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अंडरपास के लिए गांव वालों ने कब्जाया ट्रैक, एक घंटे तक फंसी रही तेजस एक्सप्रेस
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अंडरपास के लिए गांव वालों ने कब्जाया ट्रैक, एक घंटे तक फंसी रही तेजस एक्सप्रेस
सिकंदराबाद। गांगरौल गांव के पास दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर अंडरपास बनाने की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक कब्जा लिया। ट्रैक पर भीड़ की सूचना पर रेलवे ने अलीगढ़ की ओर से आ रही तेजस एक्सप्रेस ट्रेन को रोक दिया। इससे जिला प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए। एडीएम प्रशासन रविंद्र कुमार, एसपी सिटी,तहसीलदार सिकंदराबाद फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के आश्वासन पर करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों ने ट्रैक छोड़ा, तब कहीं जाकर ट्रेन रवाना हो पाई। इस दौरान यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
रविवार की सुबह करीब 10.15 बजे बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण गांगरौल गांव के किनारे दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर जमा हो गए।अंडरपास बनवाने की मांग उठाते हुए ग्रामीण रेलवे ट्रैक पर ही धरने पर बैठ गए। पहले रेलवे के अधिकारियों ने ग्रामीणों को हटाने का प्रयास किया। ग्रामीणों के ट्रैक से नहीं उठने पर स्टेशन मास्टर ने अलीगढ़ की ओर से आ रही तेजस एक्सप्रेस ट्रेन को करीब 10.30 बजे रूकवा दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने ट्रेन के आगे बैठकर ट्रैक बाधित कर दिया। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश ग्रामीणों की कृषि भूमि रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर है। ट्रैक के दूसरी ओर जाने के लिए चोला रेलवे स्टेशन पर फ्लाईओवर बनाया गया है। वही गांगरौल हाल्ट से पहले ग्राम नगलाबंशी में फाटक बनाया गया है। नगलाबंशी में अंडरपास भी निर्माणाधीन है। चोला रेलवे स्टेशन, नगलाबंशी की दूरी गांव से करीब एक कि.मी. है। दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीण अपने खेतों में कार्य करने के लिए रेलवे ट्रैक को पर कर आते-जाते हैं। रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कई बार ग्रामीण ट्रेन की चपेट में आने के कारण हादसे का शिकार हो चुके हैं। ट्रेनों की चपेट में आने के कारण पिछले कुछ सालों में आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों की मौत हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में गांव के बाहर से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर तीन ट्रैक बने हुए थे। हाल ही में फ्रेट कॉरिडोर के लिए दो और ट्रैक बनाए गए है। जिससे ट्रैक की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। अब खेतों में कार्य करने के लिए आने जाने के लिए ग्रामीणों को पार ट्रैक पार करने होंगे। जिससे अधिक हादसे होने की आशंका है। हादसों की आशंका को लेकर वह भयभीत है। ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वह लंबे समय से गांव के बाहर से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर अंडरपास बनाने की मांग करते चलते आ रहे है। बार-बार मांग और विरोध प्रदर्शन के बाद भी ना तो रेलवे विभाग और ना ही स्थानीय प्रशासन ने उनकी समस्या पर कोई ध्यान दिया। ट्रेन के रोके जाने की सूचना पर तहसीलदार सिकंदराबाद के साथ ककोड़, चोला, सिकंदराबाद पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और धरना दे रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने ठोस आश्वासन मिलने तक ट्रैक से उठने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों के ट्रैक खाली नहीं करने की सूचना पर एडीएम प्रशासन रविन्द्र कुमार, एसपी सिटी सुरेन्द्र नाथ तिवारी मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों के ग्रामीणों की मांग को जिला प्रशासन के माध्यम से रेलवे मंत्रालय को पहुंचाने का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया और ट्रैक छोड़ दिया। उसके बाद करीब 11.30 बजे ट्रेन को रवाना किया गया।
ट्रैक खाली होने के बाद ही गुजरी ट्रेन
ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन के चलते ट्रेन को रोकना पड़ा। इसके लिए ऊपर के अफसरों को सूचना दे दी गई थी। ट्रैक खाली होने के बाद 11.30 बजे ट्रेन को रवाना किया गया।
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सीके मीना, चोला स्टेशन मास्टर
दो सालों में पांच लोगों की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो सालों में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से गांव के कुशल पुत्र अमीचंद, हेमवती पत्नी अरविंद, सचिन पुत्र शीशपाल, कमल पुत्र डालचंद, राजेश की मौत हो चुकी है। यदि पिछले पांच सालों की बात की जाए तो मौतो का आंकड़ा काफी है।
नहीं हुई सुनवाई तो कब्जाया ट्रैक
रेलवे ट्रैक को पार करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से होने वाली ग्रामीणों की मौत को लेकर वह वर्षो से गांव के बाहर अंडरपास बनाए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं। जिसके लिए समय-समय पर उन्होंने प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। इस संबंध में उन्होंने रेलवे मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, केंद्र, प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से कई बार समस्या के बारे में अवगत कराते हुए अंडरपास बनाने की मांग की। मगर आज तक किसी भी स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। समस्या समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है, उनका कहना है कि सुनवाई न होने पर ही वह ट्रैक पर जमा हुए।
समाचार 21एसकेडी01 का शेष भाग
हादसों के बावजूद सुनवाई नहीं
पिछले पांच सालों में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान करीब एक दर्जन ग्रामीणों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वह लंबे समय से रेलवे ट्रैक पर अंडरपास बनवाने की मांग करते चले आ रहे हैं। सुभाष
लाइनपार हैं खेत, कैस जाएं
गांव के अधिकांश लोगों के खेत ट्रैक के दूसरी ओर है। मंदिर, श्मशान भी ट्रैक के दूसरी ओर है। खेतों पर कार्य करने,मंदिर, श्मशान में आने जाने के दौरान ट्रैक पार करते समय ग्रामीण हादसे का शिकार हो जाते हैं। ओमदत्त शर्मा
बस आश्वासन ही मिलता है
अंडरपास बनवाने की मांग को लेकर वह वर्षो से पत्राचार के माध्यम से रेलवे मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, केंद्र, प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन से मांग करते चले आ रहे हैं। मगर आश्वासन के सिवाए उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला। समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है। महेंद्र
लाइनों के साथ खतरा भी बढ़ा
पहले तीन ट्रैक पर तीन लाइनें थी। दो लाइन फ्रेट कॉरिडोर की बनने से लाइनों की संख्या पांच हो गई है। लाइनों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रैक को पार करने के दौरान पूर्व के मुकाबले हादसों की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए अंडरपास अत्यंत आवश्यक है। चंद्रपाल
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सिकंदराबाद। गांगरौल गांव के पास दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर अंडरपास बनाने की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक कब्जा लिया। ट्रैक पर भीड़ की सूचना पर रेलवे ने अलीगढ़ की ओर से आ रही तेजस एक्सप्रेस ट्रेन को रोक दिया। इससे जिला प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए। एडीएम प्रशासन रविंद्र कुमार, एसपी सिटी,तहसीलदार सिकंदराबाद फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के आश्वासन पर करीब एक घंटे बाद ग्रामीणों ने ट्रैक छोड़ा, तब कहीं जाकर ट्रेन रवाना हो पाई। इस दौरान यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
रविवार की सुबह करीब 10.15 बजे बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण गांगरौल गांव के किनारे दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर जमा हो गए।अंडरपास बनवाने की मांग उठाते हुए ग्रामीण रेलवे ट्रैक पर ही धरने पर बैठ गए। पहले रेलवे के अधिकारियों ने ग्रामीणों को हटाने का प्रयास किया। ग्रामीणों के ट्रैक से नहीं उठने पर स्टेशन मास्टर ने अलीगढ़ की ओर से आ रही तेजस एक्सप्रेस ट्रेन को करीब 10.30 बजे रूकवा दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने ट्रेन के आगे बैठकर ट्रैक बाधित कर दिया। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश ग्रामीणों की कृषि भूमि रेलवे ट्रैक के दूसरी ओर है। ट्रैक के दूसरी ओर जाने के लिए चोला रेलवे स्टेशन पर फ्लाईओवर बनाया गया है। वही गांगरौल हाल्ट से पहले ग्राम नगलाबंशी में फाटक बनाया गया है। नगलाबंशी में अंडरपास भी निर्माणाधीन है। चोला रेलवे स्टेशन, नगलाबंशी की दूरी गांव से करीब एक कि.मी. है। दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीण अपने खेतों में कार्य करने के लिए रेलवे ट्रैक को पर कर आते-जाते हैं। रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कई बार ग्रामीण ट्रेन की चपेट में आने के कारण हादसे का शिकार हो चुके हैं। ट्रेनों की चपेट में आने के कारण पिछले कुछ सालों में आधा दर्जन से अधिक ग्रामीणों की मौत हो चुकी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में गांव के बाहर से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर तीन ट्रैक बने हुए थे। हाल ही में फ्रेट कॉरिडोर के लिए दो और ट्रैक बनाए गए है। जिससे ट्रैक की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। अब खेतों में कार्य करने के लिए आने जाने के लिए ग्रामीणों को पार ट्रैक पार करने होंगे। जिससे अधिक हादसे होने की आशंका है। हादसों की आशंका को लेकर वह भयभीत है। ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वह लंबे समय से गांव के बाहर से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर अंडरपास बनाने की मांग करते चलते आ रहे है। बार-बार मांग और विरोध प्रदर्शन के बाद भी ना तो रेलवे विभाग और ना ही स्थानीय प्रशासन ने उनकी समस्या पर कोई ध्यान दिया। ट्रेन के रोके जाने की सूचना पर तहसीलदार सिकंदराबाद के साथ ककोड़, चोला, सिकंदराबाद पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और धरना दे रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन ग्रामीणों ने ठोस आश्वासन मिलने तक ट्रैक से उठने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों के ट्रैक खाली नहीं करने की सूचना पर एडीएम प्रशासन रविन्द्र कुमार, एसपी सिटी सुरेन्द्र नाथ तिवारी मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों के ग्रामीणों की मांग को जिला प्रशासन के माध्यम से रेलवे मंत्रालय को पहुंचाने का आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया और ट्रैक छोड़ दिया। उसके बाद करीब 11.30 बजे ट्रेन को रवाना किया गया।
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ट्रैक खाली होने के बाद ही गुजरी ट्रेन
ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन के चलते ट्रेन को रोकना पड़ा। इसके लिए ऊपर के अफसरों को सूचना दे दी गई थी। ट्रैक खाली होने के बाद 11.30 बजे ट्रेन को रवाना किया गया।
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दो सालों में पांच लोगों की हो चुकी है मौत
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो सालों में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से गांव के कुशल पुत्र अमीचंद, हेमवती पत्नी अरविंद, सचिन पुत्र शीशपाल, कमल पुत्र डालचंद, राजेश की मौत हो चुकी है। यदि पिछले पांच सालों की बात की जाए तो मौतो का आंकड़ा काफी है।
नहीं हुई सुनवाई तो कब्जाया ट्रैक
रेलवे ट्रैक को पार करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से होने वाली ग्रामीणों की मौत को लेकर वह वर्षो से गांव के बाहर अंडरपास बनाए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं। जिसके लिए समय-समय पर उन्होंने प्रदर्शन कर विरोध भी जताया। इस संबंध में उन्होंने रेलवे मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, केंद्र, प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन को पत्राचार के माध्यम से कई बार समस्या के बारे में अवगत कराते हुए अंडरपास बनाने की मांग की। मगर आज तक किसी भी स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। समस्या समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है, उनका कहना है कि सुनवाई न होने पर ही वह ट्रैक पर जमा हुए।
समाचार 21एसकेडी01 का शेष भाग
हादसों के बावजूद सुनवाई नहीं
पिछले पांच सालों में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान करीब एक दर्जन ग्रामीणों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर वह लंबे समय से रेलवे ट्रैक पर अंडरपास बनवाने की मांग करते चले आ रहे हैं। सुभाष
लाइनपार हैं खेत, कैस जाएं
गांव के अधिकांश लोगों के खेत ट्रैक के दूसरी ओर है। मंदिर, श्मशान भी ट्रैक के दूसरी ओर है। खेतों पर कार्य करने,मंदिर, श्मशान में आने जाने के दौरान ट्रैक पार करते समय ग्रामीण हादसे का शिकार हो जाते हैं। ओमदत्त शर्मा
बस आश्वासन ही मिलता है
अंडरपास बनवाने की मांग को लेकर वह वर्षो से पत्राचार के माध्यम से रेलवे मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, केंद्र, प्रदेश सरकार, स्थानीय प्रशासन से मांग करते चले आ रहे हैं। मगर आश्वासन के सिवाए उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला। समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में रोष है। महेंद्र
लाइनों के साथ खतरा भी बढ़ा
पहले तीन ट्रैक पर तीन लाइनें थी। दो लाइन फ्रेट कॉरिडोर की बनने से लाइनों की संख्या पांच हो गई है। लाइनों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रैक को पार करने के दौरान पूर्व के मुकाबले हादसों की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए अंडरपास अत्यंत आवश्यक है। चंद्रपाल