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Ghaziabad News: वाटर एटीएम से पीने का पानी खरीदना महंगा, दोगुना हुईं दरें

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 13 Aug 2024 03:33 AM IST
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Buying drinking water from water ATM becomes expensive, rates doubled
गाजियाबाद। शहर के लोगों को अब जगह-जगह लगे वाटर एटीएम से अदिक दाम पर पानी लेना पड़ रहा है। निजी वाटर एटीएम संचालकों ने दरों में दोगुना इजाफा कर दिया है। 20 लीटर पानी के लिए पहले पांच रुपये देने पड़ रहे थे जो अब 10 रुपये देने पड़ रहे हैं।
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पीने के पानी की किल्लत का फायदा आरओ प्लांट संचालक उठा रहे हैं। शहर में 400 से ज्यादा आरओ प्लांट हैं। शहरवासियों को पीने के पानी की उपलब्धता के लिए लगभग 20 जगह वाटर एटीएम लगाए गए हैं लेकिन, कई जगह निजी वाटर एटीएम लगाकर पानी बेचा जा रहा है। नंदग्राम ई, आर, डी ब्लॉक सहित आदर्श नगर, संगम विहार आदि कई जगह वाटर एटीएम पर नई दरों के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। ऐसे में लोगों को निजी वाटर एटीएम से पानी लेने के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा वाटर एटीएम नंदग्राम, कैलाभट्ठा और विजयनगर जोन में चल रहे हैं क्योंकि, इन इलाकों में पीने के पानी की उपलब्धता काफी कम है। पानी की दरों में दोगुना इजाफा होने से शहर की बड़ी आबादी पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
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वित्तीय वर्ष 2021-22 में नगर निगम के जलकल विभाग का बजट 52.51 करोड़ रुपये था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रस्तावित बजट बढ़कर करीब 109 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। जल कर से निगम ने 98.73 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जलकल विभाग पर हर साल इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद भी शहर की आधी से ज्यादा आबादी को पीने के पानी के लिए हर महीने करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। 210.39 वर्ग किमी में फैले नगरीय क्षेत्र की आबादी 25 लाख से ज्यादा बताई जाती है। कुल संपत्तियों की संख्या भी बढ़कर 5.50 लाख हो गई है लेकिन, साल दर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी 100 वार्डों के अंतर्गत आने वाली 500 से अधिक कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
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-कई जगह है अवैध प्लांट और एटीएम-
शहर में भूजल निकालकर आरओ प्लांट के जरिए पानी फिल्टर करने की होड़ चल रही है। पिछले दिनों भूजल दोहन कर रहे आरओ प्लांट पर कार्रवाई हुई थी, जिसके कारण प्लांट कुछ समय के लिए बंद हो गए थे लेकिन, अब फिर से इनका संचालन शुरू हो गया है। कई प्लांट ऐसे हैं जिनके पास किसी तरह की अनुमतियां नहीं हैं और न ही वे भारतीय मानक ब्यूरो के दायरे में आते हैं। गाजियाबाद भूजल के मामले में संवेदनशील क्षेत्र है। यहां गली-मोहल्लों में खुलेआम आरओ प्लांट खुले जार और 20-20 लीटर की बोतलों में पानी भरकर बेच रहे हैं।
-शुद्धता की नहीं होती जांच-
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से खाद्य पदार्थों की समय-समय पर जांच कर मिलावट पकड़ी जाती है लेकिन, पेयजल की गुणवत्ता जांचने को लेकर कोई भी गंभीर नहीं है। निजी आरओ प्लांट के पानी की जांच की भी कोई व्यवस्था नहीं है। उपभोक्ता किस प्रकार का पानी पी रहे हैं वो शुद्ध है या नहीं इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिल पाती है।


जिन वाटर एटीएम पर दरें बढ़ाने की बात कही जा रही हैं वो नगर निगम के नहीं हैं। निजी प्लांट संचालकों ने दरें बढ़ाई होंगी। आरओ प्लांट के लिए भी नगर निगम कोई एनओसी जारी नहीं करता है। - केपी आनंद, महाप्रबंधक, जलकल विभाग।
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