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Ghaziabad News: मुस्लिम बहुल वार्डों में झाड़ू और पतंग का परचम
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गाजियाबाद। मुस्लिम बहुल वार्डों में इस बार झाड़ू और पतंग ने जगह बना ली है। इन इलाकों के मतदाताओं ने बसपा, साइकिल और पंजे को निराश किया है। मतदाता कई दलों में बंटे नजर आए। 100 में से तीन में आम आदमी पार्टी और दो वार्डों में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल पार्टी के प्रत्याशी ने पार्षद का चुनाव जीत लिया है।
प्रेम नगर कैला भट्ठा वार्ड की बात करें तो यहां आठ बूथ हैं। पिछली बार यहां से कांग्रेस के टिकट पर जाकिर सैफी पार्षद बने थे। इस बाद वार्ड का आरक्षण बदलने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी से टिकट लेकर वार्ड 92 से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। वार्ड 95 से उनके भाई की पत्नी रुकसाना सैफी आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ीं और जीत गईं। उन्हें 2021 वोट मिले। इस सीट पर पिछले चुनावों में बसपा, कांग्रेस का कब्जा रहा है। इस बार मुस्लिम मतदाताओं ने पुराने दलों को नकार कर नए दलों को मौका दिया है।
वार्ड 92 से एआईएमआईएम की रूबीना को 1795 मत मिले जबकि सपा की शबनम को 988 वोट ही मिल सके। बूथ नंबर 1182 पर एआईएमआईएम को 135 वोट मिले जबकि भाजपा को इस बूथ पर मात्र तीन वोट मिले हैं। इस बूथ पर 2017 में सबसे अधिक वोट कांग्रेस को मिले थे। वहीं वार्ड नंबर 95 प्रेमनगर कैला में झाड़ू ने सभी दलों को पीछे छोड़ दिया। यहां दूसरे नंबर पर बसपा रही। सपा तीसरे और चौथे पर कांग्रेस रही। कैला प्रेमनगर वार्ड की आबादी करीब 18000 है। रुकसाना सैफी ने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा की नुसरत जहां को हराया। रुकसाना को 2021 और नुसरत को 1118 वोट मिले।
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वार्ड 66 में आप ने चौधरी मुस्तकीम को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के आसिम को हरा दिया। मुस्तकीम को 1537 वोट मिले जबकि आसिम को 1501 वोट मिले। यहां भी बसपा और सपा के वोटरों का ध्रुवीकरण हो गया। बसपा की आपसी खींचतान का फायदा आम आदमी पार्टी को मिला। मुस्लिम मतदाता बंट गए। यहां करीब 10 हजार मतदाता हैं। इस वार्ड से 2107 में सपा प्रत्याशी की जीत हुई थी।
वार्ड 63 पसौंडा से आप प्रत्याशी शहरोज परवीन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीएसपी की परवीन को हरा दिया। शहरोज को 1447 और परवीन को 978 वोट मिले। यहां भी मुस्लिम मतदाता आप का साथ हो लिए। सपा और कांग्रेस हाशिए पर रही। इन सीटों पर पहली बार इन दलों का खाता खुला है। 2017 में शहरोज इसी वार्ड से सपा से पार्षद चुनी गई थीं।
वार्ड नंबर 64 गरिमा गार्डन से एआईएमआईएम की तबस्सुम ने बीजेपी की रूबी डागर को हरा दिया। यह वार्ड भाजपा के पास था। 2017 में तेजपाल राणा भाजपा से पार्षद थे। इस बार भाजपा ने रूबी को उम्मीदवार बनाया था। तबस्सुम को 4207 वोट मिले हैं जबकि रूबी को 2237 वोट मिले हैं।
हाजी जमीर बेग का कहना है कि मुस्लिम समाज में बहुत जागरूकता आ गई है। उन्हें कोई बहका नहीं सकता है। अपने बीच के उम्मीदवारों को चुना गया है।
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प्रेम नगर कैला भट्ठा वार्ड की बात करें तो यहां आठ बूथ हैं। पिछली बार यहां से कांग्रेस के टिकट पर जाकिर सैफी पार्षद बने थे। इस बाद वार्ड का आरक्षण बदलने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी से टिकट लेकर वार्ड 92 से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। वार्ड 95 से उनके भाई की पत्नी रुकसाना सैफी आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ीं और जीत गईं। उन्हें 2021 वोट मिले। इस सीट पर पिछले चुनावों में बसपा, कांग्रेस का कब्जा रहा है। इस बार मुस्लिम मतदाताओं ने पुराने दलों को नकार कर नए दलों को मौका दिया है।
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वार्ड 92 से एआईएमआईएम की रूबीना को 1795 मत मिले जबकि सपा की शबनम को 988 वोट ही मिल सके। बूथ नंबर 1182 पर एआईएमआईएम को 135 वोट मिले जबकि भाजपा को इस बूथ पर मात्र तीन वोट मिले हैं। इस बूथ पर 2017 में सबसे अधिक वोट कांग्रेस को मिले थे। वहीं वार्ड नंबर 95 प्रेमनगर कैला में झाड़ू ने सभी दलों को पीछे छोड़ दिया। यहां दूसरे नंबर पर बसपा रही। सपा तीसरे और चौथे पर कांग्रेस रही। कैला प्रेमनगर वार्ड की आबादी करीब 18000 है। रुकसाना सैफी ने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा की नुसरत जहां को हराया। रुकसाना को 2021 और नुसरत को 1118 वोट मिले।
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वार्ड 66 में आप ने चौधरी मुस्तकीम को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के आसिम को हरा दिया। मुस्तकीम को 1537 वोट मिले जबकि आसिम को 1501 वोट मिले। यहां भी बसपा और सपा के वोटरों का ध्रुवीकरण हो गया। बसपा की आपसी खींचतान का फायदा आम आदमी पार्टी को मिला। मुस्लिम मतदाता बंट गए। यहां करीब 10 हजार मतदाता हैं। इस वार्ड से 2107 में सपा प्रत्याशी की जीत हुई थी।
वार्ड 63 पसौंडा से आप प्रत्याशी शहरोज परवीन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीएसपी की परवीन को हरा दिया। शहरोज को 1447 और परवीन को 978 वोट मिले। यहां भी मुस्लिम मतदाता आप का साथ हो लिए। सपा और कांग्रेस हाशिए पर रही। इन सीटों पर पहली बार इन दलों का खाता खुला है। 2017 में शहरोज इसी वार्ड से सपा से पार्षद चुनी गई थीं।
वार्ड नंबर 64 गरिमा गार्डन से एआईएमआईएम की तबस्सुम ने बीजेपी की रूबी डागर को हरा दिया। यह वार्ड भाजपा के पास था। 2017 में तेजपाल राणा भाजपा से पार्षद थे। इस बार भाजपा ने रूबी को उम्मीदवार बनाया था। तबस्सुम को 4207 वोट मिले हैं जबकि रूबी को 2237 वोट मिले हैं।
हाजी जमीर बेग का कहना है कि मुस्लिम समाज में बहुत जागरूकता आ गई है। उन्हें कोई बहका नहीं सकता है। अपने बीच के उम्मीदवारों को चुना गया है।