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Ghaziabad News: लोड बढ़ने पर 5,200 बीपीएल उपभोक्ता सब्सिडी योजना से बाहर
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गाजियाबाद। ऊर्जा निगम की ओर से बिजली मीटरों का स्वीकृत लोड बढ़ाए जाने के बाद जिले में बीपीएल श्रेणी के 5,200 उपभोक्ताओं को भी झटका लगा है। लोड बढ़ने से ये उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे से बाहर हो गए हैं। लगातार तीन माह तक अधिक लोड दर्ज होने के बाद इन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाकर दो किलोवाट कर दिया गया है। इसके अलावा करीब 100 उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाकर तीन किलोवाट तक किया गया है।
जिले में नौ हजार से अधिक बिजली उपभोक्ता बीपीएल राशन कार्ड धारक यानी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले हैं। ग्रामीण जोन यानी लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर क्षेत्र में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
इन उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल की वसूली करता है, जबकि प्रति यूनिट 3.75 रुपये का भुगतान राज्य सरकार करती है। इस तरह उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 3.75 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। कनेक्शन देते समय भी इन उपभोक्ताओं से केवल 10 रुपये शुल्क लिया जाता है। हालांकि, 100 यूनिट से अधिक बिजली खपत होने पर इन उपभोक्ताओं को सामान्य दरों पर बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है।
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ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता नरेश भारती ने बताया कि लोड बढ़ाने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। इसके तहत एक वर्ष के दौरान तीन माह के सर्वाधिक लोड का आकलन किया जाता है और उसी के आधार पर लोड बढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। जिन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उन्हें इसकी सूचना भी भेजी गई है।
जिले में 1.37 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ा लोड
शुक्रवार को स्वीकृत लोड बढ़ाने के बाद ऊर्जा निगम ने उपभोक्ताओं को संदेश भेजना शुरू कर दिया है। जिले में 1.37 लाख उपभोक्ता इस दायरे में आए हैं और कुल 1.48 लाख किलोवाट अतिरिक्त लोड जोड़ा गया है। इनमें करीब सवा लाख उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं। अधिकांश उपभोक्ताओं का एक किलोवाट लोड बढ़ाया गया है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार, लोड बढ़ने के साथ इन उपभोक्ताओं पर फिक्स चार्ज का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। इसके तहत उपभोक्ताओं को हर महीने दो करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि फिक्स चार्ज के रूप में चुकानी होगी। घरेलू उपभोक्ताओं पर फिक्स चार्ज 110 रुपये प्रति किलोवाट की दर से लगाया जाता है, जबकि व्यावसायिक व औद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं से अलग-अलग दरों पर शुल्क वसूला जाता है। हालांकि, इस श्रेणी में व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
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जिले में नौ हजार से अधिक बिजली उपभोक्ता बीपीएल राशन कार्ड धारक यानी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले हैं। ग्रामीण जोन यानी लोनी, मोदीनगर और मुरादनगर क्षेत्र में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
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इन उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिल की वसूली करता है, जबकि प्रति यूनिट 3.75 रुपये का भुगतान राज्य सरकार करती है। इस तरह उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 3.75 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। कनेक्शन देते समय भी इन उपभोक्ताओं से केवल 10 रुपये शुल्क लिया जाता है। हालांकि, 100 यूनिट से अधिक बिजली खपत होने पर इन उपभोक्ताओं को सामान्य दरों पर बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है।
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ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता नरेश भारती ने बताया कि लोड बढ़ाने के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है। इसके तहत एक वर्ष के दौरान तीन माह के सर्वाधिक लोड का आकलन किया जाता है और उसी के आधार पर लोड बढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया कंप्यूटरीकृत है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। जिन उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उन्हें इसकी सूचना भी भेजी गई है।
जिले में 1.37 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ा लोड
शुक्रवार को स्वीकृत लोड बढ़ाने के बाद ऊर्जा निगम ने उपभोक्ताओं को संदेश भेजना शुरू कर दिया है। जिले में 1.37 लाख उपभोक्ता इस दायरे में आए हैं और कुल 1.48 लाख किलोवाट अतिरिक्त लोड जोड़ा गया है। इनमें करीब सवा लाख उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं। अधिकांश उपभोक्ताओं का एक किलोवाट लोड बढ़ाया गया है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार, लोड बढ़ने के साथ इन उपभोक्ताओं पर फिक्स चार्ज का अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। इसके तहत उपभोक्ताओं को हर महीने दो करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि फिक्स चार्ज के रूप में चुकानी होगी। घरेलू उपभोक्ताओं पर फिक्स चार्ज 110 रुपये प्रति किलोवाट की दर से लगाया जाता है, जबकि व्यावसायिक व औद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं से अलग-अलग दरों पर शुल्क वसूला जाता है। हालांकि, इस श्रेणी में व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है।