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फैक्ट्री के नाम पर आवंटित भूखंडों पर खड़े मंडप जल्द होंगे ध्वस्त
Updated Mon, 05 Feb 2018 05:32 PM IST
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फैक्ट्री के नाम पर आवंटित भूखंडों पर खड़े मंडप जल्द होंगे ध्वस्त
गाजियाबाद। फैक्ट्री के नाम पर भूखंड लेकर विवाह मंडप खड़े करने के मामले में जिला प्रशासन जल्द बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। प्रशासन ने चार बड़े मंडपों को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। इसको लेकर प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का कहना है कि यूपीएसआईडीसी का पत्र मिलते ही फोर्स मुहैया करा दी जाएगी। पहले चरण में जिन मंडपों को ध्वस्त किया जाना है उन सभी का स्टे तुड़वाया गया है, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कवायद शुरू हो गई है।
कई लोगों ने सरकार से फैक्ट्री लगाने के नाम पर रियायती दरों पर भूखंड लिए और उन पर मंडप खड़े कर दिए गए। गाजियाबाद के साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया, कवि नगर, बुलंदशहर रोड व अन्य इंडस्ट्रियल एरिया की मुख्य सड़कों पर मंडपों की भरमार है। ये सभी मंडप जिस जमीन पर संचालित हैं वो यूपीएसआईडीसी द्वारा फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित की गई थी। इन पर फैक्ट्री तो लगी नहीं, लेकिन मंडप का कारोबार चल निकला। अब आवंटियों के लिए मंडप से बड़ा कोई कारोबार नहीं है। मंडप खड़े हो जाने के पीछे यूपीएसआईडीसी के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जाती है, क्योंकि भूखंड पर मंडप बनाए जाते समय कार्रवाई नहीं गई। उलटे कार्रवाई की स्थिति में इतना वक्त भी आवंटियों को दे दिया गया कि वो कोर्ट चले जाए। साठगांठ का खेल सिर्फ यहीं तक नहीं चला। मामला कोर्ट में गया तो वहां पर भी पुख्ता तरीके से पैरवी नहीं हुई, जिस कारण से भूखंड पर मंडप संचालित करने के मामले से न्यायालय से कोई निर्णय नहीं हो पाया। अब प्रशासन और यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों को पसीना बहाना पड़ रहा है। एडीएम सिटी हिमांशु गौतम का कहना है कि चार मंडपों के स्टे को तुड़वा दिया गया है, जिसके बाद अब सिर्फ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है। यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों से उसकी रिपोर्ट मांगी गई है।
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गाजियाबाद। फैक्ट्री के नाम पर भूखंड लेकर विवाह मंडप खड़े करने के मामले में जिला प्रशासन जल्द बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। प्रशासन ने चार बड़े मंडपों को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। इसको लेकर प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का कहना है कि यूपीएसआईडीसी का पत्र मिलते ही फोर्स मुहैया करा दी जाएगी। पहले चरण में जिन मंडपों को ध्वस्त किया जाना है उन सभी का स्टे तुड़वाया गया है, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कवायद शुरू हो गई है।
कई लोगों ने सरकार से फैक्ट्री लगाने के नाम पर रियायती दरों पर भूखंड लिए और उन पर मंडप खड़े कर दिए गए। गाजियाबाद के साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया, कवि नगर, बुलंदशहर रोड व अन्य इंडस्ट्रियल एरिया की मुख्य सड़कों पर मंडपों की भरमार है। ये सभी मंडप जिस जमीन पर संचालित हैं वो यूपीएसआईडीसी द्वारा फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित की गई थी। इन पर फैक्ट्री तो लगी नहीं, लेकिन मंडप का कारोबार चल निकला। अब आवंटियों के लिए मंडप से बड़ा कोई कारोबार नहीं है। मंडप खड़े हो जाने के पीछे यूपीएसआईडीसी के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जाती है, क्योंकि भूखंड पर मंडप बनाए जाते समय कार्रवाई नहीं गई। उलटे कार्रवाई की स्थिति में इतना वक्त भी आवंटियों को दे दिया गया कि वो कोर्ट चले जाए। साठगांठ का खेल सिर्फ यहीं तक नहीं चला। मामला कोर्ट में गया तो वहां पर भी पुख्ता तरीके से पैरवी नहीं हुई, जिस कारण से भूखंड पर मंडप संचालित करने के मामले से न्यायालय से कोई निर्णय नहीं हो पाया। अब प्रशासन और यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों को पसीना बहाना पड़ रहा है। एडीएम सिटी हिमांशु गौतम का कहना है कि चार मंडपों के स्टे को तुड़वा दिया गया है, जिसके बाद अब सिर्फ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है। यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों से उसकी रिपोर्ट मांगी गई है।
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