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Ghaziabad News: अंतरिक्ष प्रोजेक्ट के खरीदारों को फ्लैट मिलने की उम्मीद जगी, ढाई साल में पूरा करना होगा निर्माण
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गाजियाबाद। एनएच-9 से सटे अंतरिक्ष रियलटेक कंपनी और रक्षा विज्ञान कर्मचारी सहकारी आवास समिति के तीन हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण अब फिर शुरू होगा। रेरा ने बिल्डर को शर्ताें के साथ ढाई साल में तीनों प्रोजेक्ट पूरा कर खरीदारों को फ्लैटों पर कब्जा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही जीडीए का बकाया चुकाने को भी कहा है। इन प्रोजेक्ट के निर्माण की निगरानी रेरा की टीम खुद करेगी। इस आदेश के बाद इन तीनों प्रोजेक्ट के करीब 1600 खरीदारों को फ्लैट मिलने की उम्मीद जगी है।
एनएच-9 पर हिंडन नदी के पास अंतरिक्ष बिल्डर और सहकारी आवास समिति के बीच 2010 में संयुक्त रूप से फ्लैट बनाने का अनुबंध हुआ था। इसमें रक्षा विज्ञान कर्मचारी सहकारी आवास समिति ने 12.5 एकड़ जमीन दी थी और बिल्डर को इस पर निर्माण करना था। इन तीनों प्रोजेक्ट में 37.5 फीसदी अधिकार समिति के पास और 62.5 फीसदी फ्लैटों का अधिकार बिल्डर के पास था। बिल्डर की ओर से अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) के साथ नक्शा पास कराने के लिए जीडीए में आवेदन किया था।
जीडीए ने इसके लिए 26.37 करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद एफएआर पर जीडीए और बिल्डर के बीच विवाद हो गया और जीडीए ने संशोधित नक्शा पास नहीं किया। बिल्डर को इन फ्लैटो पर खरीदारों को 2015 में कब्जा देना था। बिल्डर और जीडीए के विवाद के बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया। इसके बाद बिल्डर ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, कोर्ट ने सुनवाई करने से पहले 15 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया था।
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समय बीत जाने के बावजूद फ्लैट न मिलने से परेशान खरीदारों की एसोसिएशन ने वर्ष 2017 में रेरा में केस दाखिल किया था। करीब एक साल पहले रेरा ने तीनों प्रोजेक्ट के पंजीकरण निरस्त कर दिए थे। इसके बाद बिल्डर, जीडीए और खरीदार एसोसिएशन के बीच बैठकों का दौर चला। बुधवार को यूपी रेरा के सेक्रेटरी इन चार्ज समीर रंजन सिंह ने कई शर्ताें के साथ बिल्डर को प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू कराने की अनुमति दी है। रेरा ने जीडीए में 9.21 करोड़ की बकाया रकम जमा कराने के भी आदेश दिए हैं। तीनों प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करने के लिए ढाई साल की समय अवधि भी तय की गई है।
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एनएच-9 पर हिंडन नदी के पास अंतरिक्ष बिल्डर और सहकारी आवास समिति के बीच 2010 में संयुक्त रूप से फ्लैट बनाने का अनुबंध हुआ था। इसमें रक्षा विज्ञान कर्मचारी सहकारी आवास समिति ने 12.5 एकड़ जमीन दी थी और बिल्डर को इस पर निर्माण करना था। इन तीनों प्रोजेक्ट में 37.5 फीसदी अधिकार समिति के पास और 62.5 फीसदी फ्लैटों का अधिकार बिल्डर के पास था। बिल्डर की ओर से अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) के साथ नक्शा पास कराने के लिए जीडीए में आवेदन किया था।
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जीडीए ने इसके लिए 26.37 करोड़ रुपये की मांग की थी। बाद एफएआर पर जीडीए और बिल्डर के बीच विवाद हो गया और जीडीए ने संशोधित नक्शा पास नहीं किया। बिल्डर को इन फ्लैटो पर खरीदारों को 2015 में कब्जा देना था। बिल्डर और जीडीए के विवाद के बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया। इसके बाद बिल्डर ने कोर्ट में याचिका दाखिल की, कोर्ट ने सुनवाई करने से पहले 15 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया था।
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समय बीत जाने के बावजूद फ्लैट न मिलने से परेशान खरीदारों की एसोसिएशन ने वर्ष 2017 में रेरा में केस दाखिल किया था। करीब एक साल पहले रेरा ने तीनों प्रोजेक्ट के पंजीकरण निरस्त कर दिए थे। इसके बाद बिल्डर, जीडीए और खरीदार एसोसिएशन के बीच बैठकों का दौर चला। बुधवार को यूपी रेरा के सेक्रेटरी इन चार्ज समीर रंजन सिंह ने कई शर्ताें के साथ बिल्डर को प्रोजेक्ट का निर्माण शुरू कराने की अनुमति दी है। रेरा ने जीडीए में 9.21 करोड़ की बकाया रकम जमा कराने के भी आदेश दिए हैं। तीनों प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा करने के लिए ढाई साल की समय अवधि भी तय की गई है।