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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे : जमीन अधिग्रहण में 26 करोड़ का घोटाला
Updated Sat, 07 Jul 2018 09:16 AM IST
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Eastern Peripheral Expressway
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए रसूलपुर सिकरोड गांव के किसानों को गुमराह कर दलालों ने जमीन खरीदी और अधिग्रहण के वक्त छह से आठ गुना तक का मुआवजा ले लिया। प्रशासन स्तर से कराई गई जांच में अब तक करीब 25 करोड़ के घोटाले की बात सामने आ रही है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण में यह तीसरा घोटाला पकड़ में आया है।
फरवरी में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से शिकायत की गई थी। शिकायत में छह किसानों के नाम बताए थे, जिनकी जमीन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की गई है। शिकायतकर्ता ने लिखा कि इन सभी किसानों से जमीन खरीद धारा-3 डी के बाद दलालों ने बाजार मूल्य पर की और अधिग्रहण के वक्त बाजार मूल्य का हवाला देकर छह से आठ गुना तक का मुआवजा ले लिया।
किसानों को जानकारी नहीं दी गई कि उनकी जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेस-वे के लिए कयिा जाना है। मंडलायुक्त ने शिकायत पर डीएम रितु माहेश्वरी को जांच कराने के निर्देश दिए। 23 फरवरी को डीएम ने मामले की जांच सुनील कुमार सिंह एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को सौंपी, जिन्होंने सभी पक्षों के बयानों व रिकार्ड के आधार पर घोटाले को पकड़ा है।
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मामले में तीन लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से इदरीस और अखलाक के खिलाफ पहले भी एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। तीसरे आरोपी इमरान के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना कविनगर को लिखा है।
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फरवरी में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से शिकायत की गई थी। शिकायत में छह किसानों के नाम बताए थे, जिनकी जमीन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की गई है। शिकायतकर्ता ने लिखा कि इन सभी किसानों से जमीन खरीद धारा-3 डी के बाद दलालों ने बाजार मूल्य पर की और अधिग्रहण के वक्त बाजार मूल्य का हवाला देकर छह से आठ गुना तक का मुआवजा ले लिया।
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किसानों को जानकारी नहीं दी गई कि उनकी जमीन का अधिग्रहण एक्सप्रेस-वे के लिए कयिा जाना है। मंडलायुक्त ने शिकायत पर डीएम रितु माहेश्वरी को जांच कराने के निर्देश दिए। 23 फरवरी को डीएम ने मामले की जांच सुनील कुमार सिंह एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को सौंपी, जिन्होंने सभी पक्षों के बयानों व रिकार्ड के आधार पर घोटाले को पकड़ा है।
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मामले में तीन लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से इदरीस और अखलाक के खिलाफ पहले भी एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। तीसरे आरोपी इमरान के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना कविनगर को लिखा है।