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Bipin Rawat Passed Away: बिपिन रावत का रिसर्च केंद्र बना था हापुड़ का एसएसवी कॉलेज, इनकी गाइडेंस में ली थी पीएचडी की उपाधि
Wed, 08 Dec 2021 09:36 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 08 Dec 2021 09:36 PM IST
सार
तमिलनाडु में कुन्नूर के करीब हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया। इस हादसे में उनकी पत्नी की भी जान चली गई। हेलीकॉप्टर में सवार कुल 14 लोग सवार थे जिनमें से 13 की मौत हो गई।
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फाइल फोटो
- फोटो : ANI
विस्तार
सीडीएस डॉ. बिपिन रावत पीएचडी के सिलसिले में कई बार हापुड़ आए थे। एसएसवी कॉलेज उनका रिसर्च सेंटर बना था, जबकि पीएचडी उन्होंने मेरठ कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. हरवीर शर्मा के सानिध्य में की। डॉ रावत बेहद विनम्र स्वभाव और हंसमुख थे। उनकी मृत्यु से कॉलेज के शिक्षाविदों समेत जनपदवासियों को गहरा आघात पहुंचा है।
उस दौर के लोगों ने बताया कि वर्ष 1994 में डॉ बिपिन रावत ने पीएचडी शुरू की थी, जबकि उपाधि 1996 में मिली। उस समय डॉ रावत आगरा में लेफ्टिनेंट जनरल थे। एसएसवी पीजी कॉलेज के प्रतिरक्षा विभाग में पीएचडी का दौर चरम पर था, लेकिन डॉ रावत की अपने विषय में पकड़ असाधारण थी। रिसर्च के सिलसिले में जब भी वह हापुड़ आते तो कॉलेज के शिक्षाविदों से काफी देर तक विभिन्न मुद्दों पर बात करते। प्रबंध समिति के पदाधिकारियों से भी उनका स्वभाव बेहद हंसमुख था।
डिफेंस विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता ने बताया कि डॉ बिपिन रावत का पंजीकरण भले ही मेरठ कॉलेज से हो, लेकिन उनकी पीएचडी पूर्ण कराने में उनके विभाग के शिक्षकों का काफी सहयोग रहा।
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दाल रोटी था पसंदीदा भोजन
एसएसवी पीजी कॉलेज के एक सेवानिवत्त शिक्षक ने बताया कि डॉ बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को दाल रोटी का भोजन बेहद पसंद था। पीएचडी के सिलसिले में डॉ रावत जब भी हापुड़ आए, तभी प्रोफेसर के घर भोजन करके जाते थे। प्रोफेसर की पत्नी उस क्षण को याद कर भावुक भी हो गईं।
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उस दौर के लोगों ने बताया कि वर्ष 1994 में डॉ बिपिन रावत ने पीएचडी शुरू की थी, जबकि उपाधि 1996 में मिली। उस समय डॉ रावत आगरा में लेफ्टिनेंट जनरल थे। एसएसवी पीजी कॉलेज के प्रतिरक्षा विभाग में पीएचडी का दौर चरम पर था, लेकिन डॉ रावत की अपने विषय में पकड़ असाधारण थी। रिसर्च के सिलसिले में जब भी वह हापुड़ आते तो कॉलेज के शिक्षाविदों से काफी देर तक विभिन्न मुद्दों पर बात करते। प्रबंध समिति के पदाधिकारियों से भी उनका स्वभाव बेहद हंसमुख था।
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डिफेंस विभाग के तत्कालीन प्रवक्ता ने बताया कि डॉ बिपिन रावत का पंजीकरण भले ही मेरठ कॉलेज से हो, लेकिन उनकी पीएचडी पूर्ण कराने में उनके विभाग के शिक्षकों का काफी सहयोग रहा।
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दाल रोटी था पसंदीदा भोजन
एसएसवी पीजी कॉलेज के एक सेवानिवत्त शिक्षक ने बताया कि डॉ बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को दाल रोटी का भोजन बेहद पसंद था। पीएचडी के सिलसिले में डॉ रावत जब भी हापुड़ आए, तभी प्रोफेसर के घर भोजन करके जाते थे। प्रोफेसर की पत्नी उस क्षण को याद कर भावुक भी हो गईं।
बेहद विनम्र स्वभाव के थे डॉ. रावत
डॉ. बिपिन रावत जिस समय पीएचडी कर रहे थे, तब मैं श्री शिक्षा प्रसार समिति का सदस्य था। कई बार डॉ. रावत से मिलना हुआ, बेहद विनम्र स्वभाव के थे। उन्होंने कभी अपने पद का घमंड नहीं किया। उनके निधन से मैं काफी स्तब्ध हूं। - सुरेश चंद संपादक, सचिव एसएसवी कॉलेज।
आज भी देते हैं डॉ. रावत का उदाहरण
डॉ बिपिन रावत का एसएसवी कॉलेज पीएचडी केंद्र रहा है। सैन्य विभाग में नई पीढ़ी का जो भी युवा पीएचडी के लिए आता है आज भी उसे डॉ. रावत के विनम्र स्वभाव, उनकी लगन का उदाहरण दिया जाता है। उनकी मृत्यु से गहरा आघात पहुंचा है। --डॉ. पंकज शर्मा, पूर्व प्रवक्ता सैन्य विज्ञान विभाग, एसएसवी कॉलेज।
कॉलेज प्रबंधन ने दी श्रद्धांजलि
ओएसडी डॉ. बिपिन रावत के निधन पर एसएसवी पीजी कॉलेज के शिक्षकों व प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान प्रबंध समिति के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, सचिव सुरेश चंद्र संपादक, उप सचिव जोनी उर्फ अमित अग्रवाल छावनी वाले, डॉ. रामअवतार त्यागी, डॉ. सुबोध शर्मा, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. सुशील सिद्धू, डॉ. सतीश कुमार आदि रहे।
तमिलनाडु में कुन्नूर के करीब हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया। इस हादसे में उनकी पत्नी की भी जान चली गई। हेलीकॉप्टर में सवार कुल 14 लोग सवार थे जिनमें से 13 की मौत हो गई।
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का चल रहा इलाज
इस हादसे में सिर्फ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही जीवित बचे हैं। उन्हें वेलिंगटन सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हेलीकॉप्टर में कुल 14 लोग सवार थे। विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान Mi-17V5 के पायलट थे जो CDS जनरल बिपिन रावत सहित 14 लोगों के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। वह 109 हेलीकॉप्टर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे।
डॉ. बिपिन रावत जिस समय पीएचडी कर रहे थे, तब मैं श्री शिक्षा प्रसार समिति का सदस्य था। कई बार डॉ. रावत से मिलना हुआ, बेहद विनम्र स्वभाव के थे। उन्होंने कभी अपने पद का घमंड नहीं किया। उनके निधन से मैं काफी स्तब्ध हूं। - सुरेश चंद संपादक, सचिव एसएसवी कॉलेज।
आज भी देते हैं डॉ. रावत का उदाहरण
डॉ बिपिन रावत का एसएसवी कॉलेज पीएचडी केंद्र रहा है। सैन्य विभाग में नई पीढ़ी का जो भी युवा पीएचडी के लिए आता है आज भी उसे डॉ. रावत के विनम्र स्वभाव, उनकी लगन का उदाहरण दिया जाता है। उनकी मृत्यु से गहरा आघात पहुंचा है। --डॉ. पंकज शर्मा, पूर्व प्रवक्ता सैन्य विज्ञान विभाग, एसएसवी कॉलेज।
कॉलेज प्रबंधन ने दी श्रद्धांजलि
ओएसडी डॉ. बिपिन रावत के निधन पर एसएसवी पीजी कॉलेज के शिक्षकों व प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान प्रबंध समिति के अध्यक्ष विजय अग्रवाल, सचिव सुरेश चंद्र संपादक, उप सचिव जोनी उर्फ अमित अग्रवाल छावनी वाले, डॉ. रामअवतार त्यागी, डॉ. सुबोध शर्मा, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. सुशील सिद्धू, डॉ. सतीश कुमार आदि रहे।
तमिलनाडु में कुन्नूर के करीब हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस जनरल बिपिन रावत का निधन हो गया। इस हादसे में उनकी पत्नी की भी जान चली गई। हेलीकॉप्टर में सवार कुल 14 लोग सवार थे जिनमें से 13 की मौत हो गई।
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का चल रहा इलाज
इस हादसे में सिर्फ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ही जीवित बचे हैं। उन्हें वेलिंगटन सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हेलीकॉप्टर में कुल 14 लोग सवार थे। विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान Mi-17V5 के पायलट थे जो CDS जनरल बिपिन रावत सहित 14 लोगों के साथ दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। वह 109 हेलीकॉप्टर यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे।