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लपट उठी... सिलिंडर फटा और मलबे में बदल गया मकान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 06 Oct 2022 01:03 AM IST
सार

लपट उठी... सिलिंडर फटा और मलबे में बदल गया मकानलोनी।कुछ और लोगों के अंदर होने की सूचना होने पर पुलिस भी मलबा हटाने में जुट गई।ऐसे में पुलिस ने डंडा फटाकर लोगों को वहां से हटाया।मलबे से मिले पटाखेरेस्क्यू टीम को मौके से कुछ पटाखे और कागज के रैपर मिले हैं।

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विस्तार

लपट उठी... सिलिंडर फटा और मलबे में बदल गया मकान
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लोनी। बिजली की तेजी से एक लपट उठी और बहुत तेज आवाज के साथ सिलिंडर फट गया और अगले ही पल पूरा मकान मलबे के ढेर में तबदील हो गया... हादसे की भयावहता बयां करता यह बयान है घायल मेहराज का। वह धमाके की चश्मदीद हैं। हादसे में उनका एक हाथ कट गया है। उनका कहना है कि पल भर में ही सब तबाह हो गया।
काफी देर तक दबे रहने के बाद मलबे से निकालकर जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराए जाने से पहले लगभग बदहवासी की हालत में उन्होंने बताया कि रसोई में चूल्हे पर चाय बन रही थी। वह उसमें दूध डालने ही वाली थीं कि अचानक सिलिंडर में तेजी से आग लग गई। हो सकता है लीकेज हुआ हो, लेकिन इसकी कोई गंध नहीं आई थी। आग की लपटों को देख वह रसोई से बाहर जाने लगी लेकिन तभी सिलिंडर में बहुत जोर से धमाका हो गया। उनके हाथ में सिलिंडर के टुकड़े घुस गए और खून का फव्वारा छूट पड़ा।
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वह बुरी तरह से घबरा गईं थी और बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं लेकिन रसोई के बाहर जाने से पहले ही मकान से मलबा गिरने लगा। वह वहीं पर मलबे में दब गईं और कुछ ही पलों में पूरा मकान गिर गया। खुद बुरी तरह लहूलुहान मेहराज अस्पताल में यही पूछे जा रही थीं कि रुकैया, सानिया, सबनूर और पोती इनाया कैसी हैं और कहां हैं? उन्हें मलबे से निकाला गया या नहीं।
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उधर, मौके पर पहुंचे लोगों ने बताया कि धमाके के वक्त घर में छह लोग थे। मलबा हटाकर उन्हें निकाला गया लेकिन चार के शव ही मिले। दो घायल निकाले गए। दोनों की हालत गंभीर हैं। घायलों में मेहराज और पड़ोस की युवती बेबी शामिल है।
मलबे से आ रही थी बचाओ-बचाओ की आवाज
लोनी। निठोरा गांव की बबलू गार्डन कॉलोनी में दो मंजिला मकान के गिरने के बाद मलबे में दबे लोग बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहे थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाके की आवाज सुनकर वह लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो महिलाओं की आवाज आ रही थी। मलबा हटाने के दौरान आवाज आनी बंद हो गई। लोगों ने जब मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला, तो चार की मौत हो चुकी थी। सभी को अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने चार को मृत बताया।
कालोनी निवासी अमानत उल्लाह और मुनशैद ने बताया कि धमाके बाद मकान का एक हिस्सा ऊपर झूल रहा था। लोगों ने जान की परवाह नहीं करते हुए बचाव कार्य में जुट गए। पुलिस भी आई तो लोग उनके साथ मिलकर मलबा हटाने लगे। मुनीर का मकान गाटर सिल्ली पर टिका हुआ था। आसपास के ज्यादातर मकान भी ऐसी ही हालत में बने हुए हैं। अधिकारियों की माने तो मकान के नीचे वाले फ्लोर पर रसोई में चाय बन रही थी। सिलिंडर फटने से हुए धमाके के बाद मकान गिर गया।
ऊपर मौत का डर, नीचे जिंदगी की तलाश
धमाके के बाद लगभग पूरा मकान गिर गया था लेकिन ऊपर की तरफ एक हिस्सा बचा रह गया था। इसके नीचे मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका थी। ऐसे में यहां भी मलबा हटाकर देखा गया को कोई दबा तो नहीं है। लोग मलबा हटा रहे थे और ऊपर देखे जा रहे थे। डर था कि यह हिस्सा गिर न जाए। लेकिन, हिम्मत रखकर मलबे के ढेर में जिंदगी की तलाश करते रहे। जब मलबे से सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया, इसके बाद जेसीबी की सहायता से मकान के झूल रहे हिस्से को तोड़ा गया।
बेहोश हो गईं महिलाएं
घटना के बाद मुनीर के ससुराल के सदस्य पहुंचे। यहां पहुंचकर उनका रो रोकर बुरा हाल हो गया। इस दौरान मुनीर के रिश्तेदार मजरूद्दीन और नूरजहां बेहोश हो गई। लोग उनके मुंह पर पानी की छींटे डालकर होश में लाए।
विधायक ने दिया मदद का भरोसा
मौके पर पहुंचे लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने मौके पर मौजूद डीएम से परिवार की हरसंभव आर्थिक मदद और घायलों का उचित उपचार किए जाने की बात कही। साथ ही उन्होंने बताया कि परिवार की मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी मदद कराई जाएगी। इसके बाद बीएसपी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट वीरेंद्र जाटव अपनी टीम के साथ पहुंचे। सीपीएम का प्रतिनिधिमंडल जिला प्रभारी जावेद कुरैशी के नेतृत्व में पहुंचा और अधिकारियों से मदद की मांग की है। घटना की सूचना पाकर पूर्व विधायक मदन भैया मौके पर पहुंचे। उन्होंने सरकार से मृतक के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये, घायलों का मुफ्त इलाज, घायलों को ढाई लाख रुपये देने की मांग की है। इसके बाद पूर्व चेयरमैन मनोज धामा पहुंचे और अधिकारियों से आर्थिक मदद देने की मांग की।
500 मीटर तक सुनी गई धमाके की आवाज
लोनी। मुनीर के मकान में जब विस्फोट हुआ तो धमाके की आवाज करीब 500 मीटर तक सुनाई दी। घटनास्थल के करीब 200 मीटर दूर तक धूल का गुबार फैल गया। साथ ही आसपास के मकान हिल गए। लोगों को एक पल लगा जैसे भूकंप आया हो। कुछ देर बाद पता चला कि मकान गिर गया है। इसके बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी और मलबे मे दबे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए।
करीब 30 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक लोग छह लोगों को मलबे से निकाल चुके थे। कुछ और लोगों के अंदर होने की सूचना होने पर पुलिस भी मलबा हटाने में जुट गई। घटना की जानकारी पर एसडीएम संतोष कुमार राय, एसपी देहात डॉ. ईरज राजा, सीओ रजनीश कुमार उपाध्याय, तहसीलदार टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान आसपास के लोगों की भीड़ भी वहां जुट गई। भीड़ की वजह से पुलिस प्रशासन को वहां काम करने में बाधा हो रही थी। ऐसे में पुलिस ने डंडा फटाकर लोगों को वहां से हटाया।
मलबे से मिले पटाखे
रेस्क्यू टीम को मौके से कुछ पटाखे और कागज के रैपर मिले हैं। इनमें बारूद होने की आंशका पर मौके पर डॉग स्क्वाड और फोरेंसिक टीम ने जांच की। एसपी देहात डॉ. ईरज राजा ने बताया कि पटाखों में बारूद नहीं मिला है।
कोड से मालूम कर सकते हैं
सिलिंडर सुरक्षित है या नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। अगर आप एलपीजी सिलिंडर इस्तेमाल करते हैं तो खुद भी जांच कर सकते हैं रसोई में लगा सिलिंडर सुरक्षा मानकों को पूरा कर रहा है या नहीं। सिलिंडर पर लिखे एक कोड से पता चल जाएगा कि उसकी मियाद पूरी हो चुकी है या अभी बाकी है। उसकी टेस्टिंग हो चुकी है या नहीं। गैस कंपनियों के स्टाफ की भूल की वजह से सुरक्षा की कसौटी पर न परखे गए सिलिंडर भी बाजार में आ जाते हैं और यह हादसे की वजह बन सकते हैं। बिना टेस्टिंग किए बाजार में आए सिलिंडर को पहचानकर आप उसे लेने से इनकार भी कर सकते हैं।

ऐसे कर सकते हैं जानकारी
प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर को जब बाजार में पहली बार उतारा जाता है तो उसकी 10 साल की मियाद होती है। उसके ऊपरी हिस्से पर उस साल का एक कोड दर्ज कर दिया जाता है जिस साल में उसकी दोबारा जांच होनी है। मसलन सिलिंडर की जांच जनवरी से मार्च के बीच 2025 में होनी है तो उस पर ए-2025 कोड दर्ज किया जाएगा। अप्रैल से जून 2025 में जांच होनी तय होगी तो उस पर बी-2025 लिखा जाएगा। इसी तरह जुलाई से सितंबर के लिए सी-2025 और अक्तूबर से दिसंबर के लिए डी-2025 दर्ज होगा। भारत पेट्रोलियम गैस कंपनी के क्षेत्रीय मैनेजर सौम्य सोरेन का कहना है कि अगर सिलिंडर पर बीते हुए साल या महीनों की तारीख दर्ज हो तो इसका मतलब है कि उस सिलिंडर की जांच अभी लंबित है। ऐसे सिलिंडर को लेने से उपभोक्ता इनकार कर सकते हैं। वेंडर इसके बदले में उपभोक्ता को दूसरा सिलिंडर उपलब्ध कराएगा।
इन पांच बातों का रखें ध्यान
- गैस चूल्हे को सिलिंडर से कम से कम 6 से 8 इंच ऊपर रखें।
- चूल्हा हमेशा आईएसआई मार्क वाला और रेग्यूलेटर व पाइप गैस एजेंसी से लें।
- काम खत्म करने के बाद पहले रेग्यूलेटर बंद करें फिर चूल्हे की नोब बंद करें।
- प्रत्येक तीन साल बाद गैस पाइप बदल दें।
- गैस लीकेज हो तो इस्तेमाल बंद कर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1906 पर कॉल करें। टीम आपके घर पहुंचेगी।
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