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Ghaziabad News: बीओआई के लॉ प्रबंधक के घर सीबीआई ने मारा छापा
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गाजियाबाद। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) के लॉ मैनेजर/चीफ मैनेजर दिनेश सिंह के गुलमोहर सोसायटी स्थित आवास पर छापा मारकर जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए। सीबीआई ने दिनेश से लंबी पूछताछ भी की है। सीबीआई ने दिनेश और पैनल एडवोकेट सुप्रिया मिश्रा के खिलाफ अपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। इन पर एक शिकायतकर्ता और नीलामी खरीदार से अनुचित लाभ लेने और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है।
मेरठ निवासी राजीव कुमार ने 20 सितंबर 2024 को एक शिकायत दर्ज कराई थी। राजीव का आरोप है कि उन्होंने और उनके भाई संजीव कुमार (जेएसडी फार्मास्यूटिकल्स के प्रोपराइटर) ने बैंक ऑफ इंडिया, खैर नगर मेरठ से 48 लाख रुपये का ऋण लिया था। यह ऋण खैर नगर मार्केट में स्थित दुकान को गिरवी रखकर लिया गया था। ऋण की अदायगी न होने के कारण बैंक ने वर्ष 2014 में इसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक ने संपत्ति को नीलाम कर दिया। दुकान संख्या 418 और 419 (पुराना नंबर 135 और 154) को मोहम्मद सुहैल और मोहम्मद सैफ ने खरीदा था।
शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि बैंक ऑफ इंडिया के लॉ मैनेजर दिनेश सिंह और पैनल एडवोकेट सुप्रिया मिश्रा ने नीलामी खरीदारों मोहम्मद सुहैल और मोहम्मद सैफ से अनुचित लाभ की मांग की। इतना ही नहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता राजीव कुमार को भी पक्ष में फैसला दिलाने के लिए अनुचित फायदा देने का दबाव बनाया। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपने पक्ष में फैसले के लिए निजी लाभ उठाने की कोशिश की।
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हाईकोर्ट का आदेश और बैंक की मनमानी
जांच में सामने आया कि 29 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि बैंक शेष राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के बाद विवादित दुकान का कब्जा राजीव कुमार को सौंपे। इसके बाद, 5 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि नीलामी खरीदारों को उनकी धनराशि मार्जिनल कास्ट ऑफ फंडस बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) ब्याज सहित वापस करें।
गुप्त जानकारी का लीक होना
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लॉ मैनेजर दिनेश कुमार सिंह ने बैंक के आंतरिक निर्णय की जानकारी मोहम्मद सुहैल को लीक कर दी। उन्होंने सुहैल को सलाह दी कि बैंक पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका और पुनर्विचार याचिका दायर करें। एडवोकेट सुप्रिया मिश्रा ने भी सुहैल को सुझाव दिया कि बैंक को उच्च ब्याज दर पर नीलामी राशि लौटाने के लिए मजबूर करने के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करें। जांच में सामने आया कि दिनेश सिंह ने बैंक अधिकारियों के आंतरिक निर्णय को नीलामी खरीदार सुहैल को बताया कि बैंक, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विचार कर रहा है। जिससे कि मोहम्मद सुहैल और सैफ को एमसीएलआर के बजाए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दर के अनुसार भुगतान किया जाए। सुप्रिया मिश्रा पर आरोप है कि सुहैल को यह जानकारी दी कि दिनेश सिंह ने बैंक को पुनर्विचार याचिका दाखिल न करने की सलाह दी थी, लेकिन बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर भी याचिका दायर करने का निर्णय लिया।
बैंक में बंधक फ्लैट पर कब्जा, दंपती पर मुकदमा
साहिबाबाद। कैन फिन होम्स लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने साहिबाबाद थाना क्षेत्र के लाजपतनगर स्थित सेक्टर चार निवासी अरुण यादव और उनकी पत्नी मधु यादव समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि अरुण ने अपनी पत्नी और बेटा-बेटी के साथ मिलकर निजी बैंक में बंधक फ्लैट पर कब्जा किया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी तहरीर में मुख्य प्रबंधक ने बताया कि लाजपत नगर सेक्टर चार निवासी अरुण के फ्लैट पर निजी बैंक लोन चल रहा था। लोन न चुकाने पर कंपनी ने सरफेसी एक्ट के तहत नौ जनवरी 2025 को फ्लैट कब्जे में ले लिया था। कंपनी की ही तरफ से एक चौकीदार भी फ्लैट पर तैनात किया गया था। आरोप है कि 13 जनवरी को ही अरुण यादव ने पत्नी व बच्चों के साथ कंपनी का ताला तोड़कर फ्लैट पर कब्जा कर लिया और डरा-धमकाकर चौकीदार को भी भगा दिया। कंपनी के पदाधिकारी जब मौके पर पहुंचे तब उनके साथ ही गाली-गलौज की गई। एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने बताया कि कंपनी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मेरठ निवासी राजीव कुमार ने 20 सितंबर 2024 को एक शिकायत दर्ज कराई थी। राजीव का आरोप है कि उन्होंने और उनके भाई संजीव कुमार (जेएसडी फार्मास्यूटिकल्स के प्रोपराइटर) ने बैंक ऑफ इंडिया, खैर नगर मेरठ से 48 लाख रुपये का ऋण लिया था। यह ऋण खैर नगर मार्केट में स्थित दुकान को गिरवी रखकर लिया गया था। ऋण की अदायगी न होने के कारण बैंक ने वर्ष 2014 में इसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक ने संपत्ति को नीलाम कर दिया। दुकान संख्या 418 और 419 (पुराना नंबर 135 और 154) को मोहम्मद सुहैल और मोहम्मद सैफ ने खरीदा था।
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शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि बैंक ऑफ इंडिया के लॉ मैनेजर दिनेश सिंह और पैनल एडवोकेट सुप्रिया मिश्रा ने नीलामी खरीदारों मोहम्मद सुहैल और मोहम्मद सैफ से अनुचित लाभ की मांग की। इतना ही नहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता राजीव कुमार को भी पक्ष में फैसला दिलाने के लिए अनुचित फायदा देने का दबाव बनाया। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और अपने पक्ष में फैसले के लिए निजी लाभ उठाने की कोशिश की।
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हाईकोर्ट का आदेश और बैंक की मनमानी
जांच में सामने आया कि 29 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि बैंक शेष राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के बाद विवादित दुकान का कब्जा राजीव कुमार को सौंपे। इसके बाद, 5 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि नीलामी खरीदारों को उनकी धनराशि मार्जिनल कास्ट ऑफ फंडस बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) ब्याज सहित वापस करें।
गुप्त जानकारी का लीक होना
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि लॉ मैनेजर दिनेश कुमार सिंह ने बैंक के आंतरिक निर्णय की जानकारी मोहम्मद सुहैल को लीक कर दी। उन्होंने सुहैल को सलाह दी कि बैंक पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका और पुनर्विचार याचिका दायर करें। एडवोकेट सुप्रिया मिश्रा ने भी सुहैल को सुझाव दिया कि बैंक को उच्च ब्याज दर पर नीलामी राशि लौटाने के लिए मजबूर करने के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करें। जांच में सामने आया कि दिनेश सिंह ने बैंक अधिकारियों के आंतरिक निर्णय को नीलामी खरीदार सुहैल को बताया कि बैंक, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विचार कर रहा है। जिससे कि मोहम्मद सुहैल और सैफ को एमसीएलआर के बजाए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दर के अनुसार भुगतान किया जाए। सुप्रिया मिश्रा पर आरोप है कि सुहैल को यह जानकारी दी कि दिनेश सिंह ने बैंक को पुनर्विचार याचिका दाखिल न करने की सलाह दी थी, लेकिन बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर भी याचिका दायर करने का निर्णय लिया।
बैंक में बंधक फ्लैट पर कब्जा, दंपती पर मुकदमा
साहिबाबाद। कैन फिन होम्स लिमिटेड के मुख्य प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने साहिबाबाद थाना क्षेत्र के लाजपतनगर स्थित सेक्टर चार निवासी अरुण यादव और उनकी पत्नी मधु यादव समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि अरुण ने अपनी पत्नी और बेटा-बेटी के साथ मिलकर निजी बैंक में बंधक फ्लैट पर कब्जा किया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस को दी तहरीर में मुख्य प्रबंधक ने बताया कि लाजपत नगर सेक्टर चार निवासी अरुण के फ्लैट पर निजी बैंक लोन चल रहा था। लोन न चुकाने पर कंपनी ने सरफेसी एक्ट के तहत नौ जनवरी 2025 को फ्लैट कब्जे में ले लिया था। कंपनी की ही तरफ से एक चौकीदार भी फ्लैट पर तैनात किया गया था। आरोप है कि 13 जनवरी को ही अरुण यादव ने पत्नी व बच्चों के साथ कंपनी का ताला तोड़कर फ्लैट पर कब्जा कर लिया और डरा-धमकाकर चौकीदार को भी भगा दिया। कंपनी के पदाधिकारी जब मौके पर पहुंचे तब उनके साथ ही गाली-गलौज की गई। एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने बताया कि कंपनी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।