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14 साल बाद मधुबन बापूधाम योजना को मिलेगी नई पहचान
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14 साल बाद मधुबन बापूधाम योजना को मिलेगी नई पहचान
गाजियाबाद। किसानों के जमीन संबंधी मामलों का समाधान होने के बाद जीडीए की मधुबन बापूधाम योजना को 14 साल बाद नई पहचान मिलेगी। किसानों को मुआवजा वितरित करने के लिए जीडीए ने जिला प्रशासन को 750 करोड़ दिए हैं। प्रशासन की कवायद जनवरी में अवार्ड घोषित करने के बाद फरवरी में किसानों को मुआवजा वितरित करने की है। ऐसे में मार्च से जीडीए मधुबन बापूधाम योजना का सुनियोजित तरीके से विकास कर सकेगा।
प्राधिकरण की ओर से 2004 में मधुबन बापूधाम योजना को विकसित करने की कवायद शुरू की थी। योजना में सदरपुर, मोरटा, मैनापुर, नंगला पाट और याकूतपुर गांव की जमीन शामिल थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण संबंधी विवाद और कानूनी अड़चनों के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया फरवरी 2019 में पूरी हो सकेगी। आखिरी चरण में किसानों की 281 एकड़ जमीन का मुआवजा वितरित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्राधिकरण की ओर से किसानों को मुआवजा वितरण के लिए अब तक 850 करोड़ दिए गए हैं।
इससे सदरपुर के साथ नंगला पाट और मैनापुर के किसानों को मुआवजे का वितरण होगा। फिर सदरपुर प्रथम और याकूतपुर के किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों की मानें तो जिला प्रशासन जनवरी में अवार्ड घोषित कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया फरवरी में पूरी कर लेगा। फिर योजना की जमीन पर कब्जा मिलने के बाद विधिवत निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
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विभिन्न श्रेणियों के भूखंड होंगे सृजित
मधुबन बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन का मुआवजा वितरित होने साथ ही इन क्षेत्रों में विभिन्न श्रेणियों के अलग-अलग क्षेत्रफल के भूखंड सृजित होंगे। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक इनमें आवासीय व व्यावसायिक के 1.81 वर्ग मीटर, व्यावसायिक में 2.62 वर्ग मीटर, ग्रुप हाउसिंग में 5.66 लाख वर्ग मीटर, स्कूल-कॉलेज में 2.34 वर्ग मीटर, दुकानों के 2228 वर्ग मीटर, पेट्रोल व सीएनजी पंप के 4820 वर्गमीटर, अस्पताल व हेल्थ सेंटर के 78602 वर्ग मीटर, गेस्ट हाउस में 2506 वर्ग मीटर और धार्मिक भूखंड का एरिया 24950 वर्ग मीटर है।
मधुबन बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन का किसानों को मुआवजा वितरण के लिए 750 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बाकी राशि को जल्द प्रशासन को दे दिया जाएगा। प्रशासन अवार्ड के साथ फरवरी माह में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी कर लेगा। - संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए
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गाजियाबाद। किसानों के जमीन संबंधी मामलों का समाधान होने के बाद जीडीए की मधुबन बापूधाम योजना को 14 साल बाद नई पहचान मिलेगी। किसानों को मुआवजा वितरित करने के लिए जीडीए ने जिला प्रशासन को 750 करोड़ दिए हैं। प्रशासन की कवायद जनवरी में अवार्ड घोषित करने के बाद फरवरी में किसानों को मुआवजा वितरित करने की है। ऐसे में मार्च से जीडीए मधुबन बापूधाम योजना का सुनियोजित तरीके से विकास कर सकेगा।
प्राधिकरण की ओर से 2004 में मधुबन बापूधाम योजना को विकसित करने की कवायद शुरू की थी। योजना में सदरपुर, मोरटा, मैनापुर, नंगला पाट और याकूतपुर गांव की जमीन शामिल थी। लेकिन जमीन अधिग्रहण संबंधी विवाद और कानूनी अड़चनों के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया फरवरी 2019 में पूरी हो सकेगी। आखिरी चरण में किसानों की 281 एकड़ जमीन का मुआवजा वितरित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्राधिकरण की ओर से किसानों को मुआवजा वितरण के लिए अब तक 850 करोड़ दिए गए हैं।
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इससे सदरपुर के साथ नंगला पाट और मैनापुर के किसानों को मुआवजे का वितरण होगा। फिर सदरपुर प्रथम और याकूतपुर के किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों की मानें तो जिला प्रशासन जनवरी में अवार्ड घोषित कर मुआवजा वितरण की प्रक्रिया फरवरी में पूरी कर लेगा। फिर योजना की जमीन पर कब्जा मिलने के बाद विधिवत निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।
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विभिन्न श्रेणियों के भूखंड होंगे सृजित
मधुबन बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन का मुआवजा वितरित होने साथ ही इन क्षेत्रों में विभिन्न श्रेणियों के अलग-अलग क्षेत्रफल के भूखंड सृजित होंगे। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक इनमें आवासीय व व्यावसायिक के 1.81 वर्ग मीटर, व्यावसायिक में 2.62 वर्ग मीटर, ग्रुप हाउसिंग में 5.66 लाख वर्ग मीटर, स्कूल-कॉलेज में 2.34 वर्ग मीटर, दुकानों के 2228 वर्ग मीटर, पेट्रोल व सीएनजी पंप के 4820 वर्गमीटर, अस्पताल व हेल्थ सेंटर के 78602 वर्ग मीटर, गेस्ट हाउस में 2506 वर्ग मीटर और धार्मिक भूखंड का एरिया 24950 वर्ग मीटर है।
मधुबन बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन का किसानों को मुआवजा वितरण के लिए 750 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बाकी राशि को जल्द प्रशासन को दे दिया जाएगा। प्रशासन अवार्ड के साथ फरवरी माह में मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी कर लेगा। - संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए