माई सिटी रिपोर्टर ग़ाज़ियाबाद। अक्षय तृतीया पर्व का विशेष महत्व है। इस मुहूर्त को बेहद शुभ माना जाता है। किसी भी नए काम की शुरुआत से लेकर महत्वपूर्ण चीजों की खरीदारी व शादी विवाह जैसे काम भी इस दिन बिना किसी शंका के किए जाते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार कोरोना वायरस संक्रमण और लॉक डाउन के चलते यह पर्व लोगों को घरों में ही मनाना होगा। अक्षय तृतीया को अबुझ साया भी माना जाता है इस दिन बिना किसी मुहूर्त के दिखाए शादी- विवाह जैसे शुभ कार्य सम्पन्न किये जाते हैं। लॉक डाउन की समय सीमा बढ़ने के साथ ही अब अप्रैल की अखय तृतीया की शादियां टलने के साथ ही मई -जून तक कि शादियां टल रही हैं। ------- घर पर ही राह कर करें पूजा-- अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त -सुबह 06:47 से 10:56 तक शुभ- मुहूर्त सुबह 09.04 से 10.42 तक लाभ का चौघड़िया। ------ पितरों का कर सकते हैं तर्पण पुराणों में लिखा है कि अक्षय तृतीया के दिन पितरों का तर्पण तथा पिन्डदान के साथ दान,करना शुभ होता है। इस दिन गंगा स्नान करने से भगवत पूजन से समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस दिन किया गया जप, तप, हवन, और दान भी अक्षय हो जाता है। ये तिथि रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल भी अधिक बढ़ जाता है। ------ अक्षय तृतीया पूजा विधि:- - अक्षय तृतीया के दिन सुबह स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। - इसके बाद श्री विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर अक्षत चढ़ाना चाहिए। - भगवान को तुलसी दल, धूप-अगरबत्ती और चंदन इत्यादि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। - नैवेद्य के रूप में जौ, गेंहूं या सत्तू, ककड़ी, चने की दाल आदि चढ़ा सकते हैं। - इसके बाद पूरे विधि -विधान से पूजा करें। - अक्षय तृतीया के दिन दान करने का महत्व है। लॉक डाउन के दौरान किसी गरीब के लिए खाना बनाकर घर से ही दान करेे।