव आवास ने सभी प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वो रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के सहयोग से 15 दिन के अंदर अनिवार्य रूप से गूगल मैपिंग कराएं। साथ ही नोडल एवं प्रवर्तन अधिकारी को स्थानांतरण के वक्त गूगल मैप की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य रूप से नए अधिकारी के सुपुर्द करनी होगी, जिससे स्पष्ट हो सके कि उसके कार्यकाल में क्षेत्र के अंदर कितना अवैध निर्माण हुआ है, यह आसानी से पता लगाया जा सके।
नोएडा व आकाश नगर में निर्माणाधीन अवैध बिल्डिंग के गिरने के बाद राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने दो अगस्त और फिर आठ अगस्त को प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा कि अवैध निर्माण एकाएक नहीं हुआ है। बीते 15 से 20 वर्षों में प्रशासन की मौन स्वीकृति रही है, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ न कोई एफआईआर हुई और न ही कोई बड़ी कार्रवाई। जीडीए में इंजीनियर काफी समय से प्रति फ्लोर के लिंटर के हिसाब से पैसा लेते रहे हैं। अब इस व्यवस्था को रोकने के लिए गूगल मैपिंग कराई जाए, जिसमें निजी कॉलेज निशुल्क मदद करने को तैयार हैं। मैपिंग होने के बाद दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करना आसान रहेगा। क्योंकि उसके बाद यह पता लगा पाना आसान होगा कि किस अधिकारी के कार्यकाल में अवैध निर्माण हुआ। अब प्रमुख सचिव आवास ने अवैध निर्माण को रोकने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश संबंधित जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण को दिए हैं, जिसमें जोन के प्रवर्तन प्रभारी या अधिकारी का स्थानांतरण होने पर गूगल मैपिंग की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य तौर पर देने को कहा गया है। इसके साथ ही अवैध रूप से कॉलोनी काटने वाले बिल्डर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अवैध निर्माण को रोकने में असफल रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी नियमित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
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गाजियाबाद। अवैध निर्माण के मामले में अब प्राधिकरण से जुड़े संबंधित क्षेत्र के नोडल व प्रवर्तन प्रभारी का बच पाना मुश्किल होगा। शासन ने खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग के प्रस्ताव को मानते हुए गूगल मैपिंग करने का फैसला लिया है। प्रमुख सचिव आवास ने सभी प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वो रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के सहयोग से 15 दिन के अंदर अनिवार्य रूप से गूगल मैपिंग कराएं। साथ ही नोडल एवं प्रवर्तन अधिकारी को स्थानांतरण के वक्त गूगल मैप की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य रूप से नए अधिकारी के सुपुर्द करनी होगी, जिससे स्पष्ट हो सके कि उसके कार्यकाल में क्षेत्र के अंदर कितना अवैध निर्माण हुआ है, यह आसानी से पता लगाया जा सके।
नोएडा व आकाश नगर में निर्माणाधीन अवैध बिल्डिंग के गिरने के बाद राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने दो अगस्त और फिर आठ अगस्त को प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखा। उन्होंने पत्र में लिखा कि अवैध निर्माण एकाएक नहीं हुआ है। बीते 15 से 20 वर्षों में प्रशासन की मौन स्वीकृति रही है, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ न कोई एफआईआर हुई और न ही कोई बड़ी कार्रवाई। जीडीए में इंजीनियर काफी समय से प्रति फ्लोर के लिंटर के हिसाब से पैसा लेते रहे हैं। अब इस व्यवस्था को रोकने के लिए गूगल मैपिंग कराई जाए, जिसमें निजी कॉलेज निशुल्क मदद करने को तैयार हैं। मैपिंग होने के बाद दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करना आसान रहेगा। क्योंकि उसके बाद यह पता लगा पाना आसान होगा कि किस अधिकारी के कार्यकाल में अवैध निर्माण हुआ। अब प्रमुख सचिव आवास ने अवैध निर्माण को रोकने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश संबंधित जिलाधिकारी, उपाध्यक्ष विकास प्राधिकरण को दिए हैं, जिसमें जोन के प्रवर्तन प्रभारी या अधिकारी का स्थानांतरण होने पर गूगल मैपिंग की हस्ताक्षरित प्रति अनिवार्य तौर पर देने को कहा गया है। इसके साथ ही अवैध रूप से कॉलोनी काटने वाले बिल्डर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अवैध निर्माण को रोकने में असफल रहने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी नियमित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।
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