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ट्रांसपोर्ट की हड़ताल, सात हजार ट्रक जाम, करोड़ों का नुकसान-Ghaziabad city
Updated Sun, 22 Jul 2018 05:20 PM IST
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पांच करोड़ का व्यापार प्रभावित, नहीं बनी बात
लोहा, सीमेंट, कोयला, किराना का व्यापार अधिक प्रभावित, सब्जियों पर भी पड़ सकता है असर
अमर उजाला ब्यूरा
गाजियाबाद। ट्रांसपोटरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने से करोड़ों रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है। अकेले गाजियाबाद में पांच करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ। फल, सब्जी की मंडी पर हड़ताल का आंशिक असर देखा जा रहा है, लेकिन औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर खासा असर पड़ा है। खासकर लोहा व सीमेंट से जुड़ा व्यापार व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है। व्यापारियों को मानना है कि अगर हड़ताल जारी रहती है तो जल्द ही सब्जियों व फलों के दामों में खासी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर 20 जुलाई से ट्रांसपोर्र्ट अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं, जिसके चलते जिले में 7 हजार ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। अनुमान है कि प्रत्येक ट्रक से तीन हजार रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। करीब दो दिन में ट्रांसपोर्ट को पांच करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभाव सीमेंट, कोयला और लोहे के व्यापार पर पड़ रहा है। ट्रकों के चक्का जाम से सीमेंट और लोहा नहीं आ रहा है और न ही तैयार माल बाहर भेजा जा रहा है। हड़ताल जारी रही तो इसका असर निर्माण कार्यों पर दिखाई देगा। उधर, किराना व्यापार पर असर दिख रहा है। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए लोगों ने निर्माण की सामग्री ज्यादा खरीदनी शुरू कर दी है, जिससे निर्माण कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए। यही स्थिति सब्जी और फल मंडी की है। अभी तक ट्रकों की हड़ताल का मंडी पर ज्यादा असर दिखाई नहीं दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में दूसरे प्रदेशों से आने वाली सब्जियां महंगी हो सकती हैं।
ये हैं मांग
ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की मांग है कि डीजल की कीमतें कम हों, राष्ट्रीय स्तर पर समान मूल्य निर्धारण हो, डीजल कीमतों में तीन महीने में संशोधन किया जाए। तृतीय पक्ष बीमा प्रीमियम निर्धारण में पारदर्शिता, इस पर जीएसटी की छूट हो। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर टीडीएस समाप्त हो, बसों और पर्यटन वाहनों के लिए नेशनल परमिट मिले। टोल बैरियर मुक्त भारत हो। डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी योजना समाप्त हो, पोर्ट कंजेशन समाप्त होना चाहिए।
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थोक का काम बंद
जिले में ट्रकों की हड़ताल से थोक का काम पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। कुछ वस्तुएं ऐसी हैं, जो ट्रकों के माध्यम से ही सप्लाई हो सकती हैं, लेकिन ट्रकों के न मिलने से काम प्रभावित हो रहा है। व्यापारी इधर उधर से छोटे वाहनों इंतजाम कर रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
सब्जी, फल हो रहे बेकार
ट्रकों के चक्का जाम से गंगा पार, हिमाचल से आने वाली सब्जी बेकार हो रही है। किसान सब्जी को मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन साधन के अभाव में सब्जी और फल नहीं खरीदे जा रहे हैं। थोड़ा बहुत सब्जी फल खरीदे जा रहे हैं और उन्हें छोटे वाहनों से भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
रेल गाड़ी से नहीं उतर रहा सामान
दूसरे राज्यों से रेल गाड़ियों के माध्यम से आना वाले सामान को भी उतारने में दिक्कत आ रही है। माल गाड़ियों से लोहा, सीमेंट व अन्य सामान ट्रकों के माध्यम से भेजा जाता है, लेकिन उसे भेजने में भी दिक्कत आ रही है।
कोट्स
ट्रकों के चक्का जाम से प्रतिदिन ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। व्यापार पर भी फर्क पड़ना शुरू हो गया है। जब तक सरकार मांगे पूरी नहीं करती है। हड़ताल जारी रहेगी।
कमलेश कुमार, अध्यक्ष गाजियाबाद ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन
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महानगर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन की हुई बैठक
गाजियाबाद महानगर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन की बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष मैत्रे ने बताया कि हड़ताल का असर दिखने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। वह ट्रांसपोर्टरों से एडवांस रुपये मांग रहे हैं, क्योंकि उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। वहीं दिल्ली में केंद्र सरकार से हुई वार्ता शनिवार को भी विफल हो गई है। सोमवार तक कोई हल न निकला तब लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। एसोसिएशन से जुड़े सभी ट्रांसपोर्टर एकजुट होकर हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पाठक, विपिन सिंघल, किशोर अग्रवाल, सौरभ मित्तल, विवेक गुप्ता आदि मौजूद रहे
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लोहा, सीमेंट, कोयला, किराना का व्यापार अधिक प्रभावित, सब्जियों पर भी पड़ सकता है असर
अमर उजाला ब्यूरा
गाजियाबाद। ट्रांसपोटरों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रहने से करोड़ों रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है। अकेले गाजियाबाद में पांच करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ। फल, सब्जी की मंडी पर हड़ताल का आंशिक असर देखा जा रहा है, लेकिन औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर खासा असर पड़ा है। खासकर लोहा व सीमेंट से जुड़ा व्यापार व्यापक स्तर पर प्रभावित हुआ है। व्यापारियों को मानना है कि अगर हड़ताल जारी रहती है तो जल्द ही सब्जियों व फलों के दामों में खासी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर 20 जुलाई से ट्रांसपोर्र्ट अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं, जिसके चलते जिले में 7 हजार ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। अनुमान है कि प्रत्येक ट्रक से तीन हजार रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। करीब दो दिन में ट्रांसपोर्ट को पांच करोड़ रुपये से अधिक नुकसान हुआ है। हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभाव सीमेंट, कोयला और लोहे के व्यापार पर पड़ रहा है। ट्रकों के चक्का जाम से सीमेंट और लोहा नहीं आ रहा है और न ही तैयार माल बाहर भेजा जा रहा है। हड़ताल जारी रही तो इसका असर निर्माण कार्यों पर दिखाई देगा। उधर, किराना व्यापार पर असर दिख रहा है। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए लोगों ने निर्माण की सामग्री ज्यादा खरीदनी शुरू कर दी है, जिससे निर्माण कार्यों में किसी तरह की रुकावट न आए। यही स्थिति सब्जी और फल मंडी की है। अभी तक ट्रकों की हड़ताल का मंडी पर ज्यादा असर दिखाई नहीं दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में दूसरे प्रदेशों से आने वाली सब्जियां महंगी हो सकती हैं।
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ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की मांग है कि डीजल की कीमतें कम हों, राष्ट्रीय स्तर पर समान मूल्य निर्धारण हो, डीजल कीमतों में तीन महीने में संशोधन किया जाए। तृतीय पक्ष बीमा प्रीमियम निर्धारण में पारदर्शिता, इस पर जीएसटी की छूट हो। ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर टीडीएस समाप्त हो, बसों और पर्यटन वाहनों के लिए नेशनल परमिट मिले। टोल बैरियर मुक्त भारत हो। डायरेक्ट पोर्ट डिलीवरी योजना समाप्त हो, पोर्ट कंजेशन समाप्त होना चाहिए।
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थोक का काम बंद
जिले में ट्रकों की हड़ताल से थोक का काम पूरी तरह से बंद पड़ा हुआ है। कुछ वस्तुएं ऐसी हैं, जो ट्रकों के माध्यम से ही सप्लाई हो सकती हैं, लेकिन ट्रकों के न मिलने से काम प्रभावित हो रहा है। व्यापारी इधर उधर से छोटे वाहनों इंतजाम कर रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
सब्जी, फल हो रहे बेकार
ट्रकों के चक्का जाम से गंगा पार, हिमाचल से आने वाली सब्जी बेकार हो रही है। किसान सब्जी को मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन साधन के अभाव में सब्जी और फल नहीं खरीदे जा रहे हैं। थोड़ा बहुत सब्जी फल खरीदे जा रहे हैं और उन्हें छोटे वाहनों से भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
रेल गाड़ी से नहीं उतर रहा सामान
दूसरे राज्यों से रेल गाड़ियों के माध्यम से आना वाले सामान को भी उतारने में दिक्कत आ रही है। माल गाड़ियों से लोहा, सीमेंट व अन्य सामान ट्रकों के माध्यम से भेजा जाता है, लेकिन उसे भेजने में भी दिक्कत आ रही है।
कोट्स
ट्रकों के चक्का जाम से प्रतिदिन ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। व्यापार पर भी फर्क पड़ना शुरू हो गया है। जब तक सरकार मांगे पूरी नहीं करती है। हड़ताल जारी रहेगी।
कमलेश कुमार, अध्यक्ष गाजियाबाद ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन
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महानगर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन की हुई बैठक
गाजियाबाद महानगर ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन की बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आशीष मैत्रे ने बताया कि हड़ताल का असर दिखने लगा है। ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। वह ट्रांसपोर्टरों से एडवांस रुपये मांग रहे हैं, क्योंकि उनके सामने कोई विकल्प नहीं है। वहीं दिल्ली में केंद्र सरकार से हुई वार्ता शनिवार को भी विफल हो गई है। सोमवार तक कोई हल न निकला तब लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। एसोसिएशन से जुड़े सभी ट्रांसपोर्टर एकजुट होकर हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय पाठक, विपिन सिंघल, किशोर अग्रवाल, सौरभ मित्तल, विवेक गुप्ता आदि मौजूद रहे
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