{"_id":"643704f4ca4908c91a08624d","slug":"6000-crore-fraud-investigation-can-be-handed-over-to-eow-ghaziabad-news-c-30-1-gbd1006-77920-2023-04-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: ईओडब्ल्यू को सौंपी जा सकती है छह हजार करोड़ की धोखाधड़ी की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: ईओडब्ल्यू को सौंपी जा सकती है छह हजार करोड़ की धोखाधड़ी की जांच
विज्ञापन
शिप्रा मॉल
इंदिरापुरम। कोर्ट के आदेश पर इंदिरापुरम थाने में दर्ज कराए गए छह हजार करोड़ की धोखाधड़ी के मामले की जांच पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपी जा सकती है। पुलिस इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर रही है। आवासीय योजनाओं के लिए कर्ज देने वाली कंपनी इंडिया बुल्स समेत तीन कंपनियों के 18 निदेशकों के खिलाफ दर्ज कराई गई इस एफआईआर में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का बेटा साकेत बहुगुणा भी नामजद है। साकेत फिलहाल भाजपा से विधायक हैं।
पुलिस का कहना है कि एक करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी, जालसाजी और ठगी के मामले ईओडब्ल्यू को ही सौंपे जाते हैं। हालांकि, प्रारंभिक जांच पुलिस ही करती है। 10 अप्रैल को इंदिरापुरम थाने में शिप्रा समूह के प्रतिनिधि अनिल वालिया की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में पुलिस की जांच अब तक आगे नहीं बढ़ी है। फिलहाल पुलिस तहरीर में दिए गए तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसके बाद अनिल वालिया से ही वे दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिनके आधार पर यह केस दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस नोटिस जारी करेगी।
पुलिस ने धोखाधड़ी ( धारा 420), जालसाजी ( धारा 467, 468, 471 ), साजिश रचने ( धारा 120 बी), मारपीट
(धारा 323 ), अपशब्द कहना (धारा 504) और जान से मारने की धमकी देना (धारा 506) के तहत केस दर्ज किया था। तीन दिन में न तो किसी का बयान दर्ज किया गया और न ही किसी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया और न ही विवेचना अधिकारी खुद पड़ताल करने के लिए कहीं गए हैं।
विज्ञापन
मामला रसूखदार लोगों से जुड़ा होने के कारण पुलिस आयुक्त को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विधायक के नामजद होते ही उत्तराखंड पुलिस ने भी गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों से इस बारे में जानकारी मांगी है।
संपत्ति पर कब्जा करने का किया प्रयास
अनिल वालिया का कहना है कि शिप्रा समूह की एनसीआर में कई व्यावसायिक और आवासीय योजनाएं हैं। 2017 में चार प्रोजेक्ट और व्यवसायिक योजना के लिए लोन की जरूरत थी। इसका पता चलने पर इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ने लोन देने के लिए सम्पर्क किया। इंडियाबुल्स ने शिप्रा को 1939 करोड़ रुपये का कर्ज बाजार के सबसे कम रेट पर देने का वादा किया। शर्त रखी कि वह इतना लोन देने के लिए शिप्रा की छह सम्पत्तियों को बंधक रखेगा। शिप्रा ने इन संपत्तियों का बाजार भाव छह हजार करोड़ रुपये बताई। अब आरोप है कि इंडिया बुल्स ने शिप्रा समूह को 1939 करोड़ रुपये की बजाय 1256 करोड़ रुपये दिए। बाकी धनराशि नहीं दी गई। बाद में फर्जीवाड़ा करते हुए समूह को डिफाल्टर दिखाकर संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास तेज कर दिया
इन्हें कराया गया है नामजद
1. समीर गहलोत, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन
2. गगन बंगा, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस के वाइस चेयरमैन एमडी
3. अश्विनी ओम प्रकाश कुमार हुड्डा, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
4. राजीव गांधी, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
5. जितेश मोर, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
6. राकेश भगत, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
7. आशीष जैन, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
8. साकेत बहुगुणा, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
9. रूप कुमार बंसल एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
10. बसंत बंसल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
11. पंकज बंसल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
12. विवेक सिंघल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
13. अनीता ठाकुर, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
14. सुनील कुमार जैन, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
15. मनोज डायरेक्टर
16. रविंद्र सिंह
17. अजय शर्मा
18. रशेष चंद्रकांत शाह, एडलवाइज ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन
नोटिस जारी किए जाएंगे
एसीपी इंदिरापुरम स्वतंत्र कुमार का कहना है कि इस मामले में केस दर्ज कराने वाले अनिल वालिया को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे जाएंगे। उनका अध्ययन करने के बाद नामजद लोगों से दस्तावेज मांगे जाएंगे। दोनों ओर से दस्तावेज की पड़ताल होगी। इसके आधार पर जांच और कार्रवाई आगे बढ़ेगी। मामला बड़ा और एफआईआर में बताई गई धनराशि भी काफी ज्यादा है, इसलिए इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराई जा सकती है।
विज्ञापन
पुलिस का कहना है कि एक करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी, जालसाजी और ठगी के मामले ईओडब्ल्यू को ही सौंपे जाते हैं। हालांकि, प्रारंभिक जांच पुलिस ही करती है। 10 अप्रैल को इंदिरापुरम थाने में शिप्रा समूह के प्रतिनिधि अनिल वालिया की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में पुलिस की जांच अब तक आगे नहीं बढ़ी है। फिलहाल पुलिस तहरीर में दिए गए तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसके बाद अनिल वालिया से ही वे दस्तावेज मांगे जाएंगे, जिनके आधार पर यह केस दर्ज कराया जाएगा। इसके लिए पुलिस नोटिस जारी करेगी।
विज्ञापन
पुलिस ने धोखाधड़ी ( धारा 420), जालसाजी ( धारा 467, 468, 471 ), साजिश रचने ( धारा 120 बी), मारपीट
(धारा 323 ), अपशब्द कहना (धारा 504) और जान से मारने की धमकी देना (धारा 506) के तहत केस दर्ज किया था। तीन दिन में न तो किसी का बयान दर्ज किया गया और न ही किसी को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया और न ही विवेचना अधिकारी खुद पड़ताल करने के लिए कहीं गए हैं।
विज्ञापन
मामला रसूखदार लोगों से जुड़ा होने के कारण पुलिस आयुक्त को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विधायक के नामजद होते ही उत्तराखंड पुलिस ने भी गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों से इस बारे में जानकारी मांगी है।
संपत्ति पर कब्जा करने का किया प्रयास
अनिल वालिया का कहना है कि शिप्रा समूह की एनसीआर में कई व्यावसायिक और आवासीय योजनाएं हैं। 2017 में चार प्रोजेक्ट और व्यवसायिक योजना के लिए लोन की जरूरत थी। इसका पता चलने पर इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी ने लोन देने के लिए सम्पर्क किया। इंडियाबुल्स ने शिप्रा को 1939 करोड़ रुपये का कर्ज बाजार के सबसे कम रेट पर देने का वादा किया। शर्त रखी कि वह इतना लोन देने के लिए शिप्रा की छह सम्पत्तियों को बंधक रखेगा। शिप्रा ने इन संपत्तियों का बाजार भाव छह हजार करोड़ रुपये बताई। अब आरोप है कि इंडिया बुल्स ने शिप्रा समूह को 1939 करोड़ रुपये की बजाय 1256 करोड़ रुपये दिए। बाकी धनराशि नहीं दी गई। बाद में फर्जीवाड़ा करते हुए समूह को डिफाल्टर दिखाकर संपत्ति पर कब्जा करने का प्रयास तेज कर दिया
इन्हें कराया गया है नामजद
1. समीर गहलोत, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन
2. गगन बंगा, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस के वाइस चेयरमैन एमडी
3. अश्विनी ओम प्रकाश कुमार हुड्डा, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
4. राजीव गांधी, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
5. जितेश मोर, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
6. राकेश भगत, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
7. आशीष जैन, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
8. साकेत बहुगुणा, इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग लिमिटेड
9. रूप कुमार बंसल एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
10. बसंत बंसल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
11. पंकज बंसल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
12. विवेक सिंघल, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
13. अनीता ठाकुर, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
14. सुनील कुमार जैन, एमएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
15. मनोज डायरेक्टर
16. रविंद्र सिंह
17. अजय शर्मा
18. रशेष चंद्रकांत शाह, एडलवाइज ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन
नोटिस जारी किए जाएंगे
एसीपी इंदिरापुरम स्वतंत्र कुमार का कहना है कि इस मामले में केस दर्ज कराने वाले अनिल वालिया को नोटिस जारी कर दस्तावेज मांगे जाएंगे। उनका अध्ययन करने के बाद नामजद लोगों से दस्तावेज मांगे जाएंगे। दोनों ओर से दस्तावेज की पड़ताल होगी। इसके आधार पर जांच और कार्रवाई आगे बढ़ेगी। मामला बड़ा और एफआईआर में बताई गई धनराशि भी काफी ज्यादा है, इसलिए इसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा से कराई जा सकती है।