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नगर निगम में सब गोलमाल है...
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:51 AM IST
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मेयर ने सैंपल लिए तो ठेकेदारों अफसरों में मचा हड़कंप
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। घटिया निर्माण सामग्री की शिकायत पर महापौर अशु वर्मा बुधवार को निगम अफसरों की टीम के साथ खुद कालोनियों में पहुंच गए। तीन कालोनियों में लगाई जा रहीं इंटरलाकिंग टाइल्स के सैंपल लेकर महापौर ने जांच कराई तो गुणवत्ता की पोल खुल गई।
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कंप्रेशन टेस्टिंग मशीन में तीन जगह से ली गई इंटरलॉकिंग टाइल्स रखकर परीक्षण किया गया तो एक टाइल्स आधा भी दबाव न झेल पाई और चकनाचूर हो गई। महापौर के निर्देशों पर निगम के निर्माण विभाग ने फर्म को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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मेयर अशु वर्मा ने बुधवार सुबह निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसएस चौहान, सहायक अभियंता विकास कुरील और सुपरवाइजर जितेंद्र सिंह के साथ तीन वार्डों का निरीक्षण किया।
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उन्होंने वार्ड-11 स्थित मुकुंद नगर के गुरदीप कांप्लेक्स के पास से, वार्ड-19 घूकना में पाल मार्केट के पास से और वार्ड-56 सेवा नगर में पार्षद आवास के पास बिछाई जा रही इंटरलॉकिंग टाइल्स के सैंपल लिए।
अफसरों की मौजूदगी में इन सैंपल को नगर निगम की लैब में कंप्रेशन टेस्टिंग मशीन पर परखा गया। इनमें से वार्ड-11 में लगाई जा रही इंटरलॉकिंग टाइल्स महज 475 किलो टन के दबाव पर ही चकनाचूर हो गई। जबकि मानक के मुताबिक 700 किलो टन दबाव तक टाइल्स नहीं टूटनी चाहिए।
इसका सैंपल गुणवत्ता की परीक्षा में फेल पाया गया। हालांकि बाकी दो टाइल्स 900 किलो टन तक दबाव झेल गई और उनका सैंपल पास रहा। मुकुंद नगर में राजेश कंस्ट्रक्शंस नाम की फर्म 11 लाख की लागत से इंटरलॉकिंग टाइल्स लगा रही है।
बिन टेंडर फर्जी फर्म को दिया था बिजली उपकरण आपूर्ति ठेका
गाजियाबाद। नगर निगम के प्रकाश विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर एक फर्जी फर्म को बिजली उपकरण का ठेका दे दिया। ‘अविश इंटरप्राइजेज’ नाम की इस फर्म का न तो टिन नंबर था और न ही यह निगम में रजिस्टर्ड थी।
बावजूद इसके इस फर्म पर इतनी मेहरबानी की गई कि 1.26 करोड़ की आपूर्ति का काम दे दिया गया। पूर्व में कांग्रेस के एक पार्षद ने इस घपले को उजागर किया था, लेकिन अब इस मामले की जांच कर रही समिति की ओर से मांगी गई जानकारी के जवाब में अधिकारियों ने अघोषित रूप से मान लिया कि फर्म को ठेका देने में नियमों को ताक पर रखा गया।
नगर निगम अधिकारियों की ओर से जांच समिति को 10 प्वाइंट पर भेजी गई सूचना के मुताबिक वर्ष 2013 में पथ प्रकाश विभाग में विद्युत सामग्री खरीदने के लिए टेंडर जारी किए गए, लेकिन इस फर्म ने उसमें भाग नहीं लिया था।
जिस कंपनी के उपकरण सप्लाई किए गए उसकी ओर से इस फर्म को अधिकृत पत्र भी नहीं जारी किया गया था। ‘अविश इंटरप्राइजेज’ नाम की इस फर्म के पास टिन नंबर भी नहीं था। फर्म की ओर से दस्तावेजों में दिए गए पते पर जब पत्राचार किया गया तो यह एड्रेस भी फर्जी निकला।
ऑडिटोरियम का निर्माण बीच में छोड़ ‘भागी’ फर्म
गाजियाबाद (ब्यूरो)। नगर निगम के पहले ऑडिटोरियम (दीनदयाल सभागार) का निर्माण बीच में छोड़कर कंस्ट्रक्शन फर्म ने काम बंद कर दिया। फर्म निर्माण स्थल से 95 फीसदी सामान भी उठा ले गई। बावजूद इसके निगम ने फर्म को करीब 9.5 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया।
भाजपा पार्षद मुकेश त्यागी ने बुधवार को महापौर अशु वर्मा, मंडलायुक्त, डीएम और नगर आयुक्त को पत्र भेजकर संबंधित ठेकेदार की जमानत राशि जब्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि जनवरी 2013 में नेहरू नगर में ऑडिटोरियम बनाने के लिए पीएमएस बिल्ड टेक नाम की फर्म को वर्क आर्डर दिया गया था। 22.93 करोड़ की लागत से बनने वाले इस ऑडिटोरियम का निर्माण एक साल में पूरा किया जाना था। फर्म निर्माण अधूरा छोड़ गई है और 95 फीसदी सामान भी हटा लिया है।