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Ghaziabad News: चकबंदी ने ऊसर को आबादी में दर्ज करने के आदेश को बताया फर्जी
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गाजियाबाद। सदरपुर गांव में नगर निगम की 100 करोड़ रुपये की जमीन पर कब्जे के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। चकबंदी विभाग ने अपनी जांच में ऊसर की जमीन को आबादी में दर्ज करने के आदेश को पूरी तरह फर्जी, अवैधानिक और कूटरचित माना है। चकबंदी अधिकारी की यह रिपोर्ट 3 सितंबर को एसआईटी को सौंप दी गई है। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर एसआईटी आगे की कार्रवाई करेगी।
एसआईटी के अध्यक्ष और एडीएम भू-अर्जन अवनीश सिंह ने बताया कि चकबंदी विभाग की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इसमें सदरपुर गांव की विवादित जमीन को लेकर कई अहम जानकारियां दी गई हैं। उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और एक सप्ताह के भीतर एसआईटी अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप देगी। इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई तय होगी।
रिपोर्ट में उठाए गए गंभीर सवाल
चकबंदी अधिकारी की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस आदेश के आधार पर ऊसर की जमीन को आबादी के खाते में दर्ज किया गया, उसकी मूल पत्रावली ही विभाग में मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं, आदेश में किस धारा के तहत कार्रवाई की गई, इसका भी कोई उल्लेख नहीं है।
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जमीन की श्रेणी बदलने के लिए जिस प्रक्रिया का प्रयोग किया गया, उसमें पुराने नियमों का हवाला दिया गया है, जबकि 1978 में इस संबंध में नए नियम लागू हो चुके थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम समाज की जमीन की श्रेणी बदलने का अधिकार चकबंदी न्यायालय को है ही नहीं। इन सभी बिंदुओं के आधार पर यह माना गया है कि किया गया परिवर्तन गलत, अवैधानिक, संदिग्ध और पूरी तरह कूटरचित है। यह रिपोर्ट नगर निगम की मांग पर की गई जांच के बाद तैयार की गई है।
यह है पूरा मामला
दरअसल, सदरपुर में एक जमीन पर अवैध निर्माण पर कार्रवाई के दौरान यह मामला सामने आया था। जीडीए ने 25 अप्रैल 2023 को नगर निगम को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह ग्राम समाज की है। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में राजस्व अभिलेखागार की अक्तूबर 2000 में तैयार रिपोर्ट में आकार पत्र-45, जिसमें जमीन से संबंधित पूरी जानकारी होती है, के कई पृष्ठ गायब मिले। जांच में पता चला कि यह पृष्ठ जांच शुरू होने से करीब सात महीने पहले मार्च में ही गायब कर दिए गए थे। इस मामले में राजस्व अभिलेखागार में तैनात जयप्रकाश की तहरीर पर कविनगर थाने में धर्मबीर और ब्रह्म सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
बाद में महापौर की शिकायत पर जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान एसडीएम के तबादले के बाद इस मामले की फाइल भी गायब हो गई थी, हालांकि अधिकारियों की सख्ती के बाद फाइल को तलाश कर कार्रवाई को फिर से आगे बढ़ाया गया। अब चकबंदी की रिपोर्ट आने के बाद इस जमीन घोटाले से पर्दा उठने की उम्मीद है।
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एसआईटी के अध्यक्ष और एडीएम भू-अर्जन अवनीश सिंह ने बताया कि चकबंदी विभाग की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इसमें सदरपुर गांव की विवादित जमीन को लेकर कई अहम जानकारियां दी गई हैं। उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है और एक सप्ताह के भीतर एसआईटी अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप देगी। इसके बाद दोषियों पर कार्रवाई तय होगी।
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रिपोर्ट में उठाए गए गंभीर सवाल
चकबंदी अधिकारी की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर की गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस आदेश के आधार पर ऊसर की जमीन को आबादी के खाते में दर्ज किया गया, उसकी मूल पत्रावली ही विभाग में मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं, आदेश में किस धारा के तहत कार्रवाई की गई, इसका भी कोई उल्लेख नहीं है।
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रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जमीन की श्रेणी बदलने के लिए जिस प्रक्रिया का प्रयोग किया गया, उसमें पुराने नियमों का हवाला दिया गया है, जबकि 1978 में इस संबंध में नए नियम लागू हो चुके थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम समाज की जमीन की श्रेणी बदलने का अधिकार चकबंदी न्यायालय को है ही नहीं। इन सभी बिंदुओं के आधार पर यह माना गया है कि किया गया परिवर्तन गलत, अवैधानिक, संदिग्ध और पूरी तरह कूटरचित है। यह रिपोर्ट नगर निगम की मांग पर की गई जांच के बाद तैयार की गई है।
यह है पूरा मामला
दरअसल, सदरपुर में एक जमीन पर अवैध निर्माण पर कार्रवाई के दौरान यह मामला सामने आया था। जीडीए ने 25 अप्रैल 2023 को नगर निगम को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि जिस जमीन पर निर्माण हो रहा है, वह ग्राम समाज की है। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में राजस्व अभिलेखागार की अक्तूबर 2000 में तैयार रिपोर्ट में आकार पत्र-45, जिसमें जमीन से संबंधित पूरी जानकारी होती है, के कई पृष्ठ गायब मिले। जांच में पता चला कि यह पृष्ठ जांच शुरू होने से करीब सात महीने पहले मार्च में ही गायब कर दिए गए थे। इस मामले में राजस्व अभिलेखागार में तैनात जयप्रकाश की तहरीर पर कविनगर थाने में धर्मबीर और ब्रह्म सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
बाद में महापौर की शिकायत पर जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान एसडीएम के तबादले के बाद इस मामले की फाइल भी गायब हो गई थी, हालांकि अधिकारियों की सख्ती के बाद फाइल को तलाश कर कार्रवाई को फिर से आगे बढ़ाया गया। अब चकबंदी की रिपोर्ट आने के बाद इस जमीन घोटाले से पर्दा उठने की उम्मीद है।