{"_id":"5b965c58867a557f714f7075","slug":"151536580696-ghaziabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैपिड ट्रेन डिपो की जमीन को सर्वे पूरा, कीमतों का निर्धारण बाकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैपिड ट्रेन डिपो की जमीन को सर्वे पूरा, कीमतों का निर्धारण बाकी
Updated Mon, 10 Sep 2018 05:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रैपिड ट्रेन डिपो की जमीन को सर्वे पूरा, कीमतों का निर्धारण बाकी
गाजियाबाद। दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ तक जाने वाली रैपिड ट्रेन डिपो के लिए जमीन का सर्वे पूरा हो चुका है। अब जमीन खरीदने को लेकर गेंद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के पाले में है, लेकिन उससे पहले तमाम सारे पेंच दिखाई देने लगे हैं। खासकर जमीन की कीमतों को लेकर एनसीआरटीसी की तरफ से सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। इसी के चलते अगस्त के अंतिम सप्ताह में कीमत निर्धारण को लेकर होने वाली बैठक अभी तक नहीं हो पाई है। उधर, पूरे मामले पर एनसीआरटीसी की तरफ से कहा जा रहा है कि कीमतों को लेकर बात चल रही है।
डिपो बनाने को लेकर दुहाई, भिक्कनपुर समेत 10 गांवों की 104 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। बीते दिनों एनसीआरटीसी व राजस्व विभाग की टीम ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। अब कीमतों को निर्धारण कर किसानों को भुगतान किया जाना है, जिसके बाद जमीन खरीद प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना दिया जाना है। अब सर्वे में डिपो के लिए चिह्नित की गई शहरी क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट न्यूनतम 5200 रुपये प्रति वर्गमीटर और ग्रामीण क्षेत्र में न्यूनतम 3200 रुपये निकल कर आया है। इसमें भी गांव के हिसाब से सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी स्थिति में नियमानुसार शहरी क्षेत्र में 10,400 और ग्रामीण क्षेत्र में 12,800 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन खरीद मूल्य देना होगा। ऐसे में बड़ी कीमत अदा करनी होगी, जिसको लेकर मंथन जारी है।
सूत्रों का कहना है कि एनसीआरटीसी मौजूदा कीमतों को काफी ज्यादा बता रही है, जिस पर प्रशासन की तरफ से तर्क दिया गया है कि भूमि अधिग्रहण कानून के इतर जाकर जमीन की खरीद नहीं की जा सकती है। वैसे भी किसान सर्किल रेट से नीचे जाकर किसी भी सूरत में जमीन देने पर राजी नहीं होंगे। अब सूत्र यहां तक दावा कर रहे हैं कि एनसीआरटीसी की तरफ से अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुधीर शर्मा का कहना है कि यह बेहद संवेदनशील विषय है, इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। कीमत निर्धारण को लेकर पहले से कमेटी बनी हुई है, जो सारे बिंदुओं पर गौर कर निर्णय लेगी। उधर, एडीएम भू-अर्जन मदन सिंह गर्ब्याल का कहना है कि सर्वे का काम पूरा हो चुका है। हमारी तरफ से स्पष्ट किया जा चुका है कि सर्किल रेट का शहरी क्षेत्र में दो गुना और ग्रामीण में चार गुना मुआवजा दिया जाए। अब निर्णय एनसीआरटीसी को लेना है, क्योंकि जमीन अधिग्रहण नहीं किया जा रहा, बल्कि जमीन खरीदी जा रही है।
विज्ञापन
कीमतों को लेकर उलझा मामला तो होगी देरी
डिपो की जमीन को लेकर मामला समय रहते नहीं सुलझा, तो प्रोजेक्ट से जुड़े काम में देरी हो सकती है। दिल्ली से मेरठ तक 82 किमी का रैपिड रूट वर्ष 2024 तक बनकर तैयार हो जाएगा। रूट निर्माण के लिए दुहाई से सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। वहीं, टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसी के साथ जमीन खरीद प्रक्रिया के लिए शासन की तरफ से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित हो चुकी है। जल्द ही बैठक में कीमतों का निर्धारण किया जाना है।
विज्ञापन
गाजियाबाद। दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ तक जाने वाली रैपिड ट्रेन डिपो के लिए जमीन का सर्वे पूरा हो चुका है। अब जमीन खरीदने को लेकर गेंद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के पाले में है, लेकिन उससे पहले तमाम सारे पेंच दिखाई देने लगे हैं। खासकर जमीन की कीमतों को लेकर एनसीआरटीसी की तरफ से सहमति बनती दिखाई नहीं दे रही है। इसी के चलते अगस्त के अंतिम सप्ताह में कीमत निर्धारण को लेकर होने वाली बैठक अभी तक नहीं हो पाई है। उधर, पूरे मामले पर एनसीआरटीसी की तरफ से कहा जा रहा है कि कीमतों को लेकर बात चल रही है।
डिपो बनाने को लेकर दुहाई, भिक्कनपुर समेत 10 गांवों की 104 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। बीते दिनों एनसीआरटीसी व राजस्व विभाग की टीम ने सर्वे का काम पूरा कर लिया है। अब कीमतों को निर्धारण कर किसानों को भुगतान किया जाना है, जिसके बाद जमीन खरीद प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना दिया जाना है। अब सर्वे में डिपो के लिए चिह्नित की गई शहरी क्षेत्र की जमीन का सर्किल रेट न्यूनतम 5200 रुपये प्रति वर्गमीटर और ग्रामीण क्षेत्र में न्यूनतम 3200 रुपये निकल कर आया है। इसमें भी गांव के हिसाब से सर्किल रेट में बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी स्थिति में नियमानुसार शहरी क्षेत्र में 10,400 और ग्रामीण क्षेत्र में 12,800 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन खरीद मूल्य देना होगा। ऐसे में बड़ी कीमत अदा करनी होगी, जिसको लेकर मंथन जारी है।
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि एनसीआरटीसी मौजूदा कीमतों को काफी ज्यादा बता रही है, जिस पर प्रशासन की तरफ से तर्क दिया गया है कि भूमि अधिग्रहण कानून के इतर जाकर जमीन की खरीद नहीं की जा सकती है। वैसे भी किसान सर्किल रेट से नीचे जाकर किसी भी सूरत में जमीन देने पर राजी नहीं होंगे। अब सूत्र यहां तक दावा कर रहे हैं कि एनसीआरटीसी की तरफ से अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। एनसीआरटीसी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुधीर शर्मा का कहना है कि यह बेहद संवेदनशील विषय है, इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है। कीमत निर्धारण को लेकर पहले से कमेटी बनी हुई है, जो सारे बिंदुओं पर गौर कर निर्णय लेगी। उधर, एडीएम भू-अर्जन मदन सिंह गर्ब्याल का कहना है कि सर्वे का काम पूरा हो चुका है। हमारी तरफ से स्पष्ट किया जा चुका है कि सर्किल रेट का शहरी क्षेत्र में दो गुना और ग्रामीण में चार गुना मुआवजा दिया जाए। अब निर्णय एनसीआरटीसी को लेना है, क्योंकि जमीन अधिग्रहण नहीं किया जा रहा, बल्कि जमीन खरीदी जा रही है।
विज्ञापन
कीमतों को लेकर उलझा मामला तो होगी देरी
डिपो की जमीन को लेकर मामला समय रहते नहीं सुलझा, तो प्रोजेक्ट से जुड़े काम में देरी हो सकती है। दिल्ली से मेरठ तक 82 किमी का रैपिड रूट वर्ष 2024 तक बनकर तैयार हो जाएगा। रूट निर्माण के लिए दुहाई से सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। वहीं, टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसी के साथ जमीन खरीद प्रक्रिया के लिए शासन की तरफ से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित हो चुकी है। जल्द ही बैठक में कीमतों का निर्धारण किया जाना है।