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Ghaziabad News: बैंक कर्मचारियों के आठ ठिकाने पर सीबीआई ने मारे छापे
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गाजियाबाद। अलीगढ़ के मडराक क्षेत्र के आर्यावर्त बैंक में छापेमारी कर बैंक के फील्ड ऑफिसर मोहित अग्रवाल व कर्मचारी नरेंद्र पाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब तक आठ स्थानों पर जांच पड़ताल कर चुकी है। सात मार्च को गिरफ्तार कर आठ मार्च को दोनों आरोपियों को गाजियाबाद स्थित विशेष अदालत में पेश किया था। इसके बाद अदालत ने 19 मार्च तक रिमांड पर भेज दिया था। आरोपियों को मंगलवार को सीबीआई अदालत में पेश करेगी।
सीबीआई से मिली जानकारी के अनुसार अलीगढ़ के सिकरना शहबाजपुर निवासी शीलेंद्र कुमार सिंह की शिकायत पर दोनों कर्मचारियों को 18 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए सात मार्च को गिरफ्तार किया था। शीलेंद्र का आरोप था कि उनके पिता और शीलेंद्र के पुराने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के ऋण खाते की बकाया राशि का निस्तारण करने के लिए फील्ड ऑफिसर मोहित अग्रवाल ने रिश्वत मांगी थी।
शीलेंद्र का आरोप था कि फील्ड ऑफिसर ने केसीसी ऋण राशि के बकाए का निपटान करने के लिए शिकायतकर्ता के पिता के नाम पर दो नए केसीसी ऋण खाते खोले और पुराने केसीसी ऋण खाते में 8 लाख रुपये और 1.5 लाख रुपये हस्तांतरित किया। केसीसी ऋण खाते को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया था। कथित तौर पर बैंक अधिकारी ने उस खाते में 10,03,232 रुपये की बकाया राशि गलत तरीके से जोड़ दिया गया था। आरोपी फील्ड ऑफिसर ने कथित लाभ देने के लिए शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, जो बाद में 18 हजार रुपये पर तय हुई थी।
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सीबीआई से मिली जानकारी के अनुसार अलीगढ़ के सिकरना शहबाजपुर निवासी शीलेंद्र कुमार सिंह की शिकायत पर दोनों कर्मचारियों को 18 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए सात मार्च को गिरफ्तार किया था। शीलेंद्र का आरोप था कि उनके पिता और शीलेंद्र के पुराने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के ऋण खाते की बकाया राशि का निस्तारण करने के लिए फील्ड ऑफिसर मोहित अग्रवाल ने रिश्वत मांगी थी।
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शीलेंद्र का आरोप था कि फील्ड ऑफिसर ने केसीसी ऋण राशि के बकाए का निपटान करने के लिए शिकायतकर्ता के पिता के नाम पर दो नए केसीसी ऋण खाते खोले और पुराने केसीसी ऋण खाते में 8 लाख रुपये और 1.5 लाख रुपये हस्तांतरित किया। केसीसी ऋण खाते को गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया था। कथित तौर पर बैंक अधिकारी ने उस खाते में 10,03,232 रुपये की बकाया राशि गलत तरीके से जोड़ दिया गया था। आरोपी फील्ड ऑफिसर ने कथित लाभ देने के लिए शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, जो बाद में 18 हजार रुपये पर तय हुई थी।
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