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भाई के गम में मौत को लगाया गले, 9 दिन बाद मिली लाश
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:48 AM IST
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भाई के गम में मौत को लगाया गले, 9 दिन बाद मिली लाश
गाजियाबाद। भाई की मौत के गम में हरिद्वार के पुल जटवाड़ा से छलांग लगाने वाली 18 साल की आशिया मलिक की लाश नौ दिन बाद गोताखोरों ने तलाश ली। शुक्रवार को उसका शव गंगा में लगे जाल में फंसा मिला। बेटे की मौत के बाद अब बेटी की भी लाश मिलने से माता-पिता बुरी तरह से टूट चुके हैं।
कैला भट्टी लिंटर फैक्ट्री के पास रहने वाले फारुख मलिक के दस साल बेटे उवैश की किडनी खराब हो गई थी। हरिद्वार में उसका इलाज चल रहा था। 10 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। फारुख अपनी पत्नी महराजो और बेटी आशिया के साथ उवैश का शव एंबुलेंस से घर ला रहे थे। चाचा तौसीफ मलिक ने बताया कि आशिया भाई को बेहद प्यार करती थी। वह एंबुलेंस में बुरी तरह बिलख रही थी। इस पर चालक ने फारुख को पुल जटवाड़ा (हरिद्वार) पर ही एंबुलेंस खाली करने को कहा। वह किसी तरह दूसरी एंबुलेंस बुलाकर बेटे के शव को उसमें रखवा रहे थे। इसी बीच महराजो बेहोश होकर सड़क किनारे गिर पड़ी। वहीं, आशिया भाई के मौत से इतनी गमजदा थी उसने अचानक पुल से ही गंगा में छलांग लगा दी। एंबुलेंस में बेटे की लाश और जवान बेटी के नदी में छलांग लगाने के बाद फारुख ने किसी तरह खुद को और पत्नी को संभाला। कुछ देर खोजबीन के बाद जब आशिया का पता नहीं चला तो फारुख पत्नी के साथ दूसरी एंबुलेंस से बेटे का शव लेकर घर आ गए और उसे सुपुर्दे खाक करके अगले दिन बेटी की तलाश में निकल पड़े। शुक्रवार को आशिया का शव गंगा में लगे जाल में फंसा मिल गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।
भाई के पास ही बनेगी आशिया की कब्र
चाचा तौफीफ ने बताया कि आशिया को उवैश से बेहद प्यार था। उसके बगैर उसका वक्त नहीं गुजरता था। इसलिए उसकी कब्र भी उवैश के पास ही कैला भट्टा के इस्लामनगर स्थित कब्रिस्तान में बनाई जाएगी।
गाजियाबाद। भाई की मौत के गम में हरिद्वार के पुल जटवाड़ा से छलांग लगाने वाली 18 साल की आशिया मलिक की लाश नौ दिन बाद गोताखोरों ने तलाश ली। शुक्रवार को उसका शव गंगा में लगे जाल में फंसा मिला। बेटे की मौत के बाद अब बेटी की भी लाश मिलने से माता-पिता बुरी तरह से टूट चुके हैं।
कैला भट्टी लिंटर फैक्ट्री के पास रहने वाले फारुख मलिक के दस साल बेटे उवैश की किडनी खराब हो गई थी। हरिद्वार में उसका इलाज चल रहा था। 10 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। फारुख अपनी पत्नी महराजो और बेटी आशिया के साथ उवैश का शव एंबुलेंस से घर ला रहे थे। चाचा तौसीफ मलिक ने बताया कि आशिया भाई को बेहद प्यार करती थी। वह एंबुलेंस में बुरी तरह बिलख रही थी। इस पर चालक ने फारुख को पुल जटवाड़ा (हरिद्वार) पर ही एंबुलेंस खाली करने को कहा। वह किसी तरह दूसरी एंबुलेंस बुलाकर बेटे के शव को उसमें रखवा रहे थे। इसी बीच महराजो बेहोश होकर सड़क किनारे गिर पड़ी। वहीं, आशिया भाई के मौत से इतनी गमजदा थी उसने अचानक पुल से ही गंगा में छलांग लगा दी। एंबुलेंस में बेटे की लाश और जवान बेटी के नदी में छलांग लगाने के बाद फारुख ने किसी तरह खुद को और पत्नी को संभाला। कुछ देर खोजबीन के बाद जब आशिया का पता नहीं चला तो फारुख पत्नी के साथ दूसरी एंबुलेंस से बेटे का शव लेकर घर आ गए और उसे सुपुर्दे खाक करके अगले दिन बेटी की तलाश में निकल पड़े। शुक्रवार को आशिया का शव गंगा में लगे जाल में फंसा मिल गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा था।
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भाई के पास ही बनेगी आशिया की कब्र
चाचा तौफीफ ने बताया कि आशिया को उवैश से बेहद प्यार था। उसके बगैर उसका वक्त नहीं गुजरता था। इसलिए उसकी कब्र भी उवैश के पास ही कैला भट्टा के इस्लामनगर स्थित कब्रिस्तान में बनाई जाएगी।
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