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Ghaziabad News: मेट्रो के तीसरे फेस के लिए प्राइवेट जमीन खरीदने से बढ़ेगी लागत
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गाजियाबाद। नोएडा सेक्टर-62 से साहिबाबाद तक तीसरे चरण के मेट्रो कॉरिडोर में अलाइनमेंट में 7690 वर्गमीटर जमीन प्राइवेट लोगों की आ रही है। डीएमआरसी की ओर से जीडीए को सौंपी गई डीपीआर में इसका ब्योरा दिया गया है। जीडीए इस प्राइवेट जमीन का अधिग्रहण करेगा तो मेट्रो कॉरिडोर की लागत बढ़ जाएगी। ऐसे में जीडीए के अधिकारी अब इस जमीन को खरीदने की बजाय अन्य विकल्पों की भी तलाश कर रहे हैं।
मेट्रो के तीसरे चरण की डीपीआर चार दिन पहले ही जीडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने शासन को भेजी है। इसमें बताया गया है कि इस कॉरिडोर पर पिलर्स तो सड़क के बीच बन जाएंगे लेकिन स्टेशन और उनके प्रवेश व निकास द्वार बनाने के लिए 7610 वर्गमीटर प्राइवेट जमीन की जरूरत होगी। शक्तिखंड में प्रस्तावित स्टेशन के लिए सबसे ज्यादा करीब 1200 वर्गमीटर प्राइवेट जमीन खरीदनी पड़ेगी। इसके अलावा 19001.20 वर्गमीटर जमीन सरकारी है, हालांकि इसकी लागत नहीं जोड़ी गई है। कॉरिडोर के बीच इंदिरापुरम और वसुंधरा में आने वाली प्राइवेट जमीन खरीदी गई तो मेट्रो की लागत बेहद ज्यादा बढ़ जाएगी।
इन दोनों ही क्षेत्र में जमीन का सर्किल रेट ज्यादा है और भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट से दोगुना रकम का भुगतान करना पड़ेगा। इस जमीन के लिए जीडीए को करीब 100 करोड़ से भी ज्यादा का भुगतान करना पड़ सकता है। मौजूदा स्थिति में मेट्रो के तीसरे चरण के प्रोजेक्ट के लिए 1873 करोड़ रुपये में 40-40 फीसदी की हिस्सेदारी देना ही जीडीए और आवास विकास परिषद के लिए मुश्किल है, ऐसे में जमीन खरीदना और मुश्किल हो जाएगा।
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प्रयास किया जाएगा कि प्राइवेट जमीन की जरूरत कम से कम पड़े। इसके लिए अगर स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार का डिजाइन बदलना पड़े तो इसे बदला जाएगा। डीएमआरसी के अधिकारियों के साथ इसके लिए वार्ता करेंगे।
- मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए
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मेट्रो के तीसरे चरण की डीपीआर चार दिन पहले ही जीडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने शासन को भेजी है। इसमें बताया गया है कि इस कॉरिडोर पर पिलर्स तो सड़क के बीच बन जाएंगे लेकिन स्टेशन और उनके प्रवेश व निकास द्वार बनाने के लिए 7610 वर्गमीटर प्राइवेट जमीन की जरूरत होगी। शक्तिखंड में प्रस्तावित स्टेशन के लिए सबसे ज्यादा करीब 1200 वर्गमीटर प्राइवेट जमीन खरीदनी पड़ेगी। इसके अलावा 19001.20 वर्गमीटर जमीन सरकारी है, हालांकि इसकी लागत नहीं जोड़ी गई है। कॉरिडोर के बीच इंदिरापुरम और वसुंधरा में आने वाली प्राइवेट जमीन खरीदी गई तो मेट्रो की लागत बेहद ज्यादा बढ़ जाएगी।
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इन दोनों ही क्षेत्र में जमीन का सर्किल रेट ज्यादा है और भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट से दोगुना रकम का भुगतान करना पड़ेगा। इस जमीन के लिए जीडीए को करीब 100 करोड़ से भी ज्यादा का भुगतान करना पड़ सकता है। मौजूदा स्थिति में मेट्रो के तीसरे चरण के प्रोजेक्ट के लिए 1873 करोड़ रुपये में 40-40 फीसदी की हिस्सेदारी देना ही जीडीए और आवास विकास परिषद के लिए मुश्किल है, ऐसे में जमीन खरीदना और मुश्किल हो जाएगा।
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प्रयास किया जाएगा कि प्राइवेट जमीन की जरूरत कम से कम पड़े। इसके लिए अगर स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार का डिजाइन बदलना पड़े तो इसे बदला जाएगा। डीएमआरसी के अधिकारियों के साथ इसके लिए वार्ता करेंगे।
- मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए