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अब लगता है डर...महफूज नहीं रहा शहर -Ghaziabad city

Thu, 23 Nov 2017 01:10 AM IST
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:10 AM IST
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अब लगता है डर...महफूज नहीं रहा शहर -Ghaziabad city
सड़क ही नहीं घर में भी महफूज नहीं लोग
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राजीव शर्मा
गाजियाबाद। महिलाओं और व्यापारियों के साथ आम जनता गाजियाबाद में अपराधियों के निशाने पर है। लचर पुलिसिंग और बेखौफ बदमाशों की वजह से शहर की सड़कें ही नहीं अब घर में भी लोग महफूज नहीं हैं। शाम होते ही पुलिस सड़कों से गायब हो जाती है और अपराधी सक्रिय। बुधवार को ही मुरादनगर में युवती से छेड़छाड़ की गई और शिकायत करने पर पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाए युवती के साथ ही अभद्रता कर दी।
पहले खोड़ा में भाजपा नेता गजेंद्र भाटी उर्फ गज्जी की हत्या, साहिबाबाद क्षेत्र में बिल्डर एसपी सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या, 8 नवंबर को बसपा नेता के घर में पत्नी को बंधक बनाकर दिनदहाड़े 40 लाख की लूट, वैशाली में ज्वेलर्स को गोली मारकर लूट की कोशिश, मोबाइल लूटने और विरोध करने पर युवक को बाइक से घसीटने, मंगलवार को सरेराह हैंडलूम कारोबारी की हत्या व लोनी में निकाय प्रत्याशी के पति को गोली मार दी गई। हाल यह है कि पुलिस एक वारदात की तह तक नहीं पहुंचती कि दूसरी वारदात अंजाम दे दी जाती है।
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थाना-चौकी के पास ही हो रहीं वारदातें
बीते दिन में कई वारदातों को बदमाशों ने थाने और पुलिस चौकी के पास ही अंजाम दिया है। होली चाइल्ड चौक पर ही पुलिस पिकेट दिन भर रहती है। बदमाशों ने इससे महज 200 मीटर की दूरी पर बसपा नेता के घर में दिनदहाड़े लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। महिला पत्रकार के साथ पर्स लूट की घटना भी इंदिरापुरम थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर हुई। मंगलवार को हैंडलूम कारोबारी की हत्या की वारदात भी कालका गढ़ी चौकी से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई। वारदात के दोनों ओर पुलिस चौकियां हैं, लेकिन बदमाश वारदात को अंजाम देकर फरार भी आसानी से हो गए।
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रात में सड़कों पर नहीं दिखती पुलिस
दिन में भले पुलिस कहीं चौराहों-तिराहों पर खड़ी या सड़कों पर गश्त करती नजर आ जाती हो लेकिन रात को पुलिस भी नदारद रहती है। यही नहीं संवेदनशील क्षेत्रों में भी पुलिस रात को गश्त नहीं करती जबकि प्रदेश की पूर्व सरकार ने बड़ी संख्या में पेट्रोलिंग के लिए पुलिस को वाहन दिए थे। कारोबारी गगन की हत्या के बाद भी पुलिस की सतर्कता नहीं बढ़ी। बुधवार रात होली चाइल्ड चौक, अंबेडकर रोड, गांधी नगर, मालीवाड़ा समेत अधिकांश स्थानों पर नजर नहीं आई।
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क्या कहते हैं लोग
शहर में व्यापारी भी अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। दिनदहाड़े लूट और हत्या जैसी जघन्य वारदातें हो रही हैं। सरकार बदलने के बाद भी व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर विश्वास पैदा नहीं हो रहा है।
- सुभाष छाबड़ा महानगर अध्यक्ष, उ.प्र. उद्योग व्यापार मंडल
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बदमाशों में पुलिस का कोई खौफ बाकी नहीं रह गया है। पुलिस चौकियों और थानों में पास वारदातें हो रही हैं। जब तक पुलिस अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ईमानदारी से नहीं करेगी, तब तक बदमाशों में खौफ नहीं बनेगा।

- सूरज बत्रा, कारोबारी
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हत्या, लूट की वारदातें इसी तरह होती रही तो व्यापारियों को पलायन करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार और पुलिस व्यापारियों को सुरक्षित माहौल नहीं दे पा रही है।
- मनीष अरोड़ा, दुकानदार
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बीते कुछ महीनों में महिलाओं के प्रति अपराध बढ़े हैं। महिलाओं से मोबाइल, चेन, पर्स स्नैचिंग की वारदातें पहले कभी कभार होती थी, अब प्रतिदिन शहर के किसी न किसी हिस्से में एक-दो वारदात हो जाती हैं। महिलाओं में दहशत पैदा हो रही है।
- सोनम श्रीवास्तव, गृहणी
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