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Ghaziabad News: ज्ञानस्थली काॅलेज के चेयरमैन गिरफ्तार कोर्ट ने पुलिस ने पूछा, क्यों की गिरफ्तारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jul 2024 02:35 AM IST
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Chairman of Gyansthali College arrested
The court asked the police why the arrest was made
गाजियाबाद/मोदीनगर। अनुसूचित जाति के छात्र को अपशब्द कहने के मामले में पुलिस ने ज्ञानस्थली काॅलेज के चेयरमैन व गाजियाबाद बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव हरिओम शर्मा को शनिवार की सुबह गिरफ्तार तो कर लिया दोपहर को मामला कोर्ट में पहुंचते ही कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति भूषण ने रिमांड अर्जी खारिज करते हुए विवेचना अधिकारी से सात दिन में गिरफ्तारी की वजह बताने के लिए कहा है।
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कोर्ट ने यह स्पष्टीकरण इसलिए मांगा है, क्योंकि हरिओम शर्मा के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य अनिल गौतम की ओर से भोजपुर थाने में 22 जुलाई को दर्ज कराए गए मुकदमे में लगीं धाराओं और अधिनियम में दोष सिद्ध होने पर सात साल से कम सजा का प्रावधान है। कानून के जानकारों का कहना है कि सात साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई बेहद जरूरी होने पर ही की जाती है और ऐसा करने पर अदालत को इसकी वजह बतानी पड़ती है।
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यह केस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत धमकी देने की धारा 352, आईटी एक्ट और एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। आरोप है कि हरिओम शर्मा ने अनुसूचित जाति के छात्र को फोन पर अपशब्द कहे। यह मामला छह मिनट की ऑडियो के वायरल होने के बाद सामने आया था। इस ऑडियो के आधार पर ही केस दर्ज कराया गया था।
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आवाज की जांच नहीं कराई : शनिवार की दोपहर को पुलिस जैसे ही आरोपी को लेकर कोर्ट पहुंची, वहां वकीलों की भीड़ जमा हो गई। हरिओम शर्मा की पैरवी के लिए 20 वकील पहुंचे। आठ ने वकालतनामे लगाए। इनमें पूर्व बार सचिव परविंदर नागर ने कोर्ट में कहा, जो ऑडियाे क्लिप बताई गई है, उसमें हरिओम शर्मा की आवाज की कोई जांच नहीं की गई है। जिस छात्र को पीड़ित बताया गया है, उसने एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। किसी विशेष जाति के वर्ग को अपमानित करने के उद्देश्य से किसी प्रकार का कोई ऑडियो क्लिप वायरल करने का कोई साक्ष्य विवेचना में नहीं है।
कोट
भोजपुर थाने में दर्ज मामले में हरिओम शर्मा की तलाश की जा रही थी। शनिवार की सुबह एक सटीक सूचना पर गाजियाबाद से गिरफ्तारी कर ली गई। इसके बाद आरोपी को कोर्ट के सामने पेश कर दिया गया। - नरेश कुमार, एसीपी मसूरी


कौन सी इमरजेंसी आ गई
थी जो गिरफ्तारी की गई
(कोर्ट का सवाल)
इस केस की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीती भूषण ने केस के विवेचक से पूछा कि जब आरोप सात वर्ष की सजा से कम की धारा में रिपोर्ट दर्ज है, तो ऐसी कौन सी इमरजेंसी आ गई नोटिस देने के दूसरे दिन शनिवार को अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया? ऐसे में अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने का प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार नहीं है। इसलिए विवेचक का प्रस्तुत रिमांड याचना प्रार्थना पत्र इस स्तर पर अस्वीकार किया जाता है। 10 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने के साथ ही आदेश दिया कि हरिओम शर्मा साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेंगे।




मोदीनगर से मेरठ तक हुआ था हंगामा

केस दर्ज होते ही मोदीनगर से लेकर मेरठ में विश्वविद्यालय तक छात्र संगठन और अनुसूचित जाति के लोग हरिओम शर्मा की गिरफ्तारी की मांग लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। कार्रवाई के बारे में अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने भी पुलिस से जवाब तलब किया था। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी थी। विवि की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने शुक्रवार को आयोजित कार्यपरिषद की बैठक में जांच पूरी होने तक हरिओम शर्मा के ज्ञानस्थली और एबीएम कॉलेज में बीएड के प्रवेश न किए जाने के आदेश जारी कर दिए थे।
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