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Ghaziabad News: विजन इंडिया शिखर सम्मेलन में किसानों और ग्रामीण भारत के समाधान पर मंथन, अखिलेश ने कही ये बात

Sat, 25 Apr 2026 04:18 PM IST
Rahul Kumar Tiwari माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Sat, 25 Apr 2026 04:18 PM IST
सार

गाजियाबाद में विजन इंडिया शिखर सम्मेलन में किसानों और ग्रामीण समस्याओं पर चर्चा हुई। अखिलेश यादव वर्चुअल जुड़े और किसान आयोग गठन, गन्ना भुगतान और बिजली मुद्दों पर बात रखी। ग्रामीण विकास, एआई उपयोग और पलायन रोकने पर भी जोर दिया गया।
 

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Akhilesh Yadav joins Vision India Summit in Ghaziabad through virtual medium
विजन इंडिया प्लान डेवलप एसेंट शिखर सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद में विजन इंडिया प्लान डेवलप एसेंट शिखर सम्मेलन में किसानों और ग्रामीण भारत की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सके, जिससे उपस्थित किसानों और नेताओं में कुछ निराशा देखी गई। हालांकि उन्होंने लखनऊ से वर्चुअल माध्यम से जुड़कर किसानों को संबोधित किया और उनकी समस्याओं पर विस्तार से बात की।

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अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने किसानों के उत्थान के लिए किसान आयोग गठन की बात कही। उन्होंने कहा कि आयोग के माध्यम से किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर उन्होंने कहा कि पर्ची कटने के बाद तौल होते ही सीधे किसानों के खाते में भुगतान किया जाएगा। साथ ही घाटे की खेती से किसानों को बाहर निकालने के लिए ठोस कदम उठाने पर जोर दिया गया।
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उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर किसानों और आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उनका आरोप था कि बिजली उत्पादन बढ़ाने के बजाय उपभोक्ताओं से वसूली की जा रही है, जबकि पूर्व की समाजवादी सरकार ने बिजली उत्पादन के लिए कई नए संयंत्र स्थापित किए थे। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को मुफ्त बिजली देने के वादे पूरे नहीं किए गए।
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अखिलेश यादव ने किसानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं होना चाहिए। किसानों की सामाजिक गरिमा, मानसिक मजबूती और शारीरिक क्षमता पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बढ़ती कठिनाइयों के कारण किसान खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस कर रहा है।

उन्होंने ग्रामीण पलायन के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला और कहा कि बेहतर जीवन की तलाश में शहरों की ओर जाने वाले किसानों को वहां भी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है और खेती से जुड़ाव कमजोर पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसान का बेटा खेती से दूर क्यों हो रहा है और इसका मुख्य कारण कम आय और बढ़ती चुनौतियां बताईं।

ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि गांवों में रोजगार और आधारभूत ढांचा मजबूत किया जाए तो पलायन को रोका जा सकता है। स्थानीय स्तर पर कच्चे माल को तैयार उत्पादों में बदलने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों की आय में सुधार होगा। सम्मेलन में हांगकांग के उद्यमी बृजेंद्र यादव ने कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के माध्यम से किसानों को सही जानकारी और दीर्घकालिक योजना बनाने में मदद मिल सकती है।


कार्यक्रम का समन्वय राजीव राय ने किया, जबकि आयोजन का संयोजन अभिषेक मिश्रा ने संभाला। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन ग्रामीण भारत के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम में सुधीर पंवार ने सत्र का संचालन किया। इस दौरान हरेंद्र सिंह मलिक और इकरा हसन भी उपस्थित रहीं। मुख्य सत्र में आलोक रंजन ने भी अपने विचार रखे।

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