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Ghaziabad News: यातायात पुलिसकर्मियों से मारपीट और पिस्टल दिखाने के मामले में तीनों आरोपी बरी
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गाजियाबाद। यातायात पुलिसकर्मियों से मारपीट करने और पिस्टल दिखाकर डराने धमकाने के 21 साल पुराने मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों मोहम्मद इरफान, हामिद और चौधरी मुजाहिद को दोषमुक्त कर दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नेहा बनौधिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार यह घटना 12 नवंबर 2004 की है। अलविदा जुमे की नमाज के दौरान कोतवाली क्षेत्र के चौधरी मोड़ पर पुलिस ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात थी। नमाज के कारण आंबेडकर रोड से सिविल लाइन लालकुआं की ओर जाने वाले मार्ग को अस्थाई रूप से डायवर्ट किया गया था। इसी दौरान एक कार प्रतिबंधित मार्ग की ओर बढ़ने लगी। ड्यूटी पर मौजूद सिपाही जितेंद्र चौहान और श्रीपाल नागर ने कार चालक को लौटने के लिए कहा, लेकिन चालक मोहम्मद इरफान और साथ बैठे हामिद तथा चौधरी मुजाहिद ने गाली गलौज कर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
शोर सुनकर मौके पर सिपाही राकेश कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे। आरोप था कि इस दौरान मुजाहिद ने लाइसेंसी पिस्टल निकालकर खुद को छुड़ाने की कोशिश की और तीनों ने पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी। पुलिस ने तीनों को मौके से पकड़ा और हथियार और कारतूस बरामद कर कोतवाली ले आई। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की गई। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों को ही गवाह बनाया, जबकि कोई स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं कराया और न ही आरोप पत्र में किसी स्वतंत्र गवाह का उल्लेख किया गया। अदालत ने माना कि केवल पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर घटना की पुष्टि नहीं हो सकी और स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव में आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। इसके बाद तीनों आरोपियों को पूर्ण रूप से बरी कर दिया गया।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार यह घटना 12 नवंबर 2004 की है। अलविदा जुमे की नमाज के दौरान कोतवाली क्षेत्र के चौधरी मोड़ पर पुलिस ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात थी। नमाज के कारण आंबेडकर रोड से सिविल लाइन लालकुआं की ओर जाने वाले मार्ग को अस्थाई रूप से डायवर्ट किया गया था। इसी दौरान एक कार प्रतिबंधित मार्ग की ओर बढ़ने लगी। ड्यूटी पर मौजूद सिपाही जितेंद्र चौहान और श्रीपाल नागर ने कार चालक को लौटने के लिए कहा, लेकिन चालक मोहम्मद इरफान और साथ बैठे हामिद तथा चौधरी मुजाहिद ने गाली गलौज कर पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
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शोर सुनकर मौके पर सिपाही राकेश कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी पहुंचे। आरोप था कि इस दौरान मुजाहिद ने लाइसेंसी पिस्टल निकालकर खुद को छुड़ाने की कोशिश की और तीनों ने पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी। पुलिस ने तीनों को मौके से पकड़ा और हथियार और कारतूस बरामद कर कोतवाली ले आई। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की गई। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद तीन पुलिसकर्मियों को ही गवाह बनाया, जबकि कोई स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं कराया और न ही आरोप पत्र में किसी स्वतंत्र गवाह का उल्लेख किया गया। अदालत ने माना कि केवल पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर घटना की पुष्टि नहीं हो सकी और स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव में आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए। इसके बाद तीनों आरोपियों को पूर्ण रूप से बरी कर दिया गया।
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