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विरोध में झील में उतर कर किया प्रदर्शन
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विरोध में झील पर उतर कर किया प्रदर्शन
गाजियाबाद/साहिबाबाद।
अर्थला में बने 540 मकान नए नहीं हैं, 15 से 20 साल पुराने हैं। लोगों ने जमीन खरीदकर खून-पसीने की कमाई से इन मकानों को बनाया है। अब इन मकानों को निगम व जिला प्रशासन के अफसरों ने अवैध बताया तो कालोनी की महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा। विरोध जताने कालोनी की 50 महिलाएं सुबह 7:30 बजे झील के गंदे पानी में उतर गई और डूब कर आत्महत्या करने की चेतावनी दे दी। सूचना मिली तो जिला प्रशासन के अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस बल और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे तो लोगों को समझाने में करीब साढ़े तीन घंटे लगे। पांच घंटे से झील के पानी में खड़ी महिलाएं करीब एक बजे बाहर निकलीं। इनमें से कई महिलाओं की तबियत बिगड़ गई।
दरअसल, एनजीटी ने झील के खसरा नंबर-1445, 1445 की जमीन पर हुए निर्माण को हटाने के आदेश दिए हैं। 31 मई को डीएम और नगर आयुक्त को एनजीटी में आदेशों के पालन की रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके चलते नगर निगम व जिला प्रशासन ने 29 मई को अर्थला में झील की जमीन पर बने 540 अवैध मकानों को तोड़ने की तैयारी की है। शनिवार को नगर निगम ने अवैध निर्माण को चिह्नित कर तोड़े जाने वाले मकानों पर भी लाल निशान लगाए तो यहां के लोगों में हड़कंप मच गया। निगम ने शनिवार को मुनादी कराकर लोगों को तीन दिन में मकान खाली करने के निर्देश भी दिए थे। रविवार को पचास से अधिक लोगों ने झील के अंदर खड़े होकर लगभग पांच घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मकान तोड़े जाने पर आत्महत्या की चेतावनी दी। सूचना पर सुबह करीब 9:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट यशवर्धन श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया। उन्होंने कहा कि मामला एनजीटी का है। लोग डीएम से मिलकर अपनी समस्या रखें। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सोमवार को डीएम से मिलकर अपनी समस्या रखने का निर्णय लिया। स्थानीय पार्षद दिलशाद मलिक ने सांसद वीके सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने न्याय दिलाने की मांग की है।
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20 वर्षों से मकानों में रह रहे हैं लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि वह करीब 20 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास मकान खरीदने के कागजात और रजिस्ट्री भी है। उन्होंने जमा पूंजी से मकान खरीदा था। उन्होंने मकानों की रजिस्ट्री के आधार पर बिजली कनेक्शन भी लिए हैं। कालोनी के लोगों का कहना है कि अगर मकान अवैध हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए थी, बिजली कनेक्शन भी नहीं दिए जाने चाहिए थे।
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पार्षद ने सांसद को लिखा पत्र
स्थानीय पार्षद दिलशाद मलिक ने सांसद को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में नगर निगम ने खसरा संख्या-1062 के बदले खसरा संख्या-1445 पर लोगों को रहने के लिए जमीन दी थी। तब से यहां लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। अब एनजीटी के आदेश पर नगर निगम जमीन को खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है। इस मामले में नगर निगम की गंभीर लापरवाही है। उनकी सांसद से मांग है कि बालाजी विहार और चित्रकूट कालोनी में बसे लोगों को पहले खसरा संख्या-1062 की जमीन पर कब्जा दिलाया जाए फिर झील की जमीन को खाली कराया जाए।
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प्रतिक्रिया :
मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से मिलेंगे। अगर मामले को लेकर कोर्ट भी जाना पड़ा तो लोग कोर्ट तक जाएंगे। -दिलशाद मलिक, पार्षद
कई वर्षों से यहां पर रह रहे हैं। अब नगर निगम हमारे मकान खाली करने को कह रहा है। वह मकान खाली कर देंगे तो रहेंगे कहां। निगम ने अगर मकान तोड़े तो वह आत्महत्या कर लेंगे। -शाहीन
जमा पूंजी लगाकर यहां पर मकान खरीदा है। इसकी रजिस्ट्री भी हमारे नाम पर है। अब मकानों को अवैध बताया जा रहा है। अगर मकान अवैध है तो उनकी रजिस्ट्री क्यों की गई। इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। -ओमवती
वर्षों से यहां रह रहे हैं। मकान खाली नहीं किए जाएंगे। प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। निगम का बुल्डोजर आया तो वह उसके नीचे लेट जाएंगे। -खलील अहमद
नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही है। अगर यह झील की जमीन थी तो यहां पर कैसे मकान बनने दिए गए। यहां रहने वाले लोग अब कहां जाएंगे।- नितिन
हम लोग अपने घरों को नहीं खाली करेंगे। अधिकारी कार्रवाई करेंगे तो उसका विरोध किया जाएगा। हमारे पास रहने का दूसरा कोई ठिकाना नहीं है- इमरान
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झील के पानी में खड़े होने से 11 लोग अस्पताल पहुंचे
- दो का अभी भी अस्पताल में चल रहा इलाज
अर्थला में पानी में खड़े होने और तेज धूप की वजह से 6 महिलाओं और 5 पुरुषों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। नौ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि दो महिलाएं नज्मा (35) और मुस्तकीमा (60) अभी भर्ती हैं। परिजनों ने बताया कि सुबह सात बजे से वह पानी में खड़े थे। ठंडे और गंदे पानी में खड़े होने होने व तेज धूप की वजह से बेहोश हो गए थे। डॉ. अनिल प्रकाश ने बताया कि सर्दी-गर्मी की वजह से तबीयत खराब हो गई थी। बाकी सब सामान्य हैं। उपचार के बाद जल्द इन्हें भी डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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गाजियाबाद/साहिबाबाद।
अर्थला में बने 540 मकान नए नहीं हैं, 15 से 20 साल पुराने हैं। लोगों ने जमीन खरीदकर खून-पसीने की कमाई से इन मकानों को बनाया है। अब इन मकानों को निगम व जिला प्रशासन के अफसरों ने अवैध बताया तो कालोनी की महिलाओं का आक्रोश फूट पड़ा। विरोध जताने कालोनी की 50 महिलाएं सुबह 7:30 बजे झील के गंदे पानी में उतर गई और डूब कर आत्महत्या करने की चेतावनी दे दी। सूचना मिली तो जिला प्रशासन के अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस बल और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे तो लोगों को समझाने में करीब साढ़े तीन घंटे लगे। पांच घंटे से झील के पानी में खड़ी महिलाएं करीब एक बजे बाहर निकलीं। इनमें से कई महिलाओं की तबियत बिगड़ गई।
दरअसल, एनजीटी ने झील के खसरा नंबर-1445, 1445 की जमीन पर हुए निर्माण को हटाने के आदेश दिए हैं। 31 मई को डीएम और नगर आयुक्त को एनजीटी में आदेशों के पालन की रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके चलते नगर निगम व जिला प्रशासन ने 29 मई को अर्थला में झील की जमीन पर बने 540 अवैध मकानों को तोड़ने की तैयारी की है। शनिवार को नगर निगम ने अवैध निर्माण को चिह्नित कर तोड़े जाने वाले मकानों पर भी लाल निशान लगाए तो यहां के लोगों में हड़कंप मच गया। निगम ने शनिवार को मुनादी कराकर लोगों को तीन दिन में मकान खाली करने के निर्देश भी दिए थे। रविवार को पचास से अधिक लोगों ने झील के अंदर खड़े होकर लगभग पांच घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मकान तोड़े जाने पर आत्महत्या की चेतावनी दी। सूचना पर सुबह करीब 9:30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट यशवर्धन श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया। उन्होंने कहा कि मामला एनजीटी का है। लोग डीएम से मिलकर अपनी समस्या रखें। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सोमवार को डीएम से मिलकर अपनी समस्या रखने का निर्णय लिया। स्थानीय पार्षद दिलशाद मलिक ने सांसद वीके सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने न्याय दिलाने की मांग की है।
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20 वर्षों से मकानों में रह रहे हैं लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि वह करीब 20 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनके पास मकान खरीदने के कागजात और रजिस्ट्री भी है। उन्होंने जमा पूंजी से मकान खरीदा था। उन्होंने मकानों की रजिस्ट्री के आधार पर बिजली कनेक्शन भी लिए हैं। कालोनी के लोगों का कहना है कि अगर मकान अवैध हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए थी, बिजली कनेक्शन भी नहीं दिए जाने चाहिए थे।
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पार्षद ने सांसद को लिखा पत्र
स्थानीय पार्षद दिलशाद मलिक ने सांसद को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 में नगर निगम ने खसरा संख्या-1062 के बदले खसरा संख्या-1445 पर लोगों को रहने के लिए जमीन दी थी। तब से यहां लोग मकान बनाकर रह रहे हैं। अब एनजीटी के आदेश पर नगर निगम जमीन को खाली कराने की कार्रवाई कर रहा है। इस मामले में नगर निगम की गंभीर लापरवाही है। उनकी सांसद से मांग है कि बालाजी विहार और चित्रकूट कालोनी में बसे लोगों को पहले खसरा संख्या-1062 की जमीन पर कब्जा दिलाया जाए फिर झील की जमीन को खाली कराया जाए।
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प्रतिक्रिया :
मामले को लेकर उच्चाधिकारियों से मिलेंगे। अगर मामले को लेकर कोर्ट भी जाना पड़ा तो लोग कोर्ट तक जाएंगे। -दिलशाद मलिक, पार्षद
कई वर्षों से यहां पर रह रहे हैं। अब नगर निगम हमारे मकान खाली करने को कह रहा है। वह मकान खाली कर देंगे तो रहेंगे कहां। निगम ने अगर मकान तोड़े तो वह आत्महत्या कर लेंगे। -शाहीन
जमा पूंजी लगाकर यहां पर मकान खरीदा है। इसकी रजिस्ट्री भी हमारे नाम पर है। अब मकानों को अवैध बताया जा रहा है। अगर मकान अवैध है तो उनकी रजिस्ट्री क्यों की गई। इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। -ओमवती
वर्षों से यहां रह रहे हैं। मकान खाली नहीं किए जाएंगे। प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई का विरोध किया जाएगा। निगम का बुल्डोजर आया तो वह उसके नीचे लेट जाएंगे। -खलील अहमद
नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही है। अगर यह झील की जमीन थी तो यहां पर कैसे मकान बनने दिए गए। यहां रहने वाले लोग अब कहां जाएंगे।- नितिन
हम लोग अपने घरों को नहीं खाली करेंगे। अधिकारी कार्रवाई करेंगे तो उसका विरोध किया जाएगा। हमारे पास रहने का दूसरा कोई ठिकाना नहीं है- इमरान
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झील के पानी में खड़े होने से 11 लोग अस्पताल पहुंचे
- दो का अभी भी अस्पताल में चल रहा इलाज
अर्थला में पानी में खड़े होने और तेज धूप की वजह से 6 महिलाओं और 5 पुरुषों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। नौ लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया, जबकि दो महिलाएं नज्मा (35) और मुस्तकीमा (60) अभी भर्ती हैं। परिजनों ने बताया कि सुबह सात बजे से वह पानी में खड़े थे। ठंडे और गंदे पानी में खड़े होने होने व तेज धूप की वजह से बेहोश हो गए थे। डॉ. अनिल प्रकाश ने बताया कि सर्दी-गर्मी की वजह से तबीयत खराब हो गई थी। बाकी सब सामान्य हैं। उपचार के बाद जल्द इन्हें भी डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।