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Ghaziabad News: फर्जीवाड़ा कर 2.88 करोड़ का आईटीसी लेने वाली फर्म पर कार्रवाई
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गाजियाबाद। राज्य कर विभाग की जांच में लकड़ी के फर्नीचर और लेमिनेट्स का कारोबार करने वाली हापुड़ की एक फर्म में बड़े पैमाने पर जीएसटी अनियमितताएं पकड़ी गई हैं। जांच में फर्म द्वारा पश्चिम बंगाल की कई ऐसी फर्मों से 2.88 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने खुलासा हुआ है, जिनका पंजीयन निरस्त हो चुका था या जिनसे खरीद संदिग्ध पाई गई है।
संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि वित्त एवं अन्वेषण रेंज-बी, गाजियाबाद के निर्देश पर 18 सितंबर को हापुड़ के डबासरी रोड, जिंदल नगर स्थित सर्वश्री सुमित्रा वुडक्राफ्ट प्रा.लि. के मुख्य व्यापार स्थल समेत तीन स्थानों पर एक साथ जांच की गई। जांच टीम ने मौके पर उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया। ऑनलाइन डाटा विश्लेषण में फर्म द्वारा पश्चिम बंगाल की कई फर्मों से 2.88 करोड़ रुपये का आईटीसी प्राप्त करना पाया गया। इनमें कुछ फर्मों का पंजीयन अस्तित्वहीन पाए जाने के कारण निरस्त हो चुका था, जबकि कुछ मामलों में फर्जी फर्मों से खरीद दर्शाकर आईटीसी पास किए जाने की आशंका सामने आई।
जांच में फर्म के जीएसटीआर-3बी रिटर्न में जीएसटीआर-2बी की तुलना में 9.12 लाख रुपये अधिक आईटीसी क्लेम किए जाने की भी बात सामने आई। इसके अलावा करीब 10.02 करोड़ रुपये के ई-वे बिल बिना ठोस आधार के निरस्त किए जाने की जानकारी मिली।
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स्टॉक में भी मिली गड़बड़ी
राज्यकर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेट टू राम केश्वर ने बताया कि जांच के दौरान व्यापार स्थल पर उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया गया। लेखा पुस्तकों में दर्ज स्टॉक की तुलना में 22.83 लाख रुपये का माल कम पाया गया। इन विसंगतियों के आधार पर व्यापारी ने 1.13 करोड़ रुपये कर के रूप में जमा कराया है। जांच टीम में संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, विपिन शुक्ला, अखिलेश सिंह, रविकांत समेत राज्य कर अधिकारियों की टीम शामिल रही।
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संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि वित्त एवं अन्वेषण रेंज-बी, गाजियाबाद के निर्देश पर 18 सितंबर को हापुड़ के डबासरी रोड, जिंदल नगर स्थित सर्वश्री सुमित्रा वुडक्राफ्ट प्रा.लि. के मुख्य व्यापार स्थल समेत तीन स्थानों पर एक साथ जांच की गई। जांच टीम ने मौके पर उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया। ऑनलाइन डाटा विश्लेषण में फर्म द्वारा पश्चिम बंगाल की कई फर्मों से 2.88 करोड़ रुपये का आईटीसी प्राप्त करना पाया गया। इनमें कुछ फर्मों का पंजीयन अस्तित्वहीन पाए जाने के कारण निरस्त हो चुका था, जबकि कुछ मामलों में फर्जी फर्मों से खरीद दर्शाकर आईटीसी पास किए जाने की आशंका सामने आई।
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जांच में फर्म के जीएसटीआर-3बी रिटर्न में जीएसटीआर-2बी की तुलना में 9.12 लाख रुपये अधिक आईटीसी क्लेम किए जाने की भी बात सामने आई। इसके अलावा करीब 10.02 करोड़ रुपये के ई-वे बिल बिना ठोस आधार के निरस्त किए जाने की जानकारी मिली।
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स्टॉक में भी मिली गड़बड़ी
राज्यकर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेट टू राम केश्वर ने बताया कि जांच के दौरान व्यापार स्थल पर उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया गया। लेखा पुस्तकों में दर्ज स्टॉक की तुलना में 22.83 लाख रुपये का माल कम पाया गया। इन विसंगतियों के आधार पर व्यापारी ने 1.13 करोड़ रुपये कर के रूप में जमा कराया है। जांच टीम में संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, विपिन शुक्ला, अखिलेश सिंह, रविकांत समेत राज्य कर अधिकारियों की टीम शामिल रही।