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महक मिर्जा और एक अजूबा दे खिले छात्रों के चेहरे
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महक मिर्जा और एक अजूबा देख खिले छात्रों के चेहरे
साहिबाबाद। इंदिरापुरम में अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति की तरफ से सेंट टेरेसा स्कूल के 550 बच्चों को बाल फिल्म दिखाई गई। बच्चों ने एक अजूबा और महक मिर्जा फिल्म का आनंद उठाया।
अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति मिलकर बाल फिल्म महोत्सव के तहत बच्चों को बाल फिल्में दिखा रहा है। इसके तहत ही सोमवार को इंदिरापुरम स्थित सेंट टेरेसा स्कूल में फिल्म दिखाई गई। कक्षा छह के करीब 300 बच्चों ने ‘महक मिर्जा’ फिल्म का लुत्फ उठाया। बच्चों ने महक के किरदार को बहुत ही पसंद किया। बच्चों ने सीखा कि हमें सपने देखने चाहिए। हर बच्चे की अलग प्रतिभा होती है, उसे बस पहचाने की जरूरत है। इसके बाद कक्षा आठ के 250 बच्चों को ‘एक अजूबा’ फिल्म दिखाई गई। फिल्म की कहानी ने अंधविश्वास पर विश्वास नहीं करने की सीख दी। फिल्म में बच्चों को रत्न और चित्रा का किरदार पसंद आया। फिल्म में अमरीश पुरी बच्चों के मन से अंधविश्वास को भगाते हैं। फिल्म संदेश देती है कि अगर बच्चा आत्मविश्वास से भरा हो तो वह कठिन से कठिन राह भी आसानी से पार कर सकता है। स्कूल की एजुकेशन डायरेक्टर रेनू श्रीवास्तव ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति का यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है। बच्चों को इन फिल्मों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
एक अजूबा फिल्म बहुत ही प्रेरणादायक है। इससे सीख मिलती है कि हमें अंधविश्वास में नहीं रहना चाहिए। अपनी मेहनत के जरिए हम कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। - कृष, कक्षा आठ
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फिल्म से बहुत कुछ सीखने को मिला। चित्रा का किरदार बहुत ही अच्छा है। हम मेहनत और विश्वास से जो कुछ भी करेंगे, उसमें अवश्य सफल होंगे। - मानवी, कक्षा आठ
‘महक मिर्जा’ से सीख मिलती है कि हमें सपने देखने चाहिए। अपनी प्रतिभा को पहचानकर हम उन सपनों को सच कर सकते हैं। - देवश्री, कक्षा छह
जिंदगी में सपने देखना जरूरी है। वह हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कभी भी दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए। अपनी प्रतिभा को पहचान लिया जाए तो हम ऊंचाइयों को छू सकते हैं। - नंदिता, कक्षा छह
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साहिबाबाद। इंदिरापुरम में अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति की तरफ से सेंट टेरेसा स्कूल के 550 बच्चों को बाल फिल्म दिखाई गई। बच्चों ने एक अजूबा और महक मिर्जा फिल्म का आनंद उठाया।
अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति मिलकर बाल फिल्म महोत्सव के तहत बच्चों को बाल फिल्में दिखा रहा है। इसके तहत ही सोमवार को इंदिरापुरम स्थित सेंट टेरेसा स्कूल में फिल्म दिखाई गई। कक्षा छह के करीब 300 बच्चों ने ‘महक मिर्जा’ फिल्म का लुत्फ उठाया। बच्चों ने महक के किरदार को बहुत ही पसंद किया। बच्चों ने सीखा कि हमें सपने देखने चाहिए। हर बच्चे की अलग प्रतिभा होती है, उसे बस पहचाने की जरूरत है। इसके बाद कक्षा आठ के 250 बच्चों को ‘एक अजूबा’ फिल्म दिखाई गई। फिल्म की कहानी ने अंधविश्वास पर विश्वास नहीं करने की सीख दी। फिल्म में बच्चों को रत्न और चित्रा का किरदार पसंद आया। फिल्म में अमरीश पुरी बच्चों के मन से अंधविश्वास को भगाते हैं। फिल्म संदेश देती है कि अगर बच्चा आत्मविश्वास से भरा हो तो वह कठिन से कठिन राह भी आसानी से पार कर सकता है। स्कूल की एजुकेशन डायरेक्टर रेनू श्रीवास्तव ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति का यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है। बच्चों को इन फिल्मों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
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एक अजूबा फिल्म बहुत ही प्रेरणादायक है। इससे सीख मिलती है कि हमें अंधविश्वास में नहीं रहना चाहिए। अपनी मेहनत के जरिए हम कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। - कृष, कक्षा आठ
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फिल्म से बहुत कुछ सीखने को मिला। चित्रा का किरदार बहुत ही अच्छा है। हम मेहनत और विश्वास से जो कुछ भी करेंगे, उसमें अवश्य सफल होंगे। - मानवी, कक्षा आठ
‘महक मिर्जा’ से सीख मिलती है कि हमें सपने देखने चाहिए। अपनी प्रतिभा को पहचानकर हम उन सपनों को सच कर सकते हैं। - देवश्री, कक्षा छह
जिंदगी में सपने देखना जरूरी है। वह हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कभी भी दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए। अपनी प्रतिभा को पहचान लिया जाए तो हम ऊंचाइयों को छू सकते हैं। - नंदिता, कक्षा छह