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रैपिड ट्रेन की सुविधा दे सकती है जेब को झटका
Updated Tue, 04 Jul 2017 05:43 PM IST
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लोगों की जेब को झटका देगी रैपिड ट्रेन
नई सरकार के गठन के बाद अब दिल्ली के सराय काले खां से लेकर मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन की योजना पर काम तेज हो गया है। 32 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में यूपी सरकार को 4300 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी देनी है।
ऐसे में अफसर फंड जुटाने के लिए हाई स्पीड ट्रेन के कॉरिडोर के आसपास की जमीन पर डेवलपमेंट चार्ज के साथ ही इसकी खरीद-फरोख्त पर दो फीसदी का सेस लगाने की तैयारी में हैं। सोमवार को गाजियाबाद, मेरठ और नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अफसरों के बीच फंडिंग को लेकर मंथन हुआ।
फंड की व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए मेरठ मंडल के कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने गाजियाबाद-मेरठ के अफसरों की कमेटी बनाई है। कमेटी का अध्यक्ष जीडीए वीसी कंचन वर्मा को बनाया गया है।
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टीओडी प्रक्रिया के तहत लगाए जाने वाले डेवलपमेंट चार्ज और सेस से जहां जनता को अपनी जेब ढीली करनी पडे़गी, वहीं प्राधिकरणों को करोड़ों की आय होगी।
सोमवार दोपहर नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) के एमडी राजीव दत्त, जीडीए वीसी कंचन वर्मा, एडीएम फाइनेंस राजेश यादव के साथ ही मेरठ विकास प्राधिकरण, दोनों जिलों के एसआईजी स्टांप और जिला प्रशासन के अफसरों के बीच फंडिंग को लेकर चर्चा हुई।
जीडीए सभागार में करीब एक घंटे तक चली इस बैठक को रैपिड ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फंडिंग को लेकर इस बात पर विचार-विमर्श हुआ कि यूपी अपने हिस्से में आने वाले 4300 करोड़ रुपये किस प्रकार जुटा सकता है।
इसके लिए टीओडी, डेवलपमेंट चार्ज के साथ ही दो फीसदी का सेस लगाए जाने पर भी विचार हुआ। सभी विभागों के अफसर अब अपने-अपने मिनट्स तैयार करने में लगे हैं। इसके बाद फिर से अधिकारी फंड को लेकर चर्चा करेंगे।
रैपिड ट्रेन की डीपीआर तो तैयार कर ली गई है मगर अभी इसे जीडीए को नहीं दिया गया है। सोमवार को अफसरों को उम्मीद थी कि एनसीआरटीसी के अफसर डीपीआर लेकर आएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार दिल्ली में हुई बैठक में भी जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने एनसीआरटीसी से रैपिड ट्रेन परियोजना की डीपीआर मांगी थी।
करीब 90 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण तीन चरणों में पूरा होगा। सराय काले खां, गाजियाबाद-मेरठ हाईस्पीड कॉरिडोर में सबसे पहले साहिबाबाद, पैसेफिक मॉल के पास से परतापुर तक 38 किलोमीटर लंबा रूट तैयार किया जाएगा।
यह हिस्सा जनवरी 2023 तक पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण में साहिबाबाद से सराय काले खां तक का अंडर ग्राउंड रूट जनवरी 2024 तक पूरा हो जाएगा। जुलाई 2024 तक कॉरिडोर के तीसरे और अंतिम चरण में परतापुर से मोदीपुरम मेरठ तक का प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा।
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नई सरकार के गठन के बाद अब दिल्ली के सराय काले खां से लेकर मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन की योजना पर काम तेज हो गया है। 32 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में यूपी सरकार को 4300 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी देनी है।
ऐसे में अफसर फंड जुटाने के लिए हाई स्पीड ट्रेन के कॉरिडोर के आसपास की जमीन पर डेवलपमेंट चार्ज के साथ ही इसकी खरीद-फरोख्त पर दो फीसदी का सेस लगाने की तैयारी में हैं। सोमवार को गाजियाबाद, मेरठ और नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के अफसरों के बीच फंडिंग को लेकर मंथन हुआ।
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फंड की व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए मेरठ मंडल के कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने गाजियाबाद-मेरठ के अफसरों की कमेटी बनाई है। कमेटी का अध्यक्ष जीडीए वीसी कंचन वर्मा को बनाया गया है।
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टीओडी प्रक्रिया के तहत लगाए जाने वाले डेवलपमेंट चार्ज और सेस से जहां जनता को अपनी जेब ढीली करनी पडे़गी, वहीं प्राधिकरणों को करोड़ों की आय होगी।
सोमवार दोपहर नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) के एमडी राजीव दत्त, जीडीए वीसी कंचन वर्मा, एडीएम फाइनेंस राजेश यादव के साथ ही मेरठ विकास प्राधिकरण, दोनों जिलों के एसआईजी स्टांप और जिला प्रशासन के अफसरों के बीच फंडिंग को लेकर चर्चा हुई।
जीडीए सभागार में करीब एक घंटे तक चली इस बैठक को रैपिड ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फंडिंग को लेकर इस बात पर विचार-विमर्श हुआ कि यूपी अपने हिस्से में आने वाले 4300 करोड़ रुपये किस प्रकार जुटा सकता है।
इसके लिए टीओडी, डेवलपमेंट चार्ज के साथ ही दो फीसदी का सेस लगाए जाने पर भी विचार हुआ। सभी विभागों के अफसर अब अपने-अपने मिनट्स तैयार करने में लगे हैं। इसके बाद फिर से अधिकारी फंड को लेकर चर्चा करेंगे।
रैपिड ट्रेन की डीपीआर तो तैयार कर ली गई है मगर अभी इसे जीडीए को नहीं दिया गया है। सोमवार को अफसरों को उम्मीद थी कि एनसीआरटीसी के अफसर डीपीआर लेकर आएंगे, मगर ऐसा नहीं हुआ। पिछली बार दिल्ली में हुई बैठक में भी जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने एनसीआरटीसी से रैपिड ट्रेन परियोजना की डीपीआर मांगी थी।
करीब 90 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण तीन चरणों में पूरा होगा। सराय काले खां, गाजियाबाद-मेरठ हाईस्पीड कॉरिडोर में सबसे पहले साहिबाबाद, पैसेफिक मॉल के पास से परतापुर तक 38 किलोमीटर लंबा रूट तैयार किया जाएगा।
यह हिस्सा जनवरी 2023 तक पूरा हो जाएगा। दूसरे चरण में साहिबाबाद से सराय काले खां तक का अंडर ग्राउंड रूट जनवरी 2024 तक पूरा हो जाएगा। जुलाई 2024 तक कॉरिडोर के तीसरे और अंतिम चरण में परतापुर से मोदीपुरम मेरठ तक का प्रोजेक्ट पूरा किया जाएगा।