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Ghaziabad News: दादा की गंभीर बीमारी पता चलने पर 12 वीं के छात्र ने कनपटी पर गोली मारकर दी जान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2024 02:40 AM IST
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After finding out about his grandfather's serious illness, the 12th class student committed suicide by shooting himself on his temple.
मोदीनगर। ग्यासपुर गांव में सोमवार रात बारहवीं के छात्र ने कनपटी पर गोली मारकर अपनी जान दे दी। बताया गया है कि दादा को गंभीर होने का पता चलने पर अवसाद में आए छात्र ने कदम उठाया। सूचना पर मौके पर पहुंची ने छात्र के शव को पोस्टमार्टम के लिए कब्जे लेना चाहा तो विरोध का सामना करना पड़ा।
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ग्यासपुर गांव निवासी किसान अमरीश त्यागी के बड़ बेटे हर्षवर्धन 12 वीं के छात्र थे। बताया कि अमरीश त्यागी के पिता काफी समय से बीमार चल रहे है। सोमवार को हर्षवर्धन अपने दादा को डॉक्टर के पास दिखाने गए थे। बताया गया है कि डॉक्टर ने उनके दादा को कैंसर की बीमारी बता दी। रात में वह अपने दादा को लेकर गांव पहुंचे और चारपाई पर आराम करने के लिए लिटा दिया। इसके बाद हर्षवर्धन कमरे में चले गए और कुछ देर बाद कमरे से गोली चलने की आवाज आई। परिजन कमरे की तरफ दौड़े तो देखा हर्षवर्धन लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़े थे। बताया जा रहा है कि हर्षवर्धन ने कनपटी पर सटाकर गोली मारी है। बेटे को लहूलुहान पड़ा देख मां की चीख निकल गई और बेहोश होकर गिर पड़ी। आत्महत्या की सूचना मिलते ही एसीपी ज्ञानप्रकाश व निवाड़ी पुलिस मय फोर्स मौके पर पहुंचे। पुलिस ने छात्र के शव को कब्जे में लेना चाहा तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। गहमा गहमी के बाद परिजन व ग्रामीणों का कहना था कि अवसाद में आकर छात्र ने आत्महत्या की है। वह शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते। परिजनों ने रात मेें ही छात्र का अंतिम का संस्कार कर दिया।
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एसीपी ज्ञानप्रकाश राय का कहना है कि पारिवारिक कारणों की वजह से छात्र द्वारा आत्महत्या करने की बात सामने आ रही है। पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
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हर्षवर्धन को अपने दादा से था ज्यादा लगाव

ग्रामीणों का कहना है कि अपने दादा से हर्षवर्धन का लगाव ज्यादा था, उनके दादा कई माह से बीमार चल रहे थे। तभी से वह परेशान चल रहे थे और अपने दादा के पास ही रहते थे। सोमवार को दादा को कैंसर घोषित होने के बाद वह अवसाद में आ गए। वह अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे थे। अवसाद में आने के बाद उन्होंने यह कदम उठा लिया।
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