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Ghaziabad News: मुख्य सचिव लेंगे वेव सिटी पर संपत्ति कर का फैसला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 19 Oct 2024 02:55 AM IST
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Chief Secretary will take decision on property tax on Wave City
गाजियाबाद। वेव सिटी की आवासीय और गैर आवासीय संपत्तियों पर संपत्ति कर लगाने की कवायद नगर निगम की तरफ से लगातार की जा रही है। संपत्ति कर मामले में गठित कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है। हालाकि, इस मामले में फैसला अब मुख्य सचिव को लेना है। इस संबंध में हाल में बैठक के दौरान नगर निगम ने प्रभावी तरीके से अपना पक्ष रखा है। वेव सिटी के फिलहाल 11 हजार से ज्यादा भवनों पर कर लगाकर 10 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद नगर निगम को है।
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दरअसल, हाईटेक टाउनशिप वेव सिटी का हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि की वसूली नहीं किए जाने के प्रावधान को समाप्त/संशोधन करने के अनुरोध के मामले में शासन की ओर से समिति सुनवाई कर रही थी। इस समिति में गाजियाबाद और लखनऊ के नगर आयुक्तों के अलावा गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव भी शामिल हैं। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि इस मामले में कोई भी निर्णय मुख्य सचिव के स्तर पर होना है। फैसला नगर निगम के पक्ष में होने की उम्मीद इसलिए भी है, क्योंकि इंदिरापुरम और क्रॉसिंग रिपब्लिक का हस्तांतरण नहीं होने पर भी नगर निगम कर वसूल रहा है। उम्मीद है कि चुनाव बाद निगम को इसकी मंजूरी मिल जाएगी।
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वहीं, हाल में शासन स्तर पर हुई बैठक में वेव सिटी प्रबंधन ने भी अपना पक्ष रखते हुए टाउनशिप का निर्माण पूरा होने तक कर से छूट का प्रावधान जारी रखने की दलील रखी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वेव सिटी का दायरा कफी बड़ा है। इसके पूरी तरह विकसित होने का इंतजार नहीं किया जा सकता। दरअसल, साल 2007 में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने हाईटेक टाउनशिप नीति का निर्धारण करने का शासनादेश जारी किया था। विकासकर्ता कंपनियों को साल 2011 से सात वर्ष की अवधि के लिए हस्तांतरण होने तक स्थानीय निकाय की ओर से जल कर, गृह कर, सीवरेज कर आदि से छूट का प्रावधान किया गया था। साल 2016 में अवधि दस साल तक कर दी गई। इसके बाद साल 2021 में एक बार फिर पांच वर्ष की अवधि बढ़ाने का प्रावधान कर दिया गया। 28 नवंबर 2023 को महापौर सुनीता दयाल ने वेव सिटी का संपत्ति कर जमा न होने और कचरा निस्तारण न होने का मामला नगर विकास मंत्री के समक्ष उठाया था।
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