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भुगतान रुका तो 14 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने को तैयार हुई कंपनी
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भुगतान रुका तो 14 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने पर तैयार हुई कंपनी
गाजियाबाद। अनुबंध की शर्तों को ठेंगा दिखाने की वजह से विवादों में आई व्हाइट प्लाकार्ड नाम की कंपनी का नगर निगम बोर्ड ने भुगतान रोका तो कंपनी अब काम करने पर राजी हो गई। कंपनी ने अनुबंध में शामिल बकाया स्ट्रीट लाइटें लगाने, खराब लाइटों का मेंटेनेंस का काम करने के लिए नगर निगम के प्रकाश विभाग को पत्र भेजा है। लाइटों के संबंध में शिकायतों और उनके निस्तारण के लिए कंपनी नगर निगम में कंट्रोल रूम भी बनाएगी। व्हाइट प्लाकार्ड नाम की कंपनी ने नगर निगम सीमा क्षेत्र में 50214 स्ट्रीट लाइटों को बदलकर उनके स्थान पर एलईडी लाइटें लगाने और सात साल तक उनका मेंटेनेंस करने का अनुबंध किया था। इसकी एवज में नगर निगम को नकद भुगतान नहीं करना था। एलईडी लाइटें लगने के बाद बिजली बिल में होने वाली बचत की रकम में से 70 फीसदी हिस्सा कंपनी को और 30 फीसदी नगर निगम को मिलना था। कंपनी ने करीब 37 हजार लाइटें बदलकर काम बीच में छोड़ दिया। कंपनी ने खराब हुई लाइटों की मरम्मत भी नहीं की और भुगतान के लिए अधिकारियों पर दबाव बना दिया। ऊंची पहुंच के चलते निगम अधिकारियों और महापौर ने भी कंपनी के भुगतान की गुपचुप सिफारिश कर दी थी, लेकिन नगर निगम बोर्ड में पार्षदों ने विरोध कर भुगतान पर रोक लगा दी। बोर्ड से रोक लगने पर निगम और शासन ने भी भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए, ऐसे में कंपनी को बैकफुट पर आना पड़ा। कंपनी की ओर से अब नगर निगम के प्रकाश विभाग को पत्र भेजकर काम शुरू करने के लिए कहा गया है।
कोट
व्हाइट प्लाकार्ड की ओर से पत्र भेजकर काम शुरू करने की बात कही गई है। कंपनी को अनुबंध के मुताबिक काम करना होगा। कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि वह अनुबंध के मुताबिक कंट्रोल रूम बनाए। बकाया लाइटें लगाए और खराब लाइटों की रिपेयरिंग कराए। नई लाइटें लगाने से पहले कंपनी स्टोर में सामान जमा कराएगी। - मनोज प्रभात, अधिशासी अभियंता, प्रकाश विभाग
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गाजियाबाद। अनुबंध की शर्तों को ठेंगा दिखाने की वजह से विवादों में आई व्हाइट प्लाकार्ड नाम की कंपनी का नगर निगम बोर्ड ने भुगतान रोका तो कंपनी अब काम करने पर राजी हो गई। कंपनी ने अनुबंध में शामिल बकाया स्ट्रीट लाइटें लगाने, खराब लाइटों का मेंटेनेंस का काम करने के लिए नगर निगम के प्रकाश विभाग को पत्र भेजा है। लाइटों के संबंध में शिकायतों और उनके निस्तारण के लिए कंपनी नगर निगम में कंट्रोल रूम भी बनाएगी। व्हाइट प्लाकार्ड नाम की कंपनी ने नगर निगम सीमा क्षेत्र में 50214 स्ट्रीट लाइटों को बदलकर उनके स्थान पर एलईडी लाइटें लगाने और सात साल तक उनका मेंटेनेंस करने का अनुबंध किया था। इसकी एवज में नगर निगम को नकद भुगतान नहीं करना था। एलईडी लाइटें लगने के बाद बिजली बिल में होने वाली बचत की रकम में से 70 फीसदी हिस्सा कंपनी को और 30 फीसदी नगर निगम को मिलना था। कंपनी ने करीब 37 हजार लाइटें बदलकर काम बीच में छोड़ दिया। कंपनी ने खराब हुई लाइटों की मरम्मत भी नहीं की और भुगतान के लिए अधिकारियों पर दबाव बना दिया। ऊंची पहुंच के चलते निगम अधिकारियों और महापौर ने भी कंपनी के भुगतान की गुपचुप सिफारिश कर दी थी, लेकिन नगर निगम बोर्ड में पार्षदों ने विरोध कर भुगतान पर रोक लगा दी। बोर्ड से रोक लगने पर निगम और शासन ने भी भुगतान करने से हाथ खड़े कर दिए, ऐसे में कंपनी को बैकफुट पर आना पड़ा। कंपनी की ओर से अब नगर निगम के प्रकाश विभाग को पत्र भेजकर काम शुरू करने के लिए कहा गया है।
कोट
व्हाइट प्लाकार्ड की ओर से पत्र भेजकर काम शुरू करने की बात कही गई है। कंपनी को अनुबंध के मुताबिक काम करना होगा। कंपनी को निर्देश दिए गए हैं कि वह अनुबंध के मुताबिक कंट्रोल रूम बनाए। बकाया लाइटें लगाए और खराब लाइटों की रिपेयरिंग कराए। नई लाइटें लगाने से पहले कंपनी स्टोर में सामान जमा कराएगी। - मनोज प्रभात, अधिशासी अभियंता, प्रकाश विभाग
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