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Ghaziabad News: सत्ता से हटने के बाद जिले में सिमटने लगा सपा का कुनबा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2024 07:14 AM IST
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After leaving power, SP clan started shrinking in the district
आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। प्रदेश में सत्ता से बेदखल होने के बाद समाजवादी का कुनबा भी धीरे-धीरे कम होने लगा है। पार्टी से चुनाव लड़ चुके कई प्रत्याशी और सत्ता में कैबिनेट मंत्री तक रह चुके कई कद्दावर नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो चुका है। मौजूदा समय में कई नेता अलग-अलग राजनीतिक दलों का दामन थाम चुके हैं। कई वरिष्ठ नेता पार्टी कार्यालय में बैठकों से दूरी बनाए रखते हैं। पूर्व और मौजूदा पदाधिकारियों के आपसी तालमेल का अभाव भी पार्टी का नुकसान पहुंचा रहा है।

पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रामपाल चौधरी ने हाल ही में साइकिल की सवारी छोड़ रालोद का दामन थाम लिया है। रामपाल चौधरी का कहना है कि पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पार्टी में पुराने नेताओं के मान सम्मान में कमी आई है। उनकी बातों और विचारों को गौर से नहीं सुना जाता। मौजूदा समय में पार्टी के मुखिया कुछ चाटुकारों से घिर गए हैं। नेताजी ने कई बार अखिलेश यादव से कहा था कि चाटुकार और एसी कमरों में बैठकर राजनीति करने वाले नेताओं से दूर रहें और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को तवज्जो दें, नहीं तो पार्टी का बड़ा नुकसान होगा। इसके बावजूद अखिलेश यादव ने नेताजी के बातों पर कोई अमल नहीं किया। जिस मान सम्मान की जरूरत थी, वह राष्ट्रीय लोकदल से मिला है, इसलिए शामिल हुआ हूं।
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अनुभवहीन के हाथ में सौंप दी कमान
चार साल पहले बसपा छोड़कर सपा का दामन थामने वाले रजापुर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राकेश यादव ने हाल ही में रालोद की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राकेश का कहना है कि अनुभवहीन के हाथ में जिले की कमान दे दी है, जबकि वरिष्ठ लोगों को कोई तवज्जो नहीं दी जा रही है। जिलाध्यक्ष सिर्फ मुसलमानों को पदाधिकारी बना रहे हैं। यादवों को कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। इस समय पूरी पार्टी कुछ विशेष लोगों के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गई है। पार्टी में धीरे-धीरे गुटबाजी भी बढ़ रही है। जो कार्यकर्ता पार्टी में हैं, उन्हें न तो बुलाया जाता है और ना ही उन्हें कोई महत्व दिया जा रहा है।
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यह संघर्ष का समय है
पार्टी के वरिष्ठ नेता सिकंदर यादव का कहना है कि सत्ता में रहने पर हर कोई सत्ता से जुड़ना चाहता है, तो उस समय नेताओं की संख्या बढ़ जाती है। यह संघर्ष का समय है। सच्चे कार्यकर्ता वही हैं जो विपक्ष में होने के बावजूद पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें समय पर इनाम भी मिलता है।



सभी को दिया जा रहा महत्व
जिलाध्यक्ष फैसल हुसैन का कहना है कि पार्टी में मौजूद सभी कार्यकर्ताओं को बराबर का महत्व दिया जा रहा है। जिसे सहयोग करना चाहिए वह हमारे ऊपर ठीकरा फोड़ रहे हैं। कई बार कार्यक्रम में वरिष्ठों को अपनी सीट पर बैठाते हैं। जो लोग पार्टी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, उन्हें स्वमूल्यांकन करना चाहिए। समाजवादी पार्टी किसी एक की नहीं है, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं की है। जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं वह निजी स्वार्थ से दूसरे दलों का हिस्सा बन रहे हैं।



सपा छोड़कर दूसरे दलों में जाने वाले नेता
नेता पार्टी
राजपाल त्यागी पूर्व कैबिनेट मंत्री - भाजपा
राष्ट्रीय महासचिव रामपाल चौधरी - रालोद
लोकसभा, विधानसभा व मेयर के पूर्व प्रत्याशी सुधन रावत - भाजपा
पूर्व ब्लॉक प्रमुख राकेश यादव - रालोद
पतला निवाड़ी नगर पालिका चेयरमैन अनिल त्यागी - भाजपा
पूर्व कोषाध्यक्ष नरेंद्र कुमार नंदी - भाजपा
छात्रसभा के पूर्व राष्ट्रीय सचिव पुष्पेंद्र चौधरी - दूसरी ज्वाइन नहीं की
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