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Ghaziabad News: दुष्कर्म के झूठे केस में 95 दिन में जेल में रहे कारोबारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2024 03:31 AM IST
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Businessman remained in jail for 95 days in false rape case
इंदिरापुरम। कौशांबी थाने के दुष्कर्म के जिस केस की जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आई है, उसमें कारोबारी को 95 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। पुलिस ने उनके खिलाफ आरोप पत्र तक दाखिल कर दिया। उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली। जेल से बाहर आने पर उन्होंने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। कमिश्नर ने विशेष जांच दल ( एसआईटी) गठित की तो पता चला कि कारोबारी पर दर्ज दुष्कर्म का केस झूठा है।
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कारोबारी ने बताया कि एफआईआर में जिस समय का घटनाक्रम बताया गया, उस दौरान वह थाईलैंड में थे। उन्होंने अपनी बेगुनाही के सुबूत पुलिस को दिए थे लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। जांच अधिकारी मनमानी करते रहे। उस समय अफसरों ने भी नहीं सुनी और उन्हें जेल भेज दिया गया। अगर एसआईटी जांच न होती तो सच सामने नहीं आता।
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उनकी शिकायत पर उन इंस्पेक्टर और दरोगा की भूमिका की जांच कराई गई, जिन्होंने दुष्कर्म के मामले में जांच की थी। इनमें तीन इंस्पेक्टर हैं प्रभात दीक्षित, अनिल यादव और गिरिराज सिंह। दो दरोगा हैं अंकित तरार और रीगल देशवाल। विभागीय जांच में साबित हुआ है कि पांचों ने दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तारी में जल्दबाजी और जांच में लापरवाही की। पांचों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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पांच करोड़ के लिए हनीट्रैप गैंग



ने दर्ज कराया था झूठा मुकदमा



( कारोबारी का दावा )



कारोबारी ने बताया कि दिल्ली की निवासी 27 वर्षीय जिस युवती ने दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराया था, वह हनी ट्रैप गैंग चलाती है। गिरोह में एक युवक भी शामिल है। दोनों ने पांच करोड़ रुपये ऐंठने के लिए झूठा केस दर्ज कराया। युवती उनकी फर्म में नौकरी कर चुकी थी। केस दर्ज कराने के बाद उसने पांच करोड़ रुपये की मांग की। उनसे कहा कि रकम मिल जाने पर केस वापस ले लेगी। उसने यह केस चार फरवरी 2023 को दिल्ली के बुराड़ी थाने में दर्ज कराया था। पुलिस ने बताया कि एफआईआर में कारोबारी पर चार अलग अलग दिन 10 मई, 16 जून, 13 अक्तूबर एवं 13 दिसंबर को दुष्कर्म करने का आरोप था। घटना कौशांबी में बताई गई। इसलिए, दिल्ली पुलिस ने केस कौशांबी थाने को ट्रांसफर कर दिया। 19 मार्च 2023 को कारोबारी को गिरफ्तार किया गया। उन्हें 21 जून 2023 को जमानत मिली।



एसआईटी जांच के बाद



युवती पर दर्ज हुए दो केस



एसआईटी की जांच के बाद युवती के खिलाफ पुलिस ने दो केस दर्ज किए। इनमें से खुफिया कैमरा लगाकर कारोबारी की फर्म से डाटा चोरी करने का था। दूसरा, दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराकर रकम मांगने का। दोनों में युवती के परिजन भी आरोपी बनाए गए। पुलिस ने 19 फरवरी 2024 को कारोबारी को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी। कारोबारी को पुलिस से जांच रिपोर्ट हासिल करने के लिए जन सूचना अधिकार (आरटीआई) का सहारा लेना पड़ा।




रिश्वत लेने की चल रही जांच



कारोबारी ने आरोप लगाया है कि दुष्कर्म के मामले में धाराएं हल्की करने के नाम पर पुलिसकर्मियों ने उनकी पत्नी से 32 लाख रुपये लिए। यह रकम कैश में ली गई। उन्होंने इसकी शिकायत भी अफसरों से की। इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई है। इस पर डीसीपी निमिष पाटिल का कहना है कि दुष्कर्म केस में विवेचना में लापरवाही सामने आई है। रिश्वत लिए जाने के साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसकी जांच अभी चल रही है। जिस महिला ने दुष्कर्म का झूठा केस दर्ज कराया था, जांच के बाद उस पर दो मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।
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